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Kajari Teej 2026: हरियाली तीज के बाद आने वाली कजरी तीज (कजली तीज) सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास मानी जाती है. इसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार सहित कई राज्यों में सातूड़ी तीज या बड़ी तीज के नाम से धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन सुहागिनें पति की लंबी उम्र के लिए दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं. कुंवारी लड़कियां भी मनचाहा वर पाने के लिए यह उपवास करती हैं.
श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा के अनुसार, जानिए कजरी तीज से जुड़े प्रमुख नियम, मुहूर्त और कथा:
कजरी तीज शुभ मुहूर्त
- तृतीया तिथि प्रारंभ: 30 अगस्त, सुबह 09:36 बजे
- तृतीया तिथि समाप्त: 31 अगस्त, सुबह 08:50 बजे
- उदया तिथि मान: उदया तिथि के अनुसार कजरी तीज का पर्व 31 अगस्त को मनाया जाएगा.
नीमड़ी माता की पूजन विधि
सबसे पहले पूजा स्थल पर दीवार के सहारे नीमड़ी माता की स्थापना करें.
माता को जल व रोली के छींटे देकर अक्षत (चावल) अर्पित करें.
दीवार पर मेहंदी और रोली की 13-13 बिंदियां अनामिका अंगुली (ring finger) से लगाएं.
काजल की 13 बिंदियां तर्जनी अंगुली (index finger) से लगाएं.
नीमड़ी माता को मौली, मेहंदी, काजल, वस्त्र, फल और दक्षिणा चढ़ाएं.
पूजा के कलश पर रोली का टीका लगाकर मौली बांधें.
पूजा स्थल पर बने छोटे तालाब (घी/दूध/जल के कुंड) के पास दीपक जलाकर उसमें ककड़ी, नींबू, नीम की डाली, नथ और साड़ी का पल्ला देखें.
अंत में रात को चंद्रमा के उदय होने पर अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें.
गाय की पूजा और सत्तू का भोग
- इस दिन गेहूं, चना और चावल के सत्तू से कई तरह के स्वादिष्ट पकवान (पिंड) बनाए जाते हैं.
- व्रत खोलने से पहले गाय की पूजा अनिवार्य मानी जाती है.
- आटे की लोई/रोटी पर गुड़ और भीगा चना रखकर गाय को खिलाएं, इसके बाद ही स्वयं प्रसाद ग्रहण करें.
व्रत के जरूरी नियम
- यह व्रत मुख्य रूप से निर्जला रखा जाता है.
- गर्भवती महिलाएं या बीमार जातक फलाहार के साथ यह व्रत कर सकते हैं.
- यदि मौसम खराब होने के कारण चांद न दिखे, तो रात करीब 11:30 बजे आसमान की दिशा में अर्घ्य देकर व्रत खोला जा सकता है.
कजरी तीज की पौराणिक व्रत कथा पौराणिक कथा के अनुसार, एक गांव में एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण और उसकी पत्नी रहते थे. ब्राह्मणी ने कजरी तीज का व्रत रखा और पति से चने का सत्तू लाने की जिद की. आर्थिक तंगी से परेशान ब्राह्मण रात में साहूकार की दुकान में घुसा और केवल सवा किलो चने का सत्तू बनाकर पोटली में बांध लिया.
आवाज सुनकर साहूकार के नौकरों ने उसे पकड़ लिया. साहूकार के सामने ब्राह्मण ने रोते हुए सच बताया कि उसकी पत्नी का तीज व्रत है और उसने सिर्फ सत्तू ही लिया है, कोई चोरी नहीं की. तलाशी लेने पर उसके पास केवल सत्तू ही मिला. साहूकार ब्राह्मण की सत्यनिष्ठा और उसकी पत्नी की पति-भक्ति से बेहद प्रभावित हुआ. उसने ब्राह्मणी को अपनी धर्म-बहन मान लिया और ढेर सारा सत्तू, गहने, वस्त्र, मेहंदी और धन देकर ब्राह्मण को विदा किया. इसके बाद पूरे परिवार ने विधि-विधान से कजली माता की पूजा की और उनके जीवन से गरीबी हमेशा के लिए दूर हो गई.
सुहागिनें रखें इन बातों का ध्यान
- 16 श्रृंगार: इस दिन सुहागिनें नए वस्त्र, चूड़ी, बिंदी और मेहंदी लगाकर दुल्हन की तरह तैयार हों.
- पारस्परिक प्रेम: वैवाहिक सुख के लिए इस दिन किसी की निंदा, छल या कटु वचनों से बचें.
- लोकगीत और झूला: पूजा के बाद महिलाएं मिलकर कजरी गीत गाएं और झूला झूलें, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है.
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