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लातेहार थाना क्षेत्र के कैमा गांव में गुरुवार रात ग्रामीणों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। इस घटना में 15 पुलिसकर्मी और लगभग आधा दर्जन ग्रामीण घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए सदर अस्पताल लातेहार में भर्ती कराया गया। झड़प में चार सब-इंस्पेक्टर (एसआई) सहित आईआरबी और जैप के कुल 11 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए। घायल पुलिसकर्मियों में एसआई धर्मवीर कुमार सिंह, मोहन रविदास, रामाकांत गुप्ता, राजेश झा, आईआरबी के शैलेंद्र कुमार सिंह, प्रेमचंद पाण्डेय, विजय कुमार सिंह, कन्हैया प्रसाद तथा जैप के जवान रामकिशोर उरांव, तिलेस्फर लकड़ा, कृष्णा मुरारी, लोबिन लकड़ा, गिरिवर प्रसाद, सत्यम कुमार और जवाहर उरांव शामिल हैं। जांच के बाद डॉक्टर ने आईआरबी के जवान शैलेंद्र कुमार सिंह, जैप के रामकिशोर उरांव और तिलेस्फर लकड़ा की गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया। ग्रामीणों की ओर से धीरेन्द्र उरांव और संदीप उरांव समेत लगभग आधा दर्जन लोग घायल बताए जा रहे हैं। पुलिस गांव के दो लोगों को पकड़कर ले जा रही थी
ग्रामीणों के अनुसार, पुलिस गांव के संदीप टाना भगत और विशेष टाना भगत को पकड़कर ले जा रही थी। इसकी जानकारी मिलने पर ग्रामीण घोड़गढ़वा पुल के पास पहुंचे और थाना प्रभारी प्रमोद सिन्हा से इसका कारण पूछा। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच झड़प शुरू हो गई। घटना के बाद पूरे कैमा गांव में भय और दहशत का माहौल है। गांव के लोग किसी भी अनजान व्यक्ति से बात करने से कतरा रहे थे। पत्रकारों द्वारा अपनी पहचान बताने के बाद करीब आधे घंटे बाद कुछ ग्रामीण आगे आए और घटना की जानकारी दी। गांव के सहाबीर टाना भगत, दिनेश टाना भगत, रामेश्वर सिंह खरवार, अनीता देवी और सोमानी देवी ने घटना के बारे में बताया।
ग्रामीणों ने कहा कि यह इलाका पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था से संचालित होता है, जहां किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी से पहले गांव को जानकारी देना जरूरी होता है। इसी बात को लेकर ग्रामीणों और थाना प्रभारी के बीच बातचीत हुई। वार्ता के दौरान यह तय हुआ कि गांव के अखाड़ा में बैठकर सामूहिक निर्णय लिया जाएगा। अखाड़ा में बैठक हुई। ग्रामीणों के अनुसार, लिखित आवेदन में यह भी कहा गया था कि हरेंद्र उरांव पर लगाए गए आरोपों पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। यदि कोई कार्रवाई होती है तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन और डीवीसी कंपनी के कर्मचारियों की होगी। इस बीच प्रशासन संदीप टाना भगत और विशेष टाना भगत को पुलिस ग्रामीणों के बीच सौंप दी। दोनों ओर से धक्का-मुक्की और हाथापाई हुई
ग्रामीणों का आरोप है कि इस दौरान एसआई रामाकांत गुप्ता द्वारा धक्का-मुक्की और मारपीट भी की गई, जिसकी जानकारी वरीय अधिकारियों को देते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इसके बाद मामला शांत हो गया था और सभी पुलिस वाले चले गए थे। लेकिन करीब आधे घंटे बाद पुलिस फिर से गांव के उखड़ा के पास पहुंची और एक जवान का गुम होने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों के साथ मारपीट करने लगी। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच झड़प हो गई। ग्रामीणों ने भी माना कि दोनों ओर से धक्का-मुक्की और हाथापाई हुई। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने कई राउंड फायरिंग की। उनका कहना है कि जब मामला पूरी तरह शांत हो चुका था, तब एक जवान, जो कथित रूप से शराब के नशे में था, उसने किसी के गुम होने का आरोप लगाकर ग्रामीणों के साथ मारपीट शुरू कर दी, जो कहीं से भी जायज नहीं है। घटना के बाद पूरे गांव में डर का माहौल है और लोग अब भी सहमे हुए हैं। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की अपील की है। झड़प के बाद गांव के बाहर तैनात किए गए पुलिसकर्मी कैमा गांव में बीती रात्रि पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प के बाद पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। पुलिस कर्मियों में एसएसबी 32 बटालियन,जिला पुलिस और आईआरबी के जवान शामिल हैं। हालांकि पुलिस का दावा है कि मामला पूरी तरह से शांत कर दिया गया है और माहौल शांतिपूर्ण है। परंतु ग्रामीण के अंदर पुलिस के रवैया का प्रति अभी भी आक्रोश है। गांव के कुछ युवक अभी भी लाठी, डंडा लेकर गांव के विभिन्न क्षेत्रों में बाइक से गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। वरीय पदाधिकारी के संज्ञान में पूरा मामला है। उनके निर्देशन पर कार्रवाई की जाएगी। अभी प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है। जिस तरह का मार्गदर्शन होगा, उस पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। -प्रमोद कुमार सिन्हा, थाना प्रभारी, लातेहार
लातेहार में पुलिस-ग्रामीणों में झड़प मामला:15 पुलिसकर्मी और आधा दर्जन ग्रामीण घायल, गांव में दहशत का माहौल
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