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रामगढ़ स्थित गोला प्रखंड में जंगली हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले एक माह से क्षेत्र में लगातार उत्पात मचा रहे 45 हाथियों के बीच गुरुवार रात 14 हाथियों का नया झुंड हेसापोड़ा जंगल में पहुंच गया। इसके साथ ही प्रखंड क्षेत्र में हाथियों की संख्या बढ़कर 59 हो गई है। हाथियों के बढ़ते दबाव से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। किसानों की फसलें लगातार बर्बाद हो रही हैं। हेसापोड़ा जंगल में प्रवेश करते ही 14 हाथियों के झुंड ने सिंगारी गांव में बासुदेव महतो के घर को क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके बाद हाथियों ने आसपास के खेतों में लगी धान का बिचड़ा, मक्का, सब्जियों समेत अन्य फसलों को खाया। फसलों को रौंदा। इससे भारी नुकसान हुआ। कई गांवों में लगातार उत्पात मचा रहा झुंड वहीं, पहले से मौजूद 45 हाथियों का झुंड चार-पांच टुकड़ियों में बंटकर सरला कला, कुम्हरदगा,सोसोकला, चोकाद, मगनपुर, महलीडीह, रोला, सुतरी, चोपादारु, घाघरा, हेसापोड़ा, बड़की हेसल, जयंती बेड़ा, सिंगारी और कोरांबे सहित कई गांवों में लगातार उत्पात मचा रहा है। हाथी सड़क के एक ओर से दूसरी ओर नहीं जा पा रहे हैं। इसी कारण वे गांवों की ओर भटक रहे हैं। वे भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि यदि सड़क निर्माण के दौरान हाथियों के आवागमन के लिए वन्यजीव कॉरिडोर बनाया जाता, तो आज उन्हें इतनी बड़ी क्षति नहीं उठानी पड़ती। ग्रामीणों ने वन विभाग और संबंधित एजेंसियों से तत्काल स्थायी समाधान की मांग की है। एक माह से किसानों की बढ़ी मुसीबत, लगा रहता है डर
झूबरी देवी, दीपनी देवी, कुशलालमहतो, राज किशोर महतो, मीनादेवी, चिंता देवी समेत दर्जनों किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि भारतमाला परियोजना के तहत निर्माणाधीन फोरलेन सड़क पर बने डिवाइडर के कारण हाथियों का पारंपरिक आवागमन बाधित हो गया है। वहीं, एक माह से ग्रामीण डर के साए में जी रहे हैं। कब हाथियों का झुंड गांव में आ जाए। लोगों ने वन विभाग से हाथियों के आवागमन पर रोक लगाने की मांग की है। इससे खेती और घर दोनों सुरक्षित रहे। फिलहाल वनविभाग ने हाथियों के आसपास ग्रामीणों को नहीं जाने की हिदायतदी है। बिना कारण हाथियों को तंग नहीं करने की बात कही। वन विभाग ड्रोन कैमरे से कर रही हाथियों की निगरानी
हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए मगनपुर के किसान वनविभाग के कर्मियों के साथ मिलकर रातभर ड्रोन कैमरे से निगरानी कर रहे हैं। इसके बावजूद हाथियों के लगातार गांवों की ओर आने से ग्रामीणों कीचिंता बढ़ गई है।

