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नालंदा जिले में गर्मी से लोगों का हाल बेहाल है। अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। गर्मी के चलते राजगीर जू सफारी में जानवरों की दिनचर्या में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सर्दियों में जो बाघ और शेर सड़क किनारे धूप सेंकते नजर आते थे, अब वे दिन चढ़ते ही घने पेड़ों की छांव और पानी की शरण ले रहे हैं। सफारी प्रशासन ने इन जानवरों को ‘हीट वेव’ से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। शेड में पानी का छिड़काव किया जा रहा है निदेशक राम सुंदर एम ने बताया कि सफारी के अंदर बने शेल्टर(सेल) में जानवरों के लिए डक्ट कूलिंग सिस्टम पहले से ही एक्टिव है। शाम 6 बजे के बाद जब ये जानवर खुद-ब-खुद अपने सेल में लौटते हैं, तो उन्हें ठंडी हवा के बीच आराम मिलता है। दिन के समय, जब वे खुले एनक्लोजर में होते हैं, तो उनके लिए विशेष फूस के शेड बनाए गए हैं। इन शेडों पर लगातार पानी का छिड़काव(स्प्रिंकल) किया जाता है, जिससे वहां नमी और ठंडक बनी रहती है। नेचुरल पॉन्ड बने पर्यटकों के लिए आकर्षण दोपहर के समय जब गर्मी अपने चरम पर होती है, तब बाघ और शेर अक्सर एनक्लोजर में बने प्राकृतिक तालाबों के किनारे या पानी के अंदर बैठे नजर आते हैं। पेड़ों की घनी छांव और पानी का यह मेल पर्यटकों को खूब लुभा रहा है। हालांकि, सुबह 7 बजे से 11 बजे तक सफारी की गाड़ियों के आसपास इनकी चहल-पहल बनी रहती है, लेकिन धूप तेज होते ही ये सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख कर लेते हैं। स्वास्थ्य पर विशेष नजर निदेशक राम सुंदर एम ने बताया कि जानवरों की डाइट प्राकृतिक(मांसाहारी) ही रखी गई है, लेकिन उनके स्वास्थ्य की प्रतिदिन जांच की जा रही है। मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भीषण गर्मी के कारण किसी भी जानवर में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) की समस्या न हो। सफारी में वन्यजीवों की मौजूदा स्थिति सफारी प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, वर्तमान में यहां वन्यजीवों का कुनबा काफी मजबूत है। 6 शेर और 5 तेंदुए है। गर्मी के कारण जानवरों के व्यवहार में प्राकृतिक बदलाव आया है। वे अब खुले रास्तों के बजाय छायादार क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं। सेहत और कूलिंग सिस्टम की 24 घंटे निगरानी की जा रही है।


