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विश्व प्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेला 2026 के पहले दिन बाबा बैद्यनाथ धाम में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सावन की शुरुआत के साथ ही बुधवार देर रात से कांवरियों की लंबी कतार लगनी शुरू हो गई थी, जो गुरुवार सुबह तक करीब तीन किलोमीटर से अधिक लंबी हो गई। श्रद्धालु क्यू कॉम्प्लेक्स, फुटओवर ब्रिज और निर्धारित मार्गों से होते हुए मंदिर पहुंचकर अरघा के माध्यम से बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित कर रहे हैं। सुबह तीन बजे सरदार पांडा गुलाबानंद झा द्वारा सरकारी पूजा संपन्न होने के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण शुरू हुआ, जिसके बाद से लगातार भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के साथ-साथ बाह्य अरघा की भी व्यवस्था की गई है, जिससे बुजुर्ग, दिव्यांग और असहाय श्रद्धालु भी आसानी से बाबा को जल अर्पित कर सकें। प्रशासन के अनुसार पहली सोमवारी तक श्रद्धालुओं की संख्या में और अधिक वृद्धि होने की संभावना है। श्रावण मास की गुरुवार से शुरुआत हो गई है। यह 28 अगस्त तक चलेगा। यह महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस बार सावन में कुल चार सोमवार पड़ेंगे। पहला सोमवार 3 अगस्त को आएगा। इसी दिन सावन का पहला व्रत रखा जाएगा। सावन के पहले सोमवार का विशेष महत्व होता है। आम श्रद्धालुओं और कांवरियों की लगी कतार
जलार्पण के लिए कांवरियों की कतार तड़के सुबह से लगी हुई है। पूरा देवघर बोल बम के नारों की गूंज से गुंजायमान है। सभी कांवरिया कतारबद्ध हो कर बाबा का जयघोष करते हुए निरंतर आगे बढ़ रहे हैं और जलाभिषेक कर रहे हैं। देवघर में जिस तरह से देर शाम से ही कांवरियों की भीड़ पहुंची है, ऐसे में मंदिर प्रबंधन और जिला प्रशासन को उम्मीद है कि आज पहले दिन की लाखों श्रद्धालु बाबा का जलार्पण करेंगे। इधर, बाबा पर जलाभिषेक के लिए कांवरियों की भीड़ लाइन में लगने के लिए देर शाम से ही रूट लाइन में उमड़ पड़ी। एक माह के लिए स्पर्श पूजा बंद बुधवार से देवघर में राजकीय श्रावणी मेले की शुरुआत हो चुकी है। गुरुवार से पूरे महीने तक स्पर्श पूजा बंद कर दी गई है। भक्तों को गर्भ गृह में प्रवेश नहीं मिलेगा। श्रद्धालु अरघा से जलार्पण कर बाबा का दर्शन करते हुए बाहर निकल जाएंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने इस वर्ष व्यापक इंतजाम किए हैं। दुम्मा स्थित बिहार-झारखंड सीमा पर हेड काउंटिंग मशीन लगाई गई है, जबकि बस, ट्रेन और अन्य माध्यमों से आने वाले श्रद्धालुओं की गणना भी आधुनिक तकनीक से की जा रही है। पूरे मेला क्षेत्र में एआई आधारित कैमरे लगाए गए हैं, जो भीड़भाड़ वाले स्थानों की तुरंत पहचान कर कंट्रोल रूम को सूचना भेजते हैं। इसके आधार पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर भीड़ नियंत्रण का कार्य कर रहे हैं। 11 हजार पुलिसकर्मी मेला क्षेत्र में तैनात
सुरक्षा व्यवस्था के तहत लगभग 11 हजार पुलिसकर्मी मेला क्षेत्र में तैनात किए गए हैं। जगह-जगह पुलिस चौकियां स्थापित की गई है। तीन दर्जन से अधिक डीएसपी रैंक के अधिकारी दंडाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं, जबकि तीन एसपी रैंक के अधिकारी भी मेला व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं। ड्रोन कैमरों और एआई आधारित निगरानी प्रणाली के माध्यम से पूरे मेला क्षेत्र पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है। पानी के फव्वारा के रूप में इंद्र वर्षा लगाई गई
कांवरियों की सुविधा के लिए टेंट सिटी बनाई गई है, जिसमें लगभग 800 कांवरियां विश्राम कर सकते हैं। जगह-जगह पानी के फव्वारा के रूप में इंद्र वर्षा लगाई गई है। कांवरियों को देखते हुए पूरे सावन माह में वीआईपी दर्शन और विशेष पूजा व्यवस्था बंद रखी गई है, ताकि आम श्रद्धालुओं को सुगमता से जलार्पण और दर्शन का अवसर मिल सके। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच पूरा देवघर शिवमय वातावरण में डूबा हुआ है और हर ओर “बोल बम” के जयघोष गूंज रहे हैं।

