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शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र इस वर्ष पूरे श्रद्धा भाव और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। पर्व की तिथियों, घटस्थापना और मां दुर्गा की सवारी को लेकर बिहारशरीफ के जाने-माने ज्योतिषाचार्य मोहन कुमार मिश्र ने शास्त्रीय स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष जगत जननी मां भवानी का आगमन अश्व यानी घोड़े पर हो रहा है, जबकि उनका प्रस्थान मुर्गे पर होगा। देवी भागवत और शास्त्रों में इन दोनों ही वाहनों के अलग-अलग फल और सामाजिक संकेत बताए गए हैं। सूर्योदय से संध्या तक कभी भी कर सकते हैं कलश स्थापन नवरात्र की शुरुआत को लेकर ज्योतिषाचार्य ने बताया कि 11 तारीख से कलश स्थापन का अनुष्ठान प्रारंभ होगा, जो 21 तारीख तक चलेगा। वहीं, बुराई पर अच्छाई का प्रतीक विजयादशमी का पर्व 20 तारीख को मनाया जाएगा। कलश स्थापन के समय को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें किसी भी प्रकार का संशय या विवाद नहीं होना चाहिए। श्रद्धालु सूर्योदय से लेकर संध्या काल तक अपनी सुविधानुसार किसी भी समय घट स्थापित कर सकते हैं। शुभ संकल्प और सकारात्मक सोच ही सबसे बड़ा मुहूर्त होता है, इसलिए मन में भक्ति का भाव रखकर पूरे दिन में कभी भी स्थापना की जा सकती है। प्रतिपदा नहीं, सप्तमी तिथि को ही पंडालों में मान्य है देवी का आगमन ज्योतिषाचार्य मोहन कुमार मिश्र ने बताया कि कई लोग प्रतिपदा तो कुछ स्थानों पर बंगाल मतानुसार षष्ठी को आगमन मानते हैं, परंतु शास्त्रीय और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से सप्तमी तिथि की ही प्रधानता है। जैसे कोई व्यक्ति यात्रा के दौरान बार-बार वाहन नहीं बदलता, वैसे ही देवी का वाहन आगमन पर एक ही होता है। दुर्गा भागवत और महावीर पंचांग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पूजा पंडालों में मां दुर्गा का आगमन सप्तमी तिथि को ही मान्य है। पंडालों में मुख्य रूप से तीन दिवसीय अनुष्ठान होता है। सप्तमी को महासरस्वती, अष्टमी को महालक्ष्मी और नवमी को महाकाली के स्वरूप में आदिशक्ति की विशेष आराधना की जाती है। आम जनमत भले ही प्रतिपदा की बात करता हो, परंतु अध्यात्म और शास्त्रों के अनुसार देवी का विधिवत प्रवेश सप्तमी तिथि को ही माना गया है।
शारदीय नवरात्र: घोड़े पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा:11 अक्टूबर को कलश स्थापना; ज्योतिषाचार्य बोले- शुभ संकल्प और सकारात्मक सोच ही सबसे बड़ा मुहूर्त है
