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जहानाबाद में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर लोहार आदिवासी संघ द्वारा एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। रविवार, 9 अगस्त को शहर के एक निजी रेस्ट हाउस में हुए इस आयोजन में लोहार समाज के बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान समाज के लोगों ने पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में शामिल होकर अपनी संस्कृति और परंपरा की झलक प्रस्तुत की। इस अवसर पर भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। लोगों ने उनके सम्मान में नारे लगाए और उनके संघर्ष एवं बलिदान को स्मरण किया। वक्ताओं ने बिरसा मुंडा को आदिवासी समाज के लिए भगवान के समान बताया। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज को संगठित करने और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लोहार आदिवासी संघ के जिला अध्यक्ष धनंजय कुमार ने बताया कि उनका संगठन वर्ष 2016 से लगातार विश्व आदिवासी दिवस मना रहा है। उन्होंने कहा कि इस दिन समाज के लोग एकजुट होकर अपनी संस्कृति, परंपरा और पूर्वजों के संघर्ष एवं बलिदान को याद करते हैं। उन्होंने सरकार से लोहार समाज के विकास और अधिकारों पर विशेष ध्यान देने की मांग की, क्योंकि समाज अभी भी कई क्षेत्रों में पिछड़ा हुआ है। वहीं, लोहार आदिवासी संघ के जिला सचिव महेश विश्वकर्मा ने इस दिवस को समाज के लिए गौरव और खुशी का दिन बताया। उन्होंने लोहार समाज की पहचान और वर्गीकरण का मुद्दा उठाते हुए सरकार से मांग की कि समाज को उसके मूल अधिकारों के अनुरूप उचित वर्गीय पहचान और अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिया जाए। कार्यक्रम स्थल “जय जोहार, जय लोहाट, जय आदिवासी” जैसे नारों से गूंज उठा। पारंपरिक वेशभूषा में सजे लोगों ने अपनी संस्कृति को जीवंत करते हुए समाज की एकजुटता और अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।

