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री-नीट परीक्षा:रांची में रहकर पढ़ी जैक बोर्ड 12वीं की स्टेट टॉपर पूनम व पलामू की चंचल भी सॉल्वर


बायोमेट्रिक कंपनी की सेटिंग से बैठे फर्जी परीक्षार्थी, कंपनी के तीन सुपरवाइजर और 14 स्टाफ भी गिरफ्तार
बिहार के लखीसराय में री-नीट परीक्षा के दौरान पकड़े गए सॉल्वर गैंग की जांच में झारखंड कनेक्शन सामने आया है। गिरिडीह की पूनम कुमारी और पलामू की चंचल कुमारी का नाम इस नेटवर्क से जुड़ा मिला है। खास बात यह है कि पूनम कुमारी वर्ष 2021 में जैक इंटर साइंस परीक्षा की झारखंड टॉपर रह चुकी हैं। उन्होंने रांची के एक इंटर कॉलेज से 12वीं की पढ़ाई की थी। वहीं, चंचल कुमारी ने इंटर साइंस परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की थी। पूनम और चंचल के परिवार तक जब भास्कर टीम पहुंची तो दोनों के परिवारों ने उनकी गिरफ्तारी को लेकर हैरानी जताई। कहा-घटना के संबंध में हमें कोई जानकारी नहीं थी, आज पुलिस से सूचना मिली है। मुख्य किरदार पीएमसीएच का छात्र निकला है। पकड़े जाने पर उसने पुलिस को अपना नाम मयंक कश्यप बताया था। हालांकि जांच में उसकी असली पहचान हाजीपुर निवासी अश्विनी कुमार के रूप में हुई। अश्विनी पीएमसीएच के 2022 बैच का तृतीय वर्ष का एमबीबीएस छात्र है। अश्विनी ने मयंक कश्यप के नाम से सिम कार्ड ले रखा था। कॉलेज के छात्र भी उसे इसी निक नेम से जानते थे। मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू अश्विनी की उपस्थिति को लेकर सामने आया है। जिस दिन वह लखीसराय के परीक्षा केंद्र में मौजूद था, उसी दिन पीएमसीएच के सर्जरी विभाग की विशेष कक्षा में उसकी उपस्थिति भी दर्ज पाई गई। उसने एक अभ्यर्थी को मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने के लिए 60 लाख में सौदा किया था। बायोमेट्रिक एजेंसी के कर्मचारियों ने भी निभाई भूमिका: री-नीट परीक्षा में बायोमेट्रिक सत्यापन का जिम्मा ‘इनोवेटिव व्यू’ कंपनी को दिया गया था। जांच में सामने आया है कि कंपनी के कुछ सुपरवाइजर और कर्मचारियों ने करीब दो लाख रुपए के लालच में सॉल्वर गैंग से हाथ मिला लिया था। इसी सांठगांठ के तहत अश्विनी को बायोमेट्रिक स्टाफ के रूप में परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिलाया गया। गिरिडीह की रहनेवाली है पूनम, साल 2021 में बनी थी साइंस स्ट्रीम में स्टेट टॉपर जानिए… कौन किसके बदले दे रहा था परीक्षा
1. मूल परीक्षार्थी : मधुप्रिया
फर्जी परीक्षार्थी : पूनम कुमारी, पिता : बालेश्वर प्रसाद, बरमसिया, थाना : बिरनी, गिरिडीह, (बीएससी नर्सिंग बीएचयू की छात्रा)
2. मूल परीक्षार्थी : नंदनी राज
फर्जी परीक्षार्थी : चंचल कुमारी, पिता : सत्येंद्र प्रसाद, शेरभुका, थाना : हरिहरगंज, पलामू, (गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज, उड़ीसा में बीएएमएस की छात्रा)।
3. मूल परीक्षार्थी : संजीत कुमार
फर्जी परीक्षार्थी : मंतोष कुमार, पिता : शम्भू यादव, शंकरपुर, थाना : शंकरपुर, मधेपुरा- (न्यू जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष का छात्र)।
4. मूल परीक्षार्थी : प्रभात अमन
फर्जी परीक्षार्थी : विवेक कुमार, पिता : योगेंद्र चौधरी, हरचंदा, थाना : कांटी, मुजफ्फरपुर, (एएनएममसीएच, गयाजी चतुर्थ वर्ष का छात्र)।
5. मूल परीक्षार्थी : शुभम कुमार वर्मा
फर्जी परीक्षार्थी : हिमांशु कुमार पिता : शिव नारायण साह, पथरा, थाना : पथरा, जिला सुपौल, (गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, सतना, एमपी में प्रथम वर्ष का छात्र।
6. मूल परीक्षार्थी : ईशान सिंह
फर्जी परीक्षार्थी : सौरभ जीझा, पिता : ललन जीझा, थाना : राजनगर, मधुबनी, (एम्स रायबरेली में एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष का छात्र)।
7. मूल परीक्षार्थी : अक्षत दुबे
फर्जी परीक्षार्थी : अमन अग्रवाल, पिता : राजीव अग्रवाल, हौजखास, नई दिल्ली, (यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस दिल्ली, शहादरा में एमबीबीएस इंटर्न)।
8. मूल परीक्षार्थी : निरंजन
फर्जी परीक्षार्थी : रौशन कुमार, पिता : जीवछ साह, विशनपुर, थाना : लौकहा, मधुबनी, (एनएमसीएच पटना में बी.फार्मा चतुर्थ वर्ष का छात्र)।
9. मूल परीक्षार्थी : राहुल कुमार प्रिंस
फर्जी परीक्षार्थी : जितेंद्र कुमार, पिता : कारू राम, सेमरदा, गेरई, सवाई माधोपुर, राजस्थान, (एनएमसीएच, पटना का छात्र)। टॉप कॉलेजों के 9 छात्रों सहित 30 गिरफ्तार
लखीसराय पुलिस ने केंद्रीय विद्यालय, हसनपुर और केआरके स्कूल से कुल 30 लोगों को पकड़ा है। इनमें टॉप मेडिकल कॉलेजों के 9 एमबीबीएस छात्र शामिल हैं। छह छात्र दूसरों की जगह परीक्षा दे रहे थे, जबकि तीन मदद कर रहे थे। गैंग का सरगना अर्पित राज सिंह और नालंदा के दो भाई संजीत-रंजीत गिरफ्तार हुए हैं। इसके अलावा बायोमेट्रिक कंपनी के 3 सुपरवाइजर और 14 स्टाफ भी पकड़े गए हैं। कवैया व किऊल थाने में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। री-नीट की बायोमेट्रिक जांच, झारखंड में ब्लैकलिस्टेड कंपनी को ठेका
री-नीट परीक्षा में बायोमेट्रिक सत्यापन का जिम्मा ईडीसीआईएल को दिया गया था। कंपनी को अभ्यर्थियों के थंब इम्प्रेशन और बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने की जिम्मेदारी मिली थी। हालांकि ईडीसीआईएल ने यह काम आगे इनाेवेटिव व्यू कंपनी को सौंप दिया। अब सॉल्वर गैंग के खुलासे के बाद इनाेवेटिव व्यू की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार झारखंड, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों ने परीक्षा संबंधी कार्यों में अनियमितताओं के आरोपों के बाद इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर रखा है। झारखंड सरकार ने वर्ष 2025 में, तमिलनाडु सरकार ने 2025 में और उत्तर प्रदेश सरकार ने 2022 में कंपनी को काली सूची में डाला था। इसके बावजूद री-नीट जैसी संवेदनशील परीक्षा में बायोमेट्रिक सत्यापन का काम इस कंपनी को दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। जानिए… कौन हैं सॉल्वर
चंचल के पिता किसान, 2 भाई आयुर्वेद चिकित्सक
सॉल्वर गैंग की चंचल कुमारी पलामू में हरिहरगंज के सियरभूका गांव की रहने वाली है। उसके पिता सत्येंद्र प्रसाद खेती करते हैं। भाई शंभू कुशवाहा और सतीश कुमार आयुर्वेद के चिकित्सक हैं। चंचल को 2018 में नीट में सफलता मिली थी। पर देरी होने के कारण उसका एडमिश मेडिकल कॉलेज में नहीं हो पाया था। इसके बाद उसने गर्वमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज, उड़ीसा में एडमिशन लिया।
विवेक के पिता सीआरपीएफ में हेड कांस्टेबल
लखीसराय में पकड़े गए सॉल्वर अर्पित सिंह और विवेक कुमार मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं। विवेक कांटी के हरचंदा और अर्पित भगवानपुर का निवासी है। सोमवार को पुलिस ने इनके घर छानबीन की। विवेक के पिता योगेंद्र चौधरी सीआरपीएफ में हेड कांस्टेबल हैं और अमेठी में तैनात हैं। मेडिकल में दाखिले के बाद विवेक ने नंबर बदल लिया था।
सुपौल का हिमांशु : जमीन बेचकर की पढ़ाई
लखीसराय में पकड़ा गया सॉल्वर हिमांशु सुपौल के जोल्हनिया का रहने वाला है। वह सतना मेडिकल कॉलेज का छात्र है। उसके पिता शिवनारायण साह एक किसान हैं। उन्होंने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए अपनी जमीन तक बेच दी थी। रविवार को लखीसराय से अचानक फोन आया कि हिमांशु बीमार है। परिवार को अब भी विश्वास नहीं हो रहा कि उनका बेटा ऐसा काम कर सकता है। ऐसे रची बायोमेट्रिक हैक की साजिश
एनटीए ने बायोमेट्रिक हाजिरी का ठेका ईडीसीआईएल को दिया था, जिसने आगे यह काम ‘इनोवेटिव व्यू’ कंपनी को सौंपा। 14 जून को री-नीट का एडमिट कार्ड आते ही माफियाओं ने कंपनी के सुपरवाइजरों को सेट कर लिया। एक असली परीक्षार्थी को पास कराने के लिए 1.50 से 2 लाख रुपये में डील हुई। असली परीक्षार्थी का बायोमेट्रिक सेंटर से 100-150 मीटर दूर गाड़ी में ही ले लिया जाता था। उसकी जगह जो ‘स्काॅलर’ परीक्षा देने अंदर गया। एक ई-मेल ने खोल दी पूरे सिंडिकेट की पोल: पुलिस मुख्यालय को री-नीट परीक्षा पर नजर रखने की जिम्मेदारी मिली हुई थी। रविवार दिन में करीब 12 बजे किसी ने पुलिस मुख्यालय और एनटीए को एक अहम मेल किया। इसमें सटीक सूचना दी गई कि केंद्रीय विद्यालय सेंटर में मधु प्रिया की जगह बीएचयू की बीएससी नर्सिंग छात्रा पूनम कुमारी सॉल्वर बनकर बैठी है। पुलिस मुख्यालय ने तुरंत लखीसराय के डीएम और एसपी को अलर्ट किया।

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