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सहरसा सदर अस्पताल में कुछ दिनों पहले एक पत्रकार के साथ डॉक्टर और पैरामेडिकल छात्रों ने मारपीट की थी। इस घटना के विरोध में मंगलवार देर शाम जिले के पत्रकारों का गुस्सा सामने आया। पत्रकारों ने एकजुट होकर एक कैंडल मार्च निकाला और पीड़ित पत्रकार के लिए न्याय की मांग की। यह कैंडल मार्च जिला परिषद प्रांगण से शुरू हुआ। यह डीबी रोड और थाना चौक होते हुए वीर कुंवर सिंह चौक पहुंचा, जहां यह एक नुक्कड़ सभा में बदल गया। इस पूरे विरोध प्रदर्शन की अगुवाई वरिष्ठ पत्रकार नवीन निशांत ने की। सड़क पर उतरे प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के पत्रकारों ने हाथों में मोमबत्तियां और बैनर लिए थे। उन्होंने “पत्रकारों पर हमला क्यों, जवाब दो, जवाब दो” जैसे नारे लगाकर अपना विरोध जताया। इस मार्च में विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़े कई पत्रकार शामिल थे। इंटरनेट मीडिया पर भी इस कैंडल मार्च की तस्वीरें और वीडियो तेजी से शेयर किए जा रहे हैं। जिले के आम लोग और बुद्धिजीवी भी पत्रकारों का समर्थन कर रहे हैं। वे दोषियों पर तुरंत कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। छात्रों ने अमानवीय तरीके से की मारपीट इस मौके पर पत्रकार अमन कुमार ने कहा कि सहरसा सदर अस्पताल में हमारे एक साथी पत्रकार के साथ डॉक्टरों और पैरामेडिकल छात्रों ने अमानवीय तरीके से मारपीट की। घटना के दो-तीन दिन बीत जाने के बाद भी अब तक न्याय नहीं मिला है। उन्होंने प्रशासन से इस घटना की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की। अमन कुमार ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे सड़क पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करेंगे और भूख हड़ताल पर भी बैठेंगे। दुर्व्यवहार के सारे सबूत मौजूद वहीं, प्रभात खबर के ब्यूरो प्रमुख दीपांकर श्रीवास्तव ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि पत्रकार साथी के साथ हुई मारपीट और दुर्व्यवहार के सारे सबूत मौजूद हैं। उन्होंने जिला प्रशासन और सरकार से दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। इसी के चलते आज यह शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला गया है। दीपांकर श्रीवास्तव ने कहा कि अगर जल्द ही कार्रवाई नहीं होती है, तो वे आगे भी इससे बड़ा आंदोलन करेंगे। नुक्कड़ सभा में प्रशासन को अल्टीमेटम वीर कुंवर सिंह चौक पर आयोजित नुक्कड़ सभा में वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर यह हमला कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभा के माध्यम से जिला प्रशासन को अल्टीमेटम दिया गया है कि अगर साक्ष्यों के बावजूद दोषियों को बचाने का प्रयास किया गया, तो आंदोलन की धार और तेज की जाएगी। इंटरनेट मीडिया पर भी पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग ने जोर पकड़ लिया है।
सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार से मारपीट:डॉक्टर और पैरामेडिकल छात्रों के खिलाफ पत्रकारों ने निकाला कैंडल मार्च
