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"लोकगीत शब्दों से नहीं, संस्कृति की आत्मा से लेता है जन्म": पद्मश्री मालिनी अवस्थी

Malini Awasthi Sultanganj Shravani Mela: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले के अवसर पर सोमवार की रात सुलतानगंज स्थित नमामि गंगे घाट पर शिवभक्ति और लोकसंगीत का अलौकिक संगम देखने को मिला. सुप्रसिद्ध पद्मश्री लोक गायिका मालिनी अवस्थी की प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं और शिवभक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया. “भोला भंडारी…” और “डम-डम डमरू बजावे ला…” जैसे भजनों और लोकगीतों पर पूरा घाट तालियों और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा. शानदार प्रस्तुति के बाद उन्होंने ‘प्रभात खबर’ से विशेष बातचीत में लोकसंगीत और संस्कृति के संरक्षण पर अपने बेबाक विचार साझा किए.

लोकगीत किसी कलाकार की रचना नहीं, समाज की धरोहर

मालिनी अवस्थी ने लोकसंगीत की बदलती तस्वीर और उसमें आ रही गिरावट पर चिंता जताते हुए कहा:

“आजकल कोई भी कुछ शब्द जोड़कर उसे लोकगीत का नाम दे देता है, जबकि लोकगीत केवल शब्दों से नहीं बनते; वे संस्कृति की आत्मा से जन्म लेते हैं. लोकगीत किसी एक कलाकार की रचना मात्र नहीं हैं, बल्कि ये समाज की स्मृतियों, लोकजीवन, परंपराओं और पीढ़ियों के संचित अनुभवों की अनमोल धरोहर हैं.”

“बच्चों को सिर्फ पढ़ाएं नहीं, अपनी मिट्टी और भाषा से भी जोड़ें”

अभिभावकों और युवाओं को संदेश देते हुए मालिनी अवस्थी ने कहा कि लोकगीत हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं. इनमें गांव की खुशबू, खेत-खलिहानों की मिट्टी और पारिवारिक संस्कार बसते हैं:

  • सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण: यदि नई पीढ़ी अपनी भाषा और लोकधुनों से कट जाएगी, तो धीरे-धीरे हमारी सांस्कृतिक जड़ें कमजोर हो जाएंगी.
  • संस्कार और आधुनिकता: उन्होंने माता-पिता से अपील की कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा जरूर दें, लेकिन उन्हें अपनी मातृभाषा, लोकगीत और परंपराओं से भी जोड़े रखें. अपनी संस्कृति से जुड़ा बच्चा ही एक संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनता है.

फुहड़पन नहीं, आत्मिक आनंद देता है लोकसंगीत

बॉलीवुड में “होली खेले मसाने में” और “सइया मिले लड़कइया” जैसे लोकप्रिय गीत गा चुकीं मालिनी अवस्थी ने स्पष्ट किया कि फुहड़पन कभी भी हमारी समृद्ध संस्कृति का विकल्प नहीं हो सकता. संगीत का मुख्य उद्देश्य समाज को जोड़ना और मन को आत्मिक आनंद व शांति देना है.

  • मंच पर संगत कलाकार: प्रस्तुति के दौरान कीबोर्ड पर सचिन कुमार गुप्ता, बैंजो पर सनी, गिटार पर ध्रुव चौहान, ढोलक पर अमित कुमार, पैड पर धर्मेंद्र कुमार और तबले पर राजेश मिश्रा ने सुरीली संगत की. कार्यक्रम का कुशल संचालन अंकित पल्लव ने किया.

Malini Awasthi Sultanganj Shravani Mela: डीएम और एसएसपी ने किया सम्मानित

"लोकगीत शब्दों से नहीं, संस्कृति की आत्मा से लेता है जन्म": पद्मश्री मालिनी अवस्थी
पद्मश्री मालिनी अवस्थी को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित करते डीएम और एसएसपी

कार्यक्रम के समापन पर भागलपुर की जिलाधिकारी (DM) अलंकृता पांडेय और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमोद कुमार यादव ने पद्मश्री मालिनी अवस्थी को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया.

जाते-जाते मालिनी अवस्थी ने पाठकों को संदेश दिया— “अपनी भाषा बोलिए, अपने लोकगीत गाइए और आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़कर रखिए. यही हमारी असली पहचान है.”

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