वर्तमान स्थिति: फैैकल्टी की कमी से जूझ रहा संस्थान, वेंटिलेटर नहीं, दवा का पूरा स्टॉक भी नहीं झारखंड हाईकोर्ट ने रिम्स को देश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों की श्रेणी में लाने के लिए भर्ती, आधारभूत संरचना, चिकित्सा उपकरणों की खरीद और भवनों के जीर्णोद्धार समेत आठ महत्वपूर्ण कार्य 30 मई 2026 तक हर हाल में पूरे करने का निर्देश दिया था। तत्कालीन निदेशक डॉ. राजकुमार ने स्वयं कोर्ट से अतिरिक्त समय मांगा था, जिसके बाद अदालत ने इसे “अंतिम अवसर’ बताते हुए स्पष्ट कर दिया था कि अब किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या प्रक्रियागत बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी। लेकिन तय समय सीमा बीतने के एक माह बाद भी रिम्स में आठ में से केवल एक निर्देश ‘परिसर को अतिक्रमण मुक्त कराने’ का ही पालन हो सका है। बाकी अधिकतर कार्य या तो अधूरे हैं या उनकी प्रक्रिया अब भी लंबित है। इसका सीधा असर मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था पर पड़ रहा है। संस्थान आज भी फैकल्टी की कमी, जरूरी मशीनों के अभाव, वेंटिलेटर संकट और दवाओं की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। 1. मेडिकल कैडर के रिक्त पदों पर नियुक्ति कोर्ट का निर्देश : असिस्टेंट प्रोफेसर से प्रोफेसर तक 150 से अधिक पदों पर नियुक्ति 30 मई तक पूरी हो। वर्तमान स्थिति : फरवरी से अप्रैल तक केवल असिस्टेंट प्रोफेसर के इंटरव्यू हुए। दो माह बाद भी अंतिम चयन सूची जारी नहीं हुई। 2. सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर की भर्ती कोर्ट का निर्देश : रिक्त पदों पर शीघ्र की जाए नियुक्ति। वर्तमान स्थिति : कई विभागों में नियुक्तियां हुई हैं, लेकिन अब भी अनेक पद खाली हैं। 3. चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की नियुक्ति कोर्ट का निर्देश : रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी हो। वर्तमान स्थिति : 596 स्वीकृत पद, 94 कर्मचारी कार्यरत हैं। वार्ड बॉय, ट्रॉलीमैन, ड्रेसर और सफाईकर्मियों की भारी कमी है। व्यवस्था अब भी आउटसोर्स कर्मियों के भरोसे है। 4. तृतीय एवं नर्सिंग संवर्ग की नियुक्ति कोर्ट का निर्देश : नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाए। वर्तमान स्थिति : थर्ड ग्रेड की नियुक्ति लंबित है। नर्सिंग के 144 पदों का विज्ञापन भी अब तक जारी नहीं हुआ। 5. नए भवन निर्माण की स्वीकृति नहीं मिली कोर्ट का निर्देश: नए निर्माण और पुराने भवनों की मरम्मत। वर्तमान स्थिति : नए भवनों को अब तक प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिली। पुराने भवनों के किसी वार्ड का जीर्णोद्धार पूरा नहीं हुआ। केवल नेत्र एवं ईएनटी वार्ड को तोड़कर न्यूरोसर्जरी वार्ड के एक्सटेंशन का कार्य चल रहा है। 6. जर्जर भवनों की मरम्मत भी नहीं हो सकी कोर्ट का निर्देश : जरूरी मरम्मत कार्य जल्द पूरे हों। वर्तमान स्थिति : चार माह पहले 50 करोड़ रुपए आवंटित होने के बावजूद किसी भी वार्ड की मरम्मत पूरी नहीं हो सकी। 7. मशीन-चिकित्सा उपकरण नहीं खरीदे कोर्ट का निर्देश : जरूरी मशीनों की खरीद पूरी की जाए। वर्तमान स्थिति : कैंसर विभाग की मशीनें, लीनियर एक्सीलरेटर, एडवांस सीटी स्कैन समेत करीब 40 करोड़ रुपए के उपकरणों की खरीद प्रक्रिया अब भी अटकी हुई है। 8. अतिक्रमण हटाने में सफलता मिली कोर्ट का निर्देश : पूरे परिसर को अतिक्रमण मुक्त करें। वर्तमान स्थिति : प्रशासन के सहयोग से रिम्स परिसर की 7 एकड़ जमीन अतिक्रमण मुक्त कर बाउंड्री करा दी गई है। कोर्ट जता चुका है नाराजगी पिछली सुनवाई में भी झारखंड हाईकोर्ट ने लंबित नियुक्तियों और सुधार कार्यों में देरी पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि अब ‘प्रशासनिक जटिलता’ जैसे बहाने स्वीकार नहीं किए जाएंगे। 30 मई 2026 तक सभी कार्य पूरे करने की जिम्मेदारी तत्कालीन निदेशक डॉ. राजकुमार की तय हुई थी। इधर, सेंट्रल इमरजेंसी में आज भी बंद पड़े हैं अधिकतर मॉनिटर: सेंट्रल इमरजेंसी में मरीजों का इलाज तो हो रहा है, लेकिन अधिकतर बेड पर लगे मॉनिटर बंद हैं। ऐसे में डॉक्टर महत्वपूर्ण पैरामीटर की निगरानी नहीं कर पा रहे हैं।वेंटिलेटर के लिए अब भी इंतजार: गंभीर मरीजों को आज भी वेंटिलेटर के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। शनिवार को दो मरीज दो घंटे से अधिक समय तक एंबुलेंस में इंतजार करते रहे। हालांकि एक मरीज को बाद में वेंटिलेटर मिला।इमरजेंसी से भी मरीजों को मेडिकल स्टोर भेजा जा रहा:सेंट्रल इमरजेंसी में जरूरी दवाओं और सामग्री का पर्याप्त स्टॉक नहीं है। शनिवार को भी कई मरीजों के परिजनों को स्लाइन, सिरिंज और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदने बाहर भेजा गया।
रिम्स में न संसाधन बढ़े, न नियुक्ति हुई, सिर्फ जमीन कब्जा मुक्त हो सकी
वर्तमान स्थिति: फैैकल्टी की कमी से जूझ रहा संस्थान, वेंटिलेटर नहीं, दवा का पूरा स्टॉक भी नहीं झारखंड हाईकोर्ट ने रिम्स को देश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों की श्रेणी में लाने के लिए भर्ती, आधारभूत संरचना, चिकित्सा उपकरणों की खरीद और भवनों के जीर्णोद्धार समेत आठ महत्वपूर्ण कार्य 30 मई 2026 तक हर हाल में पूरे करने का निर्देश दिया था। तत्कालीन निदेशक डॉ. राजकुमार ने स्वयं कोर्ट से अतिरिक्त समय मांगा था, जिसके बाद अदालत ने इसे “अंतिम अवसर’ बताते हुए स्पष्ट कर दिया था कि अब किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या प्रक्रियागत बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी। लेकिन तय समय सीमा बीतने के एक माह बाद भी रिम्स में आठ में से केवल एक निर्देश ‘परिसर को अतिक्रमण मुक्त कराने’ का ही पालन हो सका है। बाकी अधिकतर कार्य या तो अधूरे हैं या उनकी प्रक्रिया अब भी लंबित है। इसका सीधा असर मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था पर पड़ रहा है। संस्थान आज भी फैकल्टी की कमी, जरूरी मशीनों के अभाव, वेंटिलेटर संकट और दवाओं की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। 1. मेडिकल कैडर के रिक्त पदों पर नियुक्ति कोर्ट का निर्देश : असिस्टेंट प्रोफेसर से प्रोफेसर तक 150 से अधिक पदों पर नियुक्ति 30 मई तक पूरी हो। वर्तमान स्थिति : फरवरी से अप्रैल तक केवल असिस्टेंट प्रोफेसर के इंटरव्यू हुए। दो माह बाद भी अंतिम चयन सूची जारी नहीं हुई। 2. सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर की भर्ती कोर्ट का निर्देश : रिक्त पदों पर शीघ्र की जाए नियुक्ति। वर्तमान स्थिति : कई विभागों में नियुक्तियां हुई हैं, लेकिन अब भी अनेक पद खाली हैं। 3. चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की नियुक्ति कोर्ट का निर्देश : रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी हो। वर्तमान स्थिति : 596 स्वीकृत पद, 94 कर्मचारी कार्यरत हैं। वार्ड बॉय, ट्रॉलीमैन, ड्रेसर और सफाईकर्मियों की भारी कमी है। व्यवस्था अब भी आउटसोर्स कर्मियों के भरोसे है। 4. तृतीय एवं नर्सिंग संवर्ग की नियुक्ति कोर्ट का निर्देश : नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाए। वर्तमान स्थिति : थर्ड ग्रेड की नियुक्ति लंबित है। नर्सिंग के 144 पदों का विज्ञापन भी अब तक जारी नहीं हुआ। 5. नए भवन निर्माण की स्वीकृति नहीं मिली कोर्ट का निर्देश: नए निर्माण और पुराने भवनों की मरम्मत। वर्तमान स्थिति : नए भवनों को अब तक प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिली। पुराने भवनों के किसी वार्ड का जीर्णोद्धार पूरा नहीं हुआ। केवल नेत्र एवं ईएनटी वार्ड को तोड़कर न्यूरोसर्जरी वार्ड के एक्सटेंशन का कार्य चल रहा है। 6. जर्जर भवनों की मरम्मत भी नहीं हो सकी कोर्ट का निर्देश : जरूरी मरम्मत कार्य जल्द पूरे हों। वर्तमान स्थिति : चार माह पहले 50 करोड़ रुपए आवंटित होने के बावजूद किसी भी वार्ड की मरम्मत पूरी नहीं हो सकी। 7. मशीन-चिकित्सा उपकरण नहीं खरीदे कोर्ट का निर्देश : जरूरी मशीनों की खरीद पूरी की जाए। वर्तमान स्थिति : कैंसर विभाग की मशीनें, लीनियर एक्सीलरेटर, एडवांस सीटी स्कैन समेत करीब 40 करोड़ रुपए के उपकरणों की खरीद प्रक्रिया अब भी अटकी हुई है। 8. अतिक्रमण हटाने में सफलता मिली कोर्ट का निर्देश : पूरे परिसर को अतिक्रमण मुक्त करें। वर्तमान स्थिति : प्रशासन के सहयोग से रिम्स परिसर की 7 एकड़ जमीन अतिक्रमण मुक्त कर बाउंड्री करा दी गई है। कोर्ट जता चुका है नाराजगी पिछली सुनवाई में भी झारखंड हाईकोर्ट ने लंबित नियुक्तियों और सुधार कार्यों में देरी पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि अब ‘प्रशासनिक जटिलता’ जैसे बहाने स्वीकार नहीं किए जाएंगे। 30 मई 2026 तक सभी कार्य पूरे करने की जिम्मेदारी तत्कालीन निदेशक डॉ. राजकुमार की तय हुई थी। इधर, सेंट्रल इमरजेंसी में आज भी बंद पड़े हैं अधिकतर मॉनिटर: सेंट्रल इमरजेंसी में मरीजों का इलाज तो हो रहा है, लेकिन अधिकतर बेड पर लगे मॉनिटर बंद हैं। ऐसे में डॉक्टर महत्वपूर्ण पैरामीटर की निगरानी नहीं कर पा रहे हैं।वेंटिलेटर के लिए अब भी इंतजार: गंभीर मरीजों को आज भी वेंटिलेटर के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। शनिवार को दो मरीज दो घंटे से अधिक समय तक एंबुलेंस में इंतजार करते रहे। हालांकि एक मरीज को बाद में वेंटिलेटर मिला।इमरजेंसी से भी मरीजों को मेडिकल स्टोर भेजा जा रहा:सेंट्रल इमरजेंसी में जरूरी दवाओं और सामग्री का पर्याप्त स्टॉक नहीं है। शनिवार को भी कई मरीजों के परिजनों को स्लाइन, सिरिंज और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदने बाहर भेजा गया।

