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बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में नामांकन रद्द होने के बाद उम्मीदवार वीणा मानवी ने पटना में पीसी कर प्रशासन और बीजेपी पर कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उन्हें सुनियोजित राजनीतिक साजिश के तहत चुनाव लड़ने से रोका गया। नामांकन प्रक्रिया के दिन की गई प्रशासनिक कार्रवाई पहले से नियोजित थी। वीणा मानवी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया है। वीणा मानवी ने कहा, जिस दिन नामांकन दाखिल करना था, उसी दिन उन्हें गिरफ्तार किया गया। उनके अनुसार यह कार्रवाई अचानक नहीं, बल्कि पहले से तय योजना का हिस्सा थी। ताकि वे चुनावी मैदान में नहीं उतर सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ जिस गिरफ्तारी वारंट का हवाला दिया गया, वह लगभग पांच महीने पुराना था। वारंट अगर प्रभावी था तो पहले क्यों नहीं की कार्रवाई आगे उन्होंने कहा कि अगर वारंट वास्तव में प्रभावी था, तो पिछले कई महीनों के दौरान कार्रवाई क्यों नहीं की गई, जबकि वह लगातार चुनाव प्रचार, सामाजिक कार्यक्रमों और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय थीं। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान वह कई बार गांधी मैदान थाना भी गईं, लेकिन तब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया। मेरे चुनाव लड़ने से घबरा गए थे कुछ दल उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव लड़ने के उनके निर्णय से कुछ राजनीतिक दल घबरा गए थे और इसी कारण उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। वीणा मानवी ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी उम्मीदवारी से राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो रहे थे, इसलिए उन्हें चुनाव से बाहर करने की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया कि उनकी मौजूदगी से भाजपा को चुनाव में नुकसान होने की आशंका थी। मेरे चुनाव लड़ने के फैसले से भाजपा परेशान थी और इसी वजह से मेरे खिलाफ षड्यंत्र रचा गया। बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को घेरा वीणा मानवी ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का नाम लेते हुए भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, यह सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का विषय है और उनकी उम्मीदवारी से पार्टी दबाव में थी। वीणा मानवी ने आरोप लगाया कि उन्हें चुनाव से बाहर करने के लिए राजनीतिक स्तर पर साजिश रची गई। उन्होंने कहा कि एक महिला प्रत्याशी को रोकने के लिए जिस तरह की कार्रवाई की गई, उससे उन्हें शर्म महसूस होती है। वीणा मानवी ने कहा कि अगर पूर्व की तरह शासन में संवेदनशीलता और निष्पक्षता होती तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने दावा किया कि यदि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले की तरह सक्रिय भूमिका में होते तो उनके साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाता। उन्होंने जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी अधिकारी ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
