खास बातें
CID at Mamata Banerjee Residence: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद बगावत का तूफान ममता बनर्जी के घर की चौखट तक पहुंच गया है. विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर वाले संगीन मामले (Signature Forgery Case) की जांच कर रही राज्य की आपराधिक जांच शाखा (CID) की हाई-प्रोफाइल टीम कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आधिकारिक आवास पहुंची. यह कार्रवाई तब हुई, जब टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) सीआईडी के समन पर हाजिर होने की दिल्ली चले गये.
24 घंटे के अल्टीमेटम वाला समन
सीआईडी अब अभिषेक बनर्जी को और अधिक समय देने के मूड में बिल्कुल नहीं है. यही वजह है कि सोमवार देर रात उनके कालीघाट स्थित घर पर तीसरा और अंतिम ‘24 घंटे का अल्टीमेटम’ वाला समन तामील करा दिया है, जिसने टीएमसी के बचे-कुचे खेमे में भारी दहशत पैदा कर दी है.
क्या वो ‘साइन-गेट’ घोटाला?
इस पूरे कानूनी और राजनीतिक ड्रामे की शुरुआत बेहद गोपनीय दस्तावेज के फर्जीवाड़े से जुड़ी है. इसकी पूरी क्रोनोलॉजी चौंकाने वाली है.
- विधानसभा चुनाव में शिकस्त के बाद 19 मई 2026 को तृणमूल कांग्रेस ने विधानसभा सचिवालय को एक आधिकारिक प्रस्ताव पत्र सौंपा था. इस पत्र के जरिये वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) मनोनीत करने की मांग की गयी थी.
- इस विवाद में अभिषेक बनर्जी की भूमिका सबसे संदिग्ध मानी जा रही है, क्योंकि उन्होंने खुद राष्ट्रीय महासचिव होने के नाते 70 विधायकों के हस्ताक्षर वाला यह आधिकारिक पत्र विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस को फॉरवर्ड (अग्रसारित) किया था.
- मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और बागी गुट के प्रमुख रीतब्रत बनर्जी ने आरोप लगाया कि इस पत्र में 10 से अधिक विधायकों के नाम केवल ब्लॉक लेटर्स (अंग्रेजी के बड़े अक्षरों) में लिखे गये थे. विशेषज्ञों की मौजूदगी में हुई जांच के दौरान अरूप रॉय, बहारुल इस्लाम और सुभाशीष दास सहित 3 बागी विधायकों ने सीआईडी के सामने ऑन-कैमरा बयान दिया कि इस पत्र पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं.
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सीआईडी की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश?
सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को 1 जून को पहली बार भवानी भवन (मुख्यालय) में हाजिर होने का समन भेजा था. तब अभिषेक ने ‘खराब स्वास्थ्य’ का हवाला देकर 2 सप्ताह का समय मांगा था. इसके बाद उन्हें 8 जून (सोमवार) को हाजिर होने का दूसरा समन मिला. जांच में सहयोग की बजाय वह शनिवार शाम को ही दिल्ली चले गये. सोमवार को ममता बनर्जी के साथ दिल्ली के कांस्टिट्यूशन क्लब में इंडिया (INDIA) गठबंधन की बैठक में शामिल हुए.
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बीमारी का बहाना और राजनीति में सक्रियता
अभिषेक के इस रवैये से सीआईडी अधिकारी नाराज हैं. उनका कहना है कि व्यक्ति खुद को बीमार बताकर जांच में शामिल होने से इनकार कर रहा है, वह दिल्ली में राजनीतिक बैठकों में पूरी तरह सक्रिय है. इसके बाद सीआईडी की टीम सीधे हरीश मुखर्जी रोड स्थित उनके ‘शांतिनिकेतन’ आवास और कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के घर पहुंची और तीसरा नोटिस थमा दिया.
CID at Mamata Banerjee Residence: पूरी तरह अलग-थलग पड़े बुआ-भतीजे
अभिषेक बनर्जी के लिए मुश्किलें केवल सीआईडी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि केंद्र और राज्य की सभी एजेंसियों ने एक साथ उनके खिलाफ चक्रव्यूह तैयार कर दिया है. कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद कोलकाता पुलिस ने अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर सालों से लगे वीआईपी पुलिस कियोस्क, बख्तरबंद गाड़ियां, स्कैनर मशीनें और सुरक्षा घेरे को पूरी तरह से हटा दिया था.
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प्रवर्तन निदेशालय ने भी भेजा समन
अभिषेक बनर्जी ने सीआईडी केस के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच में दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा (No Coercive Action) की गुहार लगायी, तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले (Primary Teachers Recruitment Scam) में उन्हें नया समन जारी कर 15 जून को कोलकाता जोनल ऑफिस में तलब कर लिया.
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