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राज्यसभा चुनाव: अग्निपरीक्षा की आखिरी रात, बची रहेगी ईमान या पैसों की खातिर बिक जाएंगे श्रीमान?

राज्यसभा चुनाव: अग्निपरीक्षा की आखिरी रात, बची रहेगी ईमान या पैसों की खातिर बिक जाएंगे श्रीमान?

Jharkhand Rajya Sabha Election: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून को होने वाले मतदान से पहले राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है. मतदान से ठीक पहले की रात को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि गुरुवार सुबह मतदान शुरू होने के साथ ही शाम तक तस्वीर साफ हो जाएगी. ऐसे में राजनीतिक दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने में जुटे हुए हैं और राजधानी रांची में रिजॉर्ट पॉलिटिक्स का दौर लगातार जारी है.

अलग-अलग ठिकानों पर ठहरे विधायक

राज्यसभा चुनाव को लेकर सभी प्रमुख दलों ने अपने विधायकों को सुरक्षित रखने की रणनीति अपनाई है. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के 24 विधायक रांची के रेडिशन ब्लू होटल में ठहरे हुए हैं. कांग्रेस के विधायक होटल चाणक्य वीएनआर में डेरा जमाए हुए हैं, जबकि सबसे बड़ी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के विधायक मुख्यमंत्री आवास में मौजूद हैं. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि मतदान से पहले की यह अवधि विधायकों को एकजुट रखने और संभावित टूट-फूट को रोकने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होती है.

तीन प्रत्याशियों के बीच मुकाबला

इस चुनाव में तीन उम्मीदवार मैदान में हैं. झामुमो की ओर से बैद्यनाथ महतो, कांग्रेस की तरफ से प्रणव झा और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नाथवानी चुनाव लड़ रहे हैं. राजनीतिक गणित के अनुसार, बैद्यनाथ राम की स्थिति सबसे मजबूत मानी जा रही है, क्योंकि उनके पक्ष में झामुमो के 36 विधायक हैं. वहीं, निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी को एनडीए के 24 विधायकों का समर्थन प्राप्त है. कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा के पास फिलहाल पार्टी के 16 विधायकों का समर्थन है.

जीत के लिए 28 वोट जरूरी

81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 28 मतों की आवश्यकता है. बैद्यनाथ राम के पास आवश्यक संख्या से अधिक समर्थन होने के कारण उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है. दूसरी ओर, परिमल नाथवानी को जीत के लिए चार अतिरिक्त वोटों की जरूरत बतायी जा रही है, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को 12 और वोटों की आवश्यकता है.

हॉर्स ट्रेडिंग की आशंकाओं के बीच बढ़ी चौकसी

हर राज्यसभा चुनाव की तरह इस बार भी हॉर्स ट्रेडिंग और क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं को लेकर चर्चाएं तेज हैं. इसी वजह से राजनीतिक दल अपने विधायकों पर विशेष नजर बनाए हुए हैं. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि मतदान से पहले की रात कई समीकरण बदल सकते हैं. इसलिए बुधवार की रात को इस चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण रात माना जा रहा है.

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गुरुवार को साफ हो जाएगी तस्वीर

18 जून की सुबह मतदान शुरू होने के बाद शाम तक मतगणना पूरी हो जाएगी और यह स्पष्ट हो जाएगा कि विधानसभा के भीतर किस दल की रणनीति कितनी सफल रही. फिलहाल सभी दल अपने विधायकों की एकजुटता बनाए रखने के प्रयास में जुटे हैं और पूरे राज्य की निगाहें मतदान से पहले के अंतिम राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं. राजनीति भी अजीब खेल है. दिन में विचारधारा की बातें होती हैं और रात होते-होते सबकी नजरें इस पर टिक जाती हैं कि कहीं कोई विधायक “विचार” बदलने की असाधारण प्रतिभा तो नहीं दिखा देता. लोकतंत्र में गणित जितना महत्वपूर्ण है, उतनी ही महत्वपूर्ण रातें भी हो जाती हैं.

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