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राज्य सरकार शहरी निकायों (नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत) को मिलने वाले बजट के फॉर्मूले में बड़ा बदलाव करने जा रही है। नई व्यवस्था लागू होने पर स्थानीय निकायों को अब सिर्फ आबादी और क्षेत्रफल नहीं, बल्कि स्थानीय जरूरतों के आधार पर भी ज्यादा फंड मिलेगा। इससे जरूरत वाले शहरों में सड़क, सफाई, रोशनी, सार्वजनिक परिवहन और दूसरी नागरिक सुविधाओं के काम तेजी से हो सकेंगे। नगर विकास विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ‘शहरी परिवहन व्यवस्था’ और ‘नागरिक सुविधा’ मद में बजट आवंटन के नियमों में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। विभागीय मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी
अब तक राज्य योजना में आवश्यकता आधारित फंड का हिस्सा सिर्फ 10% और 20% था। इस वजह से अलग-अलग निकायों की विशेष समस्याओं के समाधान के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं हो पाती थी। सरकार का कहना है कि निकायों की आबादी, क्षेत्रफल, विकास स्तर और खुद का राजस्व जुटाने की क्षमता एक-दूसरे से काफी अलग है। इन्हीं असमानताओं को देखते हुए राज्य सरकार ने अपने विवेकाधीन फंड का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है, ताकि जरूरत पड़ने पर निकायों को अतिरिक्त आर्थिक मदद दी जा सके। किस आधार पर मिलेगा फंड

