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रांची यूनिवर्सिटी (आरयू) की पीएचडी एंट्रेंस परीक्षा-2024 का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब ढाई साल पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने पीएचडी कोर्स में एडमिशन के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे, लेकिन प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं करा सका। इस बीच वर्ष 2025 में राज्यपाल सह कुलाधिपति द्वारा राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में पीएचडी प्रवेश परीक्षा आयोजित करने पर रोक लगा दी गई। अब विश्वविद्यालय प्रशासन आवेदन करने वाले सभी अभ्यर्थियों को शुल्क मद में जमा राशि वापस करेगा। सोमवार को कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने प्रवेश परीक्षा से संबंधित अधिकारियों को शुल्क वापसी की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया। राशि किस प्रक्रिया से लौटाई जाएगी, इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन मंथन कर रहा है। रांची यूनिवर्सिटी ने पीएचडी प्रवेश परीक्षा-2024 के लिए नोटिफिकेशन जारी कर आवेदन आमंत्रित किए थे। इसके तहत विभिन्न विषयों की 463 सीटों पर एडमिशन होना था। इन सीटों के लिए 2374 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।प्रत्येक अभ्यर्थी से 2000 रुपए आवेदन शुल्क लिया गया था। इस तरह विश्वविद्यालय ने कुल 47.48 लाख रुपए शुल्क के रूप में जमा किए थे, जिसे अब लौटाया जाएगा। प्रक्रिया बदली… अब ऐसे होगा पीएचडी में एडमिशन
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, अब यूजीसी नेट, जेआरएफ और पीएचडी एंट्रेंस क्वालिफाई अभ्यर्थियों को पीएचडी की रिक्त सीटों पर एडमिशन दिया जाएगा।इसके अलावा जेपीएससी द्वारा आयोजित झारखंड पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को भी पीएचडी कोर्स में प्रवेश मिलेगा। भविष्य में विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा झारखंड पात्रता परीक्षा आयोजित की जाएगी। फैसले से अभ्यर्थियों में नाराजगी… शुल्क वापसी के निर्णय से आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि वर्ष 2024 में जब आवेदन मंगाए गए थे, तब लोकभवन द्वारा पीएचडी प्रवेश परीक्षा पर कोई रोक नहीं थी। अभ्यर्थियों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन समय पर परीक्षा आयोजित कराने में विफल रहा। यदि समय पर परीक्षा हो जाती, तो बाद में लगी रोक का असर नहीं पड़ता। पीएचडी प्रवेश परीक्षा कराने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने विश्वविद्यालय में कई बार धरना-प्रदर्शन भी किया था।


