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झारखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को उन पारा शिक्षकों को बड़ी राहत दी, जो बाद में नियमित नियुक्ति के तहत इंटर प्रशिक्षित शिक्षक बने और सेवानिवृत्त हुए। जस्टिस दीपक रोशन की कोर्ट ने कहा कि अगर किसी कर्मचारी ने बिना किसी सेवा व्यवधान के पहले संविदा पर और फिर उसी विभाग में नियमित सेवा दी है तो उसकी पूरी सेवा अवधि को पेंशन योग्य सेवा मानी जानी चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार की उस दलील को खारिज कर दी, जिसमें कहा गया था कि याचिकाकर्ताओं ने 10 वर्ष की नियमित सेवा पूरी नहीं की है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि पारा शिक्षक के रूप में दी गई सेवा अवधि को पेंशन योग्य सेवा में जोड़ते हुए सभी याचिकाकर्ताओं की पेंशन अन्य सेवानिवृत्ति लाभ की पुनर्गणना कर निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान करें। धनबाद, गिरिडीह, रामगढ़ और पाकुड़ के पांच रिटायर्ड शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन और सिद्धार्थ रंजन ने अदालत को बताया कि सभी शिक्षक पहले 8 से 12 वर्ष तक पारा शिक्षक रहे। इसके बाद उनकी नियमित इंटर प्रशिक्षित शिक्षक के रूप में नियुक्ति हुई। लेकिन नियमित सेवा के दौरान वे 10 वर्ष की अनिवार्य अवधि से कुछ दिन पहले वे रिटायर हो गए। इस कारण उन्हें पेंशन से वंचति कर दिया गया।

