Wednesday, July 15, 2026

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'साहब, मैं जिंदा हूं, आप मुझे मरा क्यों बता रहे':82 साल के बुजुर्ग बोले- अधिकारी जीवित होने का प्रमाण मांग रहे, 3 महीने से चक्कर काट रहा


‘साहब, मैं जिंदा हूं, आप क्यों बोल रहे हैं कि मैं मर गया हूं। अगर मुझे पेंशन नहीं मिलेगा तो मैं और मेरी पत्नी कहां से खाना खाएंगे?’ दरअसल, भोजपुर के आरा प्रखंड स्थित पिरौटा गांव के 82 साल ढोड़ा राम को रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया है। अब ढोड़ा राम अपने जिंदा होने का सबूत देने के लिए पिछले 3 महीने से लाठी के सहारे बैंक और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। जिस वृद्धा पेंशन के सहारे उनका और उनकी पत्नी का जीवन चल रहा था, वो पेंशन उन्हें 3 महीने से नहीं मिला है। ढोड़ा राम बताते हैं कि करीब 20 साल पहले मजदूरी के दौरान उनका पैर टूट गया था, जिसके बाद वे काम करने में असमर्थ हो गए। वृद्धावस्था में उनके जीवनयापन का एकमात्र सहारा सरकार से मिलने वाली वृद्धा पेंशन है। 82 साल के बुजुर्ग की क्या कहानी है? आखिर उन्हें किसने मृत घोषित कर दिया? खुद को जिंदा साबित करने के लिए बुजुर्ग कहां चक्कर काट रहे हैं? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले ये 2 तस्वीरें देखिए अब बुजुर्ग ढोड़ा राम की पूरी कहानी जानिए ढोड़ा राम की कोई संतान नहीं है। उनकी तीन बेटियां आरती देवी, कमलावती देवी और शारदा देवी है। सभी की शादी हो चुकी हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद बेटियां बारी-बारी से माता-पिता की देखभाल करने गांव आती हैं। ढोड़ा राम बताते हैं कि जब उन्हें पता चला कि कागजों में उनकी मौत दर्ज हो चुकी है, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। तब से वह ब्लॉक कार्यालय, बैंक और संबंधित विभागों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। बुजुर्ग बताते हैं कि मेरा झोपड़ीनुमा घर बरसात में टपकता है। घर के अंदर चचरी पर रात गुजारनी पड़ती है। पत्नी फुसूंद्रा देवी किसी तरह चूल्हा जलाकर दोनों का पेट भरती हैं। उम्र के इस पड़ाव पर, जब उन्हें सहारे और सम्मान की जरूरत है, तब सरकारी रिकॉर्ड की एक गलती ने उनकी पहचान, सम्मान और जीवनयापन का एकमात्र सहारा छीन लिया है। अब ढोड़ा राम की बस एक ही गुहार है हमरा जिंदा मान लीजिए साहब, ताकि बुढ़ापा भूखे पेट न कटे। ‘होली से पहले अपनी पेंशन की राशि निकाली थी’ ढोड़ा राम ने बताया कि पहले वे मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। कुछ वर्ष पहले एक हादसे में उनका पैर टूट गया था, जिसमें रॉड लगानी पड़ी। तब से वे ठीक से चल-फिर भी नहीं पाते और लाठी के सहारे ही किसी तरह चलते हैं। काम करने की स्थिति नहीं रहने के कारण वृद्धावस्था पेंशन ही उनके और उनकी पत्नी के जीवन का एकमात्र सहारा है। उन्होंने बताया कि होली से पहले उन्होंने अपनी पेंशन की राशि निकाली थी। कुछ दिन बाद जानकारी मिली कि खाते में फिर से पेंशन की राशि आई है। जब वह पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में पैसे निकालने पहुंचे तो बैंक कर्मियों ने बताया कि खाते में पैसा तो आया है, लेकिन अब भुगतान नहीं होगा क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है। बुजुर्ग ने कहा- अधिकारी जिंदा होने का प्रमाण लेकर आने के लिए कहते हैं ढोड़ा राम ने बताया कि बाद में जब उन्होंने ऑनलाइन दस्तावेज निकलवाया तो उसमें लिखा था कि “सत्यापन के दौरान लाभार्थी मृत पाया गया, इसलिए उसे मृत घोषित करते हुए पेंशन बंद कर दी गई।” उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यह पढ़कर उनकी आंखों से आंसू निकल आए। उन्हें समझ नहीं आया कि जब वह जीवित हैं तो उन्हें मृत कैसे घोषित कर दिया गया। वे बैंक से लेकर प्रखंड कार्यालय तक कई बार गए, लेकिन कहीं उनकी सुनवाई नहीं हुई। कई जगह से उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि पहले अपने जीवित होने का प्रमाण लेकर आइए। उन्होंने कहा कि गरीब और बुजुर्ग लोगों की सुनने वाला कोई नहीं है। अब वह मजदूरी भी नहीं कर सकते। घर में कमाने वाला कोई नहीं है। ऐसे में पेंशन बंद होने से उनके सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ढोड़ा राम की बेटी कमलावती देवी ने बताया कि उनके माता-पिता पूरी तरह वृद्धावस्था पेंशन पर निर्भर हैं। पेंशन बंद होने के बाद परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है। किसी तरह उनकी मां घर का खर्च चला रही हैं। उन्होंने कहा कि उनके पिता लगातार बैंक और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हर जगह उन्हें टाल दिया जाता है। कोई अधिकारी उनकी समस्या का समाधान करने के बजाय उन्हें एक-दूसरे कार्यालय भेज देता है। जिलाधिकारी के ऑफिस में लिखित आवेदन देकर सुधार की मांग की वहीं गांव के युवक मुकेश तिवारी ने बताया कि ढोड़ा राम पूरी तरह जीवित हैं और गांव में सभी लोगों के बीच रह रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि बाबा कई दिनों तक कार्यालयों के चक्कर लगाकर थक चुके थे। जब उनकी मुलाकात उनसे हुई तो उन्होंने पूरी आपबीती सुनाई। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी कार्यालय के कक्ष संख्या-18 में लिखित आवेदन देकर पेंशन बहाल कराने और रिकॉर्ड में सुधार की मांग की गई है। उन्होंने बताया कि बैंक की ओर से भी जीवित होने का प्रमाण उपलब्ध कराने के बाद ही आगे की प्रक्रिया होने की बात कही गई है।

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