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लातेहार पुलिस ने प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीएलएफआई की लेवी वसूली और ठेकेदारों में दहशत फैलाने की साजिश को विफल कर दिया है। पुलिस ने दो संदिग्ध अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से एक लोडेड देशी पिस्तौल, तीन जिंदा कारतूस, एक मैगजीन, दो मोबाइल फोन और बिना नंबर की चोरी की अपाची मोटरसाइकिल बरामद की गई है। बालूमाथ एसडीपीओ उमेश प्रसाद सिंह ने बताया कि 22 जुलाई की शाम पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव को गुप्त सूचना मिली थी। सूचना के अनुसार, चंदवा की ओर से लाल रंग की बिना नंबर की अपाची मोटरसाइकिल पर सवार दो संदिग्ध व्यक्ति बालूमाथ-बारियातू की ओर जा रहे थे और किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने की फिराक में थे। इस सूचना के बाद, एसपी के निर्देश पर एसडीपीओ बालूमाथ उमेश कुमार सिंह के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया। दल ने मकईयाटांड़ पिकेट के सामने वाहन जांच अभियान चलाया। इसी दौरान, चंदवा की ओर से आ रही लाल रंग की अपाची मोटरसाइकिल को रोकने का इशारा किया गया, लेकिन बाइक सवारों ने भागने का प्रयास किया। जवानों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों को दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लोहरदगा जिले के पेशरार थाना अंतर्गत मदनपुर गांव निवासी संजय सिंह उर्फ डिम्पू उर्फ भीम सिंह और कुडू थाना अंतर्गत सिंजो गांव निवासी शहजाद अंसारी के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान, शहजाद अंसारी के पास से एक लोडेड देशी पिस्तौल और एक मोबाइल फोन मिला, जबकि संजय सिंह के पास से एक मोबाइल फोन और जिंदा कारतूस बरामद किए गए। जब्त की गई लाल अपाची मोटरसाइकिल के इंजन और चेसिस नंबर घिसे हुए थे। पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे पीएलएफआई कमांडर बादल जी उर्फ पवन जी के निर्देश पर बालूमाथ और बारियातू क्षेत्र में विकास कार्य करा रहे ठेकेदारों से लेवी वसूलने और क्षेत्र में भय का माहौल बनाने के उद्देश्य से पहुंचे थे।इस मामले में बालूमाथ थाना में कांड संख्या 89/2026 दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। दोनों का रहा है अपराधिक इतिहास
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार शहजाद अंसारी के खिलाफ हत्या, डकैती, आर्म्स एक्ट सहित कई संगीन मामलों में विभिन्न थानों में आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। वहीं संजय सिंह के खिलाफ भी लोहरदगा थाना में आर्म्स एक्ट का मामला दर्ज है। छापेमारी अभियान में बालूमाथ थाना प्रभारी अमरेंद्र कुमार, बारियातू थाना प्रभारी रंजन कुमार पासवान, दोनों थानों के पुलिस पदाधिकारी, मकईयाटांड़ पिकेट, आईआरबी-4 तथा सैट-6 के सशस्त्र बल शामिल थे।
