Saturday, October 10, 2026
⚡

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

श्राद्ध का मुहूर्त निकल जाए तो क्या करें? तर्पण, दान और पिंडदान के नियम समझें

[

Pitru Paksha 2026: आज 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य का विशेष महत्व है. मान्यता है कि इस दिन उन पूर्वजों का भी श्राद्ध किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु की तिथि परिवार को मालूम नहीं है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल उन लोगों के सामने है, जो नौकरी, कारोबार या दूसरी व्यस्तताओं के कारण निर्धारित समय पर श्राद्ध नहीं कर पाते. अगर दोपहर का मुहूर्त निकल जाए तो क्या श्राद्ध नहीं हो सकता? क्या शाम को तर्पण किया जा सकता है? और ऐसी स्थिति में पितरों के लिए क्या करना चाहिए?

श्राद्ध के लिए दोपहर का समय क्यों माना जाता है श्रेष्ठ?

हिंदू धर्म की परंपराओं में श्राद्ध के लिए अपराह्न काल को विशेष महत्व दिया गया है. खासकर कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल में श्राद्ध करना उत्तम माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह समय पितरों के निमित्त किए जाने वाले कर्मों के लिए अनुकूल होता है.

श्राद्ध में केवल भोजन कराना ही शामिल नहीं है. इसमें पितरों के नाम से तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और सामर्थ्य के अनुसार दान जैसे कर्म भी किए जाते हैं. हालांकि इन सभी कर्मों की विधि एक जैसी नहीं होती.

दोपहर 3:37 बजे के बाद क्या श्राद्ध कर सकते हैं?

यदि स्थानीय पंचांग के अनुसार श्राद्ध का निर्धारित अपराह्न काल दोपहर 3:37 बजे समाप्त हो रहा है, तो उससे पहले मुख्य श्राद्धकर्म पूरा करना बेहतर माना जाएगा.

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि समय निकलते ही पितरों के लिए कुछ भी नहीं किया जा सकता.

यहां श्राद्ध, तर्पण और दान के बीच अंतर समझना जरूरी है. पारंपरिक पार्वण श्राद्ध के लिए निश्चित काल का विधान है. वहीं पितरों का स्मरण, उनके नाम से दान और जरूरतमंद को भोजन कराने जैसे कार्य निर्धारित श्राद्ध मुहूर्त निकल जाने के बाद भी किए जा सकते हैं.

यदि परिवार में विधिवत पिंडदान या ब्राह्मण भोजन का संकल्प लिया गया है, तो समय निकलने पर अपनी ओर से विधि बदलने के बजाय कुलपुरोहित से परामर्श लेना उचित होगा.

आज श्राद्ध के तीन प्रमुख मुहूर्त

दिल्ली-एनसीआर के पंचांग के अनुसार 10 अक्टूबर को श्राद्ध के लिए ये समय बताए गए हैं.

मुहूर्त समय
कुतुप मुहूर्त सुबह 11:45 से दोपहर 12:31 बजे
रौहिण मुहूर्त दोपहर 12:31 से 1:18 बजे
अपराह्न काल दोपहर 1:18 से 3:37 बजे

ये समय दिल्ली के लिए हैं. दूसरे शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार कुछ मिनट का अंतर हो सकता है.

मुहूर्त निकल जाए तो पितरों के लिए करें ये काम

यदि किसी कारण दोपहर तक श्राद्ध नहीं कर पाए हैं, तो सबसे पहले घबराने या किसी अनिष्ट की आशंका पालने की जरूरत नहीं है.

पितरों के नाम से अन्नदान करें: अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं. धार्मिक परंपराओं में अन्नदान को पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है.

पितरों का स्मरण करें: घर में साफ स्थान पर बैठकर अपने दिवंगत माता-पिता और पूर्वजों का स्मरण करें. उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें.

पशु-पक्षियों के लिए भोजन रखें: पितृपक्ष में गाय, कौए और कुत्ते को भोजन देने की परंपरा है. हालांकि इन्हें केवल वही भोजन देना चाहिए जो उनके स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित हो.

दीपक जलाकर प्रार्थना करें: शाम के समय घर में दीपक जलाकर पितरों का स्मरण किया जा सकता है. ध्यान रखें कि यह मुख्य श्राद्धकर्म का विकल्प नहीं, बल्कि श्रद्धा व्यक्त करने का एक तरीका है.

क्या शाम को जल और काले तिल से तर्पण कर सकते हैं?

इस प्रश्न पर विशेष सावधानी जरूरी है. सामान्य पूजा-पाठ और विधिवत पितृ तर्पण एक जैसे नहीं हैं.

पारंपरिक श्राद्ध में तर्पण की विधि और समय निर्धारित होते हैं. द्रिक पंचांग के अनुसार पितृपक्ष का पार्वण श्राद्ध कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल में किया जाता है तथा तर्पण श्राद्ध के अंत में होता है.

इसलिए शाम को जल और काले तिल लेकर विधिवत तर्पण करने की सलाह सभी परिवारों के लिए एक जैसी नहीं दी जा सकती. यदि मुख्य श्राद्ध का समय निकल गया है, तो परिवार की परंपरा के अनुसार पुरोहित से विधि पूछनी चाहिए.

क्या 3:37 बजे के बाद अमावस्या भी समाप्त हो जाएगी?

नहीं. यही बात समझना सबसे जरूरी है.

10 अक्टूबर 2026 को अमावस्या तिथि रात लगभग 9:19 बजे तक रहेगी. दोपहर 3:37 बजे श्राद्ध का निर्धारित अपराह्न काल समाप्त होगा, अमावस्या तिथि नहीं.

इसका अर्थ है कि शाम तक अमावस्या होने के बावजूद मुख्य पार्वण श्राद्ध के लिए निर्धारित समय अलग है. केवल अमावस्या तिथि बाकी रहने के आधार पर शाम को श्राद्ध का पूरा मुहूर्त मान लेना उचित नहीं होगा.

अगर इस साल श्राद्ध बिल्कुल नहीं कर पाए तो क्या होगा?

कई परिवारों में यह चिंता रहती है कि पितृपक्ष में श्राद्ध छूट जाने से पितर नाराज हो जाएंगे या परिवार पर कोई संकट आ जाएगा. लेकिन किसी अनिष्ट की ऐसी निश्चित भविष्यवाणी का आधार नहीं है.

धार्मिक दृष्टि से श्राद्ध का संबंध पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और पारिवारिक कर्तव्य से है. यदि इस बार विधिवत श्राद्ध नहीं हो पाया है, तो अपनी कुलपरंपरा के अनुसार अगली उपयुक्त तिथि पर कर्म करने के विषय में पुरोहित से सलाह ली जा सकती है.

सबसे जरूरी बात: सर्वपितृ अमावस्या पर दोपहर 3:37 बजे तक श्राद्ध का समय निकल जाने का अर्थ यह नहीं कि पितरों को याद करने का अवसर भी समाप्त हो गया. विधिवत श्राद्ध के लिए निर्धारित काल का सम्मान करें, लेकिन समय निकलने पर पितरों के नाम से दान, भोजन और प्रार्थना कर सकते हैं. धार्मिक कर्मों में विधि का महत्व है, तो श्रद्धा का भी अपना स्थान है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles