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‘मोबाइल से देख कर पता चला कि विधायक राजू कुमार को 4 साल की सजा हो गई है। मैं चाहता हूं कि उन्हीं के बेटे या पत्नी को नया उम्मीदवार बनाया जाए। ऐसा होता है तो मैं उन्हें वोट दूंगा। अगर कोई और भाजपा का प्रत्याशी होगा, तो हम बीजेपी को वोट नहीं देंगे। विरोधी पार्टी को अपना वोट देंगे। हमारे एमएलए ने हमारे लिए काम किया है। यहां अब छिनतई की घटना कम हुई है।’ ये कहना साहेबगंज विधानसभा के रहने वाले दीननाथ सिंह का है। भाजपा विधायक डॉ. राजू कुमार सिंह को गैर इरादतन हत्या के मामले में चार साल की सजा मिली है। इसके बाद साहेबगंज विधानसभा का राजनीतिक माहौल पूरी तरह बदल गया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म हो जाएगी। नियम के मुताबिक, चुनाव आयोग को साहेबगंज विधानसभा सीट पर अगले छह महीने के अंदर उपचुनाव कराना होगा। ऐसे में पूरे विधानसभा क्षेत्र में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि उपचुनाव में भाजपा किसे मैदान में उतारेगी और जनता किसे अपना अगला विधायक देखना चाहती है। इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए भास्कर रिपोर्टर मुजफ्फरपुर जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर साहेबगंज विधानसभा पहुंचे। प्रखंड कार्यालय, रामपुर चौक, बल्थी चौक और बाजारों में लोगों से बातचीत की। हर जगह एक ही चर्चा थी-“राजू सिंह को सजा तो हो गई, अब आगे क्या होगा?” राजू सिंह के सजा पर लोगों की क्या राय है? क्या लोग अब भी विधायक के समर्थन में हैं? MLA ने अपने क्षेत्र के लिए कैसा काम किया? अब उपचुनाव में संभावित प्रत्याशी कौन हो सकते हैं? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सजा पर लोगों की राय बंटी, लेकिन कानून पर भरोसा कायम सबसे पहले रिपोर्टर साहेबगंज प्रखंड कार्यालय पहुंचे। यहां मिले स्थानीय निवासी अवधेश पांडेय ने कहा कि अदालत का फैसला कानून के अनुसार है और इसका सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर किसी की जान गई है, तो कानून अपना काम करेगा। सजा हुई है तो यह न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। अगर कार्रवाई नहीं होती, तो कानून और सरकार दोनों पर सवाल उठते।” हालांकि उन्होंने यह भी माना कि राजू सिंह जनता के बीच रहने वाले नेता रहे हैं और लोगों की समस्याएं सुनते थे। दुकानदार बोले- लोगों की अपेक्षा नहीं हुई पूरी इसके बाद रिपोर्टर रामपुर चौक पहुंचे। यहां एक मिठाई की दुकान पर चाय के साथ राजनीति की चर्चा चल रही थी। दुकानदार वीरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने कहा, “जो हुआ, कोर्ट ने किया है। किसी की जान गई थी, इसलिए सजा मिलना स्वाभाविक है। अब राजनीति अपनी जगह है। भाजपा किसे उम्मीदवार बनाएगी, इस पर सबकी नजर रहेगी।” उन्होंने यह भी कहा कि विधायक के तौर पर राजू सिंह का काम औसत रहा और विकास के मामले में लोगों की अपेक्षाएं पूरी नहीं हो सकीं। दुकान पर मौजूद स्थानीय कन्हैया शर्मा ने कहा, “राजू सिंह लोगों के बीच रहने वाले नेता हैं। हर्ष फायरिंग जैसी घटना गलत है। खुशी में गोली चलाना अपराध है, इसलिए सजा मिलना उचित है। लेकिन आगे भाजपा किसे टिकट देगी, यह देखना होगा।” वहीं स्थानीय राम बहादुर भगत ने कहा- “सुना है विधायक जी को सजा हुई है। उनका व्यवहार अच्छा था। अब आगे जनता फैसला करेगी।” स्थानीय बोले- गलत तरीके से फंसाया गया करीब 10 किलोमीटर दूर बल्थी चौक पर माहौल कुछ अलग दिखा। यहां अधिकांश लोग राजू सिंह के समर्थन में नजर आए। स्थानीय रामप्यारे सिंह ने कहा- “हमें लगता है कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है। उनकी पहचान दबंग से ज्यादा मिलनसार नेता की रही है। क्षेत्र में उन्होंने काफी काम किया है और जनता के बीच हमेशा उपलब्ध रहे हैं।” ‘परिवार को टिकट नहीं मिला तो विरोध करेंगे’ स्थानीय निवासी मुन्टुन सिंह ने साफ कहा- “अगर उपचुनाव होता है तो टिकट राजू सिंह के परिवार से किसी को मिलना चाहिए। उनकी पत्नी या बेटे को उम्मीदवार बनाया जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम विरोध करेंगे।” उनका कहना है कि राजू सिंह ने क्षेत्र में कई विकास काम कराए और लोगों से सीधा जुड़ाव रखा। स्थानीय सिंघेश्वर पासवान ने कहा- “राजू सिंह हर समाज के लोगों से जुड़े रहते थे। किसी भी समुदाय का व्यक्ति बुलाता था, तो वे पहुंचते थे। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही। उनके जाने से विकास की रफ्तार थम सकती है। ‘हर रविवार लगता था जनता दरबार’ वीरेंद्र महतो ने कहा- “राजू सिंह का काम करने का तरीका अलग था। हर रविवार जनता दरबार लगता था। वहां जाति नहीं, समस्या पूछी जाती थी। हर वर्ग के लोगों का काम होता था।” स्थानीय दीनानाथ सिंह और बहादुर शाह ने कहा कि अगर भाजपा राजू सिंह के परिवार से किसी को टिकट देती है, तो हमारा वोट भाजपा को जाएगा। लेकिन अगर किसी दूसरे उम्मीदवार को टिकट मिला, तो हम भाजपा का समर्थन नहीं करेंगे। जानिए उपचुनाव में कौन हो सकते हैं संभावित उम्मीदवार? बीजेपी- राजू सिंह की पत्नी रेणु सिंह
रेणु सिंह, अर्चना हत्याकांड में सजा पाने वाले राजू सिंह की पत्नी है। हत्याकांड में राजू सिंह की पत्नी रेणु सिंह का भी नाम था, लेकिन उन्हें कोर्ट से सजा नहीं मिली है। राजू सिंह के समर्थन को देखते हुए पार्टी उनकी पत्नी को यहां से अपना उम्मीदवार बना सकती है। राजद – पृथ्वीनाथ राय
पृथ्वीनाथ राय राजद के नेता हैं। पिछले साल यानी अक्टूबर 2025 में हुए विधानसभा चुनाव में पृथ्वीनाथ राय साहेबगंज विधानसभा सीट से राजद के ही प्रत्याशी थे। पृथ्वीनाथ राय को राजू सिंह से करीब 13000 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव में पृथ्वीनाथ राय के दूसरे नंबर पर रहने के कारण एक बार फिर से राजद उपचुनाव में उन्हें प्रत्याशी बना सकती है। जनसुराज- ठाकुर हरि किशोर सिंह
ठाकुर हरि किशोर सिंह को पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में जनसुराज ने अपना प्रत्याशी बनाया था। ठाकुर हरि किशोर सिंह चौथे नंबर पर रहे थे। उन्हें 4,197 वोट मिले थे, जो नोटा को मिले वोट से भी कम था। चुनाव में नोटा को 4,736 वोट मिले थे। निर्दलीय – तुलसी राय हो सकते हैं उम्मीदवार। (साल2023 में एक तिलक समारोह के दौरान साहेबगंज के विधायक राजू सिंह और तुलसी राय के बीच हुए विवाद ने काफी तूल पकड़ा था, जिसमें दोनों पक्षों की ओर से गंभीर आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए थे और पुलिस ने इस मामले में जांच की थी।) अब जानिए राजू सिंह कहां पढ़े और कैसे राजनीति में एंट्री की राजू सिंह ने की विदेश से इंजीनियरिंग की पढ़ाई, फिर बने उद्योगपति 12 जनवरी 1970 को जन्मे डॉ. राजू कुमार सिंह बिहार के उन चुनिंदा नेताओं में गिने जाते हैं, जिनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि काफी मजबूत रही है। उन्होंने तत्कालीन सोवियत क्षेत्र की प्रतिष्ठित एलवीओवी पॉलिटेक यूनिवर्सिटी से बीटेक और एमटेक की पढ़ाई की। बाद में उन्हें महाराष्ट्र की एक यूनिवर्सिटी से मानद पीएचडी की , जिसके बाद उनके नाम के साथ ‘डॉ.’ जुड़ गया। राजनीति में आने से पहले उन्होंने फार्मास्यूटिकल (दवा) कारोबार में अपनी पहचान बनाई। उनका व्यवसाय भारत के अलावा रूस, अमेरिका समेत कई देशों तक फैला रहा। चुनावी हलफनामों के अनुसार वे बिहार के संपन्न विधायकों में शामिल रहे हैं। अत्याचार के विरोध से शुरू हुई राजनीति उत्तर बिहार की राजनीति में डॉ. राजू कुमार सिंह की पहचान 1990 के दशक में बनी। स्थानीय स्तर पर यह माना जाता है कि उस दौर में कुछ प्रभावशाली नेताओं के खिलाफ उन्होंने खुलकर आवाज उठाई, जिससे उन्हें आम लोगों का समर्थन मिला। इसी दौरान उनकी छवि एक दबंग नेता के रूप में भी बनी और धीरे-धीरे उन्होंने साहेबगंज क्षेत्र में मजबूत जनाधार तैयार कर लिया। लोजपा से शुरुआत, पांच बार बने विधायक राजू सिंह ने साल 2005 में रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) से चुनावी राजनीति की शुरुआत की और पहली बार साहेबगंज विधानसभा सीट से विधायक बने। उसी साल दोबारा हुए चुनाव से पहले उन्होंने जनता दल (यूनाइटेड) का दामन थाम लिया और फिर लगातार 2005 और 2010 में जीत दर्ज की। 2015 में जदयू के महागठबंधन में जाने के बाद सीट राजद के खाते में चली गई। भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के बावजूद उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2020 में एनडीए के तहत विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के उम्मीदवार के रूप में उन्होंने फिर जीत हासिल की। बाद में वीआईपी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए और 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर लगातार पांचवीं बार विधायक बने। पर्यटन मंत्री बने, फिर मंत्रीमंडल में नहीं मिली दोबारा जगह 2025 में उन्हें बिहार सरकार में पर्यटन मंत्री बनाया गया। हालांकि, बाद में मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें दोबारा जगह नहीं मिली। राजनीतिक गलियारों में इसे उनके खिलाफ चल रहे हर्ष फायरिंग केस से जोड़कर भी देखा जाता रहा। राजद नेता तुलसी राय सहित सीओ ने लगाया था मारपीट का आरोप राजू कुमार सिंह का राजनीतिक जीवन लगातार विवादों के बीच भी रहा। पिछले साल मंत्री रहते हुए राजद नेता तुलसी राय ने उन पर मारपीट का आरोप लगाया था। इसके अलावा एक अंचल अधिकारी (सीओ) ने भी उनके खिलाफ मारपीट का आरोप लगाया था। चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके खिलाफ दस आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं। जानिए क्या है हर्ष फायरिंग का मामला? 31 दिसंबर 2018 की रात दिल्ली के बसंत कुंज स्थित उनके फार्महाउस में न्यू ईयर की पार्टी हो रही थी। पार्टी का आयोजन राजू सिंह और उनके भाई संजय सिंह की ओर से किया गया था। पार्टी में पेशे से रीयल स्टेट कारोबारी और संजय सिंह के दोस्त विकास गुप्ता अपनी बेटी और पत्नी अर्चना गुप्ता के साथ शामिल हुए थे। दिल्ली पुलिस की ओर से कोर्ट में पेश किए गए चार्जशीट के मुताबिक, जैसे ही घड़ी में 12 बजे, वैसे ही राजू सिंह के साथ-साथ अन्य लोग ताबड़तोड़ फायरिंग करने लगे। फायरिंग का शोर जब थमा, अर्चना डांस फ्लोर पर लहूलुहान पड़ी थी। विकास गुप्ता अपने दोस्त संजय की गाड़ी से अर्चना को रात करीब एक बजे फोर्टिज अस्पताल लेकर पहुंचे, तब मामले की जानकारी पुलिस को हुई। साउथ दिल्ली की रहने वाली पेशे से आर्किटेक्ट अर्चना गुप्ता (42) के सिर के पिछले हिस्से में कान के पास गोली लगी थी। गोली सिर में फंसी हुई देखकर डॉक्टरों ने उन्हें ICU में एडमिट कर लाइफ सपोर्ट पर रखा। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। पुलिस मौके पर पहुंची तो फरार मिले राजू सिंह घटना की सूचना पुलिस को 1 जनवरी 2019 को मिली। इसके बाद पुलिस फार्म हाउस पहुंची, लेकिन राजू सिंह और फायरिंग में शामिल उनके करीबी साथी घटनास्थल से फरार हो चुके थे। घटनास्थल को पानी से साफ कर दिया गया था। इस्तेमाल किए गए कारतूस गायब थे। एक पुलिस अधिकारी के बयान पर हत्या के प्रयास और सबूत नष्ट करने का मामला दर्ज किया गया। अर्चना के पति विकास समेत चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए। पुलिस ने जांच के दौरान राजू सिंह और उनके ड्राइवर हरी सिंह को उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने तक दोनों को 7 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया था। राजू सिंह ने नशे में गोलियां चलाईं- अर्चना के पति उधर, अर्चना के पति विकास गुप्ता ने पुलिस को बताया था कि वे फतेहपुर बेरी के मंडी गांव में राजू सिंह के फार्म हाउस में आयोजित पार्टी में गए थे। वे कभी राजू सिंह के भाई संजय सिंह की एक बंद हो चुकी दवा कंपनी में पार्टनर थे। फिलहाल वे गौतम नगर में रीयल एस्टेट का कारोबार करते थे और राजू सिंह के भाई से उनका संपर्क बना हुआ था। उन्होंने बताया था कि जैसे-जैसे एक जनवरी की ओर घड़ी की सुईयां बढ़ रही थी, राजू सिंह नशे में धुत होकर नाच रहे थे। इसी दौरान उन्होंने राइफल उठाई और हवा में गोलियां चलाना शुरू दी। कुछ गोलियों के चलने के बाद अर्चना अचानक गिर पड़ीं थी। खून साफ करने के लिए डीजे कर्मियों दिए थे 500-500 रुपए का ऑफर घटना को लेकर 28 सितंबर 2019 को चार्जशीट दाखिल की गई थी। चार्जशीट तैयार करने वाले एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, फायरिंग के बाद राजू सिंह ने घटनास्थल पर मौजूद डीजे कर्मियों और वेटर को फर्श से खून साफ करने के लिए 500-500 रुपए की पेशकश की, लेकिन उन लोगों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन लोगों को जाने के लिए कहा गया। इसके बाद राजू सिंह की पत्नी रेनू सिंह, उनके भाई राणा राजेश और दोस्त रमिंदर सिंह ने खून साफ किया। उन्होंने खाली कारतूस भी उठाए और पास की झाड़ियों में फेंक दिए। इस मामले में डीजे और विकास गुप्ता के परिवार के 3 सदस्यों समेत 32 गवाहों से पूछताछ की गई थी। अधिकारी के मुताबिक, राजू सिंह ने पूछताछ में डीजे को पैसे देने की पेशकश से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि कोई रिश्वत नहीं दी गई। ये एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी। मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फार्म हाउस के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, गवाहों के बयान दर्ज किए और राजू सिंह के बयान दर्ज किए। इससे पुष्टि हुई है कि उस रात 3 राउंड गोलियां चलाई गई थीं। राजू सिंह ने अपनी .22 पिस्टल से दो राउंड फायरिंग की थी। जबकि हरि सिंह ने अपनी 315 बोर राइफल से एक गोली चलाई। इनमें एक गोली अर्चना गुप्ता के सिर में जा लगी। जांच में पता चला कि दोनों हथियार लाइसेंसी थे। 7 साल की सुनवाई के बाद फैसला करीब सात साल चली सुनवाई के बाद दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें गैर-इरादतन हत्या (आईपीसी की धारा 304 भाग-दो) और आर्म्स एक्ट के उल्लंघन का दोषी ठहराते हुए चार साल के कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने मृतका के पति को 25 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। भुगतान नहीं करने पर अतिरिक्त तीन महीने की सजा भुगतनी होगी।

