
Bhagalpur BIADA Ghat Steamer Operation: विक्रमशिला सेतु के अस्थाई रूप से बंद होने के कारण भागलपुर और नवगछिया के बीच गंगा नदी पार करने के लिए बियाडा घाट इन दिनों आम जनता के लिए सबसे बड़ा जरिया बना हुआ है. हर रोज हजारों की संख्या में यात्री और छोटे वाहन स्टीमर तथा नावों के जरिए नदी पार कर अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं. लेकिन बुधवार को बियाडा घाट का नजारा बिल्कुल बदला हुआ नजर आया.
त्योहार के आगमन के साथ ही घाट पर रोजाना लगने वाली यात्रियों की भारी भीड़ में अचानक बड़ी कमी दर्ज की गई. हालांकि, प्रशासनिक सतर्कता और परिचालन व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए बुधवार से ही घाट पर चार-चार स्टीमर का परिचालन एक साथ शुरू कर दिया गया है. इसके साथ ही यात्रियों की आवाजाही को और अधिक सुचारू और सुरक्षित बनाने के लिए पहले से मौजूद तीन जेटी की संख्या बढ़ाकर अब चार करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है.
गंगा का घटता जलस्तर बना सबसे बड़ा सिरदर्द, स्टीमर फंसने का मंडरा रहा खतरा
एक तरफ जहां चार स्टीमर के चालू होने से यात्रियों को आवागमन में सहूलियत मिलने की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर गंगा नदी के जलस्तर में हो रही लगातार गिरावट ने स्टीमर संचालकों की चिंता काफी बढ़ा दी है. नदी में पानी का स्तर कम होने के कारण किनारे के पास गहराई काफी घट गई है, जिससे भारी-भरकम स्टीमर के बालू या गाद में फंसने का जोखिम हर समय बना रहता है.
अगर स्टीमर बीच में या किनारे के पास फंस जाता है, तो न केवल परिचालन ठप हो सकता है बल्कि यात्रियों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो सकता है. इस नई प्राकृतिक और तकनीकी चुनौती से निपटने के लिए चालकों और कर्मचारियों को हर रोज विशेष रणनीति अपनानी पड़ रही है.
रोज बढ़ानी पड़ रही रैंप की लंबाई, कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित लग रहे किनारे
गंगा के घटते जलस्तर के बीच स्टीमर को सुरक्षित तरीके से घाट तक लाने और यात्रियों को चढ़ाने-उतारने के लिए संचालकों को रोज कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है. पानी पीछे हटने की वजह से कर्मचारियों को रोजाना रैंप की लंबाई बढ़ानी पड़ रही है, ताकि यात्री बिना किसी जोखिम या मिट्टी में धंसे सीधे स्टीमर पर सवार हो सकें.
स्टीमर संचालकों का कहना है कि जब तक रैंप को पूरी तरह से मजबूत और लंबा न किया जाए, तब तक सुरक्षित लंगर डालना लगभग नामुमकिन होता है. हर सुबह कर्मचारियों की टीम पानी की गहराई का आकलन करती है और उसी हिसाब से रैंप को आगे खिसकाती है, ताकि दिनभर का परिचालन बिना किसी हादसे के जारी रहे.
त्योहारों के मौसम में बदला भीड़ का रुख, यात्रियों को मिली बड़ी राहत
सामान्य दिनों में विक्रमशिला सेतु पर आवागमन बाधित होने के बाद बियाडा घाट पर यात्रियों की भारी अफरा-तफरी देखने को मिलती थी. लोगों को स्टीमर पर सवार होने के लिए घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता था. लेकिन बुधवार को त्योहार की वजह से अधिकतर लोग अपने घरों में रहे या स्थानीय बाजारों तक ही सीमित रहे, जिससे घाट पर यात्रियों का दबाव काफी कम दर्ज हुआ.
यात्रियों की कम संख्या और चार स्टीमर का परिचालन एक साथ शुरू होने की वजह से यात्रा करने वाले लोगों को बिना किसी धक्का-मुक्की के आसानी से गंगा पार करने का मौका मिला. इसके अलावा जेटी की संख्या तीन से बढ़ाकर चार किए जाने से आने वाले दिनों में भीड़ बढ़ने पर भी स्थिति नियंत्रण में रहेगी.
Bhagalpur BIADA Ghat Steamer Operation:प्रशासनिक जवाबदेही और आगे का संभावित परिदृश्य
भागलपुर शहर और उत्तर बिहार को जोड़ने वाले इस वैकल्पिक जलमार्ग पर फिलहाल रोजाना हजारों लोगों की जिंदगी टिकी हुई है. विक्रमशिला सेतु की मरम्मत या बंदी के दौरान बियाडा घाट ही स्वास्थ्य आपातकाल, व्यापारिक माल ढुलाई और दैनिक यात्रियों की एकमात्र उम्मीद है. ऐसे में अगर गंगा के जलस्तर में गिरावट इसी तरह जारी रही, तो आने वाले दिनों में प्रशासन को ड्रेजिंग यानी नदी के तल से गाद हटाने की दिशा में ठोस कदम उठाने पड़ सकते हैं. फिलहाल चार स्टीमर और चार जेटी के नए इंतजाम ने स्थिति को संभाल रखा है. आने वाले दिनों में त्योहारों के समाप्त होते ही जब घाट पर यात्रियों का दबाव दोबारा बढ़ेगा, तब यह सुदृढ़ रैंप और अतिरिक्त जेटी व्यवस्था ही लोगों के लिए जीवनदायिनी साबित होगी.
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