Wednesday, July 8, 2026

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लोहरदगा का ललित नारायण मिश्र स्टेडियम गुमनाम होने का कगार पर, डीसी के मैदान दुरुस्त के िनर्देश की भी नहीं हुई सुनवाई


भास्कर न्यूज|लोहरदगा लोहरदगा जैसे छोटे से जिले से स्पोर्ट्स के क्षेत्र में कई खिलाड़ियों को नाम देने वाला ललित नारायण मिश्र स्टेडियम आज गुमनाम होने का कगार पर है। इस जर्जर स्टेडियम की सुध लेने वाला कोई नहीं है। लगभग छह माह पूर्व दैनिक भास्कर द्वारा स्टेडियम की जर्जरता को प्रमुखता के साथ सामने लाने के बाद तत्कालीन डीडीसी दिलीप सिंह शेखावत ने संज्ञान लिया था। जिसपर नगर परिषद को मैदान दुरुस्त करने का निर्देश भी दिया गया था। इसके बावजूद स्थिति फिर जस की तस बनी है। स्थिति अब यहां आ पहुंची है कि कब स्टेडियम का जर्जर पवेलियन धराशायी हो जाए कोई नहीं जानता। 1982 में इस स्टेडियम का निर्माण तत्कालीन रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा के नाम पर किया गया था। यह स्टेडियम लोहरदगा शहर के बीचो बीच बरवा टोली चौक से कुछ दूरी पर स्थित हैं। यहां प्रति वर्ष जिला और राज्य स्तरीय कई प्रतियोगिताएं आयोजित किए जाते है। परंतु स्टेडियम के बदहाली पर सिर्फ आश्वासन ही पूरा हो सका है। खिलाड़ियों की नजर से देखे तो स्टेडियम की बदहाली लोकसभा, विधानसभा चुनाव का एक बड़ा मुद्दा भी है। कभी पूरे देश से खिलाड़ी यहां अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने आते थे। यहां कैप्टन कूल के नाम से जाने जाने वाले महेंद्र सिंह धोनी जैसे खिलाड़ी भी कभी खेल चुके हैं। स्टेडियम के मुख्य द्वार में सड़कों का पानी अंदर घुसने से जर्जर हुआ मैदान का द्वार। मैदान की स्थिति जर्जर होने के कारण दिल्ली रूटिंग के तहत मॉर्निंग वॉक के लिए पहुंचने वाले बुजुर्ग और क्रीडा के लिए पहुंचने वाले युवाओं और बच्चों की संख्या भी घटती चली जा रही है। इससे असामाजिक प्रवृत्ति के लोगों का यह अड्डा भी बनने लगा है यही कारण है कि स्टेडियम के भीतर जत्र तत्र शराब की बोतले और जुआ जैसी चीज देखने को मिलती है। स्टेडियम के जीर्णोधार के लिए लगभग ढाई करोड रुपए आने की बात हुई थी। परंतु वह भी ठंडे बस्ते में चला गया है। वर्षों से लोग इसके जीर्णोद्धार की राह देख रहे है। बरसात के दिनों में शहर का गंदा पानी स्टेडियम में नालियों से होकर मैदान में भरा रहता है। लगातार सड़कों और नालियों का पानी स्टेडियम में घुसने से स्टेडियम के मुख्य द्वार पर जर्जर पथ बन गया है। स्टेडियम खेत का रूप ले लिया है। गेट, दरवाजे, खिड़की सभी टूट गये। अब लोग बस स्टेडियम के इतिहास को बचाए रखने के लिए जल्द से जल्द इसके जीर्णोधार की मांग कर रहे हैं।

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