Sunday, May 10, 2026

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सत्ता के शिखर पर तो पहुंच गये शुभेंदु अधिकारी, क्या बन पायेंगे ज्योति बसु और ममता बनर्जी जैसे जननायक?

सत्ता के शिखर पर तो पहुंच गये शुभेंदु अधिकारी, क्या बन पायेंगे ज्योति बसु और ममता बनर्जी जैसे जननायक?

Suvendu Adhikari Legacy: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नये युग की शुरुआत हो चुकी है. ब्रिगेड परेड ग्राउंड के ऐतिहासिक मंच से शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास तो रच दिया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा सवाल है. क्या शुभेंदु अधिकारी कभी ज्योति बसु और ममता बनर्जी के जैसे बन पायेंगे? ज्योति बसु ने 23 साल और ममता बनर्जी ने 15 साल तक बंगाल की सरकार चलायी. इन दोनों ने जादुई जनादेश हासिल किया और देश में अलग पहचान बनायी.

ज्योति बसु से ममता तक : एकछत्र राज की कहानी

बंगाल की राजनीति की तासीर रही है कि यहां जब जनता किसी को चुनती है, तो उसे तुरंत नहीं हटाती. वाममोर्चा के शासन में ज्योति बसु ने न केवल सरकार चलायी, बल्कि कैडर और आम जनता के बीच एक ऐसी पकड़ बनायी, जो दशकों तक नहीं टूटी. उनके पास स्थिरता का वह मंत्र था, जिसे हिला पाना नामुमकिन लगता था. 2011 में जब ममता बनर्जी आयीं, तो उन्होंने ‘मां, माटी, मानुष’ के नारे से लोगों के दिलों में ऐसी जगह बनायी कि वे हर घर की सदस्य बन गयीं. ‘दीदी’ की सादगी और संघर्ष ने उन्हें ‘अजेय’ बना दिया था.

क्या शुभेंदु बन पायेंगे बंगाल के ‘नये मसीहा’?

शुभेंदु अधिकारी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती उस ‘लार्जर दैन लाइफ’ इमेज को हासिल करने की है. शुभेंदु को संगठन का मास्टरमाइंड माना जाता है, लेकिन क्या वे ज्योति बसु जैसी बौद्धिक स्वीकार्यता और ममता बनर्जी जैसा भावनात्मक जुड़ाव (Emotional Connect) पैदा कर पायेंगे?

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जड़ों से जुड़ाव और डबल इंजन का भरोसा

शुभेंदु की मां गायत्री देवी कहती हैं कि उनके बेटे आज भी ‘पनता भात’ और ‘हिल्सा’ माछ जैसे बंगाली खान-पान के शौकीन हैं. यह सादगी उन्हें बंगाल के ग्रामीण वोट बैंक से जोड़ने में मदद कर सकती है. ज्योति बसु और ममता दोनों ही केंद्र से टकराकर अपनी ताकत बढ़ाते थे. शुभेंदु के पास केंद्र (पीएम मोदी) का पूरा समर्थन है. सवाल यह है कि यह समर्थन उन्हें बंगाल की जनता की नजरों में और बड़ा बनायेगा या उनकी स्वतंत्र पहचान पर भारी पड़ेगा.

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Suvendu Adhikari Legacy: सत्ता का कांटों भरा ताज

ब्रिगेड के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभेंदु को जनता की आकांक्षाओं को समझने वाला नेता बताया है. लेकिन बंगाल में जन-स्वीकार्यता हासिल कर पाना आसान नहीं होगा. ज्योति बसु ने ‘स्थिरता’ दी और ममता ने ‘बदलाव’. अब शुभेंदु से जनता ‘सुशासन और सुरक्षा’ की उम्मीद कर रही है. इसलिए सवाल है कि क्या शुभेंदु अधिकारी अगले दो दशकों तक बंगाल के निर्विवाद चेहरा बने रहेंगे?

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