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सहरसा शहर को कचरा मुक्त बनाने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर नगर निगम की ओर से सोमवार को सहरसा प्रेक्षागृह में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें जनप्रतिनिधियों, सफाई पर्यवेक्षकों और सफाई कर्मियों को कचरे के स्रोत पर ही पृथक्करण यानी सेग्रिगेशन, वैज्ञानिक प्रसंस्करण और रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि कचरे का बेहतर प्रबंधन तभी संभव है, जब इसे घर से निकलने के समय ही अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाए। इसके बाद डोर-टू-डोर कलेक्शन के दौरान भी अलग-अलग कचरा लिया जाए, ताकि उसे वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस और रीसाइकिल किया जा सके। डीएम बोले- सिर्फ प्रशासन के भरोसे स्वच्छ शहर नहीं बनेगा कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ शहर बनाने की जिम्मेदारी सिर्फ नगर निकाय या प्रशासन की नहीं है। इसके लिए जनप्रतिनिधियों, सफाई कर्मियों और आम नागरिकों की सामूहिक भागीदारी जरूरी है। डीएम ने लोगों से अपील की कि वे अपने घर और प्रतिष्ठान से निकलने वाले कचरे को पहले से ही अलग-अलग रखें और डोर-टू-डोर कलेक्शन के दौरान सफाई कर्मियों को उसी के अनुसार कचरा दें। उन्होंने कहा कि अगर कचरा स्रोत पर ही अलग कर दिया जाए तो उसके वैज्ञानिक निस्तारण में काफी आसानी होगी। इससे रीसाइक्लिंग को बढ़ावा मिलेगा और लैंडफिल साइट पर जाने वाले कचरे की मात्रा भी कम की जा सकेगी। 4 श्रेणियों में अलग होगा कचरा प्रशिक्षण सत्र के दौरान फैसिलिटेटर पवन झा और तकनीकी विशेषज्ञों ने कचरे के पृथक्करण और उसके निस्तारण की प्रक्रिया समझाई। सफाई कर्मियों को बताया गया कि डोर-टू-डोर कलेक्शन के दौरान मुख्य रूप से कचरे को चार श्रेणियों में अलग रखना है। गीला कचरा- हरा डस्टबिन: इसमें जूठा भोजन, फल और सब्जियों के छिलके, सड़े-गले फल, फूल-पत्तियां और इसी तरह का जैविक कचरा रखा जाएगा। सूखा कचरा- नीला डस्टबिन: इसमें प्लास्टिक, कागज, गत्ता, धातु और कांच की बोतल जैसे कचरे शामिल होंगे। इस कचरे में से उपयोगी सामग्री को अलग कर रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जा सकता है। सैनिटरी कचरा- लाल डस्टबिन: डायपर, सैनिटरी पैड और इस तरह के सैनिटरी अपशिष्ट को अलग रखा जाएगा। प्रशिक्षण में बताया गया कि इस तरह के कचरे को सामान्य गीले या सूखे कचरे में मिलाने से स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर असर पड़ सकता है। स्पेशल केयर कचरा- नारंगी डस्टबिन: बैटरी, सीएफएल और एलईडी बल्ब, एक्सपायर्ड दवाइयां, पेंट के डिब्बे और ई-कचरे को इस श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे कचरे के निस्तारण के लिए अलग प्रक्रिया अपनाने की जरूरत होती है। डोर-टू-डोर कलेक्शन 100% करने पर जोर प्रशिक्षण कार्यक्रम में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण को प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि शहर में कचरे का उठाव नियमित और व्यवस्थित तरीके से होना जरूरी है, ताकि सड़क, नाली और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा जमा न हो। सफाई पर्यवेक्षकों और सफाई मित्रों को अपने-अपने वार्ड में लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया गया। उन्हें बताया गया कि लोगों को सिर्फ कचरा उठाने की सुविधा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें कचरा अलग-अलग रखने के लिए भी प्रेरित करना होगा। लैंडफिल पर कम होगा दबाव, बढ़ेगी रीसाइक्लिंग प्रशिक्षण के दौरान लैंडफिल साइट पर कचरे का बोझ कम करने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि घरों से निकलने वाले कचरे का बड़ा हिस्सा ऐसा होता है, जिसे अलग करने के बाद दोबारा उपयोग या रीसाइक्लिंग किया जा सकता है। गीले कचरे को अलग करने से उसका जैविक तरीके से प्रसंस्करण किया जा सकता है, जबकि कागज, प्लास्टिक, धातु और कांच जैसे सूखे कचरे को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जा सकता है। इससे एक तरफ कचरे की मात्रा कम होगी, वहीं दूसरी तरफ उपयोगी सामग्री को दोबारा इस्तेमाल में लाया जा सकेगा। वार्ड स्तर पर लोगों को जागरूक करेंगे सफाईकर्मी प्रशिक्षण में शामिल सफाई पर्यवेक्षकों और सफाई कर्मियों को अपने-अपने वार्ड में लोगों से संवाद कर उन्हें कचरा पृथक्करण के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी दी गई। उन्हें घर-घर जाकर लोगों को यह समझाने के लिए कहा गया कि कचरे को एक ही डस्टबिन में डालने के बजाय उसकी प्रकृति के अनुसार अलग रखा जाए। कार्यक्रम में नगर निगम सहरसा की महापौर बैन प्रिया, नगर आयुक्त, उप नगर आयुक्त, स्वच्छता पदाधिकारी देवेंद्र प्रसाद, SKS वेस्ट मैनेजमेंट सर्विसेज (OPC) प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि, नगर निगम के पार्षद, जिले के विभिन्न नगर निकायों के मुख्य पार्षद, उप मुख्य पार्षद और कार्यपालक पदाधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा बड़ी संख्या में सफाई पर्यवेक्षक और सफाई मित्रों ने प्रशिक्षण में हिस्सा लिया। कार्यक्रम के माध्यम से नगर निगम ने साफ-सफाई को सिर्फ सफाई कर्मियों की जिम्मेदारी मानने के बजाय शहर के हर नागरिक की भागीदारी से कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया।
सहरसा में अब 4 डस्टबिन में अलग-अलग रखा जाएगा कचरा:गीला, सूखा, सैनिटरी और स्पेशल केयर; सफाई कर्मियों को दी गई ट्रेनिंग, DM बोले-घर से ही अलग करें
