झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की प्रमुख भर्ती परीक्षाएं तय कैलेंडर से पीछे चल रही हैं। न तो परीक्षाएं आयोजित हो रही हैं और न ही परिणाम घोषित किए जा रहे हैं। 138 पदों वाली सिविल जज (जूनियर डिवीजन) भर्ती का परिणाम लंबित है, 14वीं झारखंड सिविल सेवा परीक्षा की मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार निर्धारित समय पर नहीं हो सके हैं, जबकि झारखंड पात्रता परीक्षा (जेईटी) में भी परीक्षा तिथि बदलने और कुछ विषयों की परीक्षा रद्द होने से प्रक्रिया अधूरी है। आयोग की आधा दर्जन से अधिक भर्तियों में कहीं परिणाम अटका है तो कहीं अगला चरण शुरू नहीं हो सका है। इसका असर 1.25 लाख से अधिक अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है, जो महीनों से परिणाम, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार का इंतजार कर रहे हैं। विवाद -मुकदमों से है पुराना नाता: जेपीएससी का इतिहास बताता है कि आयोग की कई भर्ती परीक्षाएं परिणाम प्रकाशन के बाद न्यायालय पहुंचती रही हैं। कभी प्रश्नों की शुद्धता, कभी उत्तर कुंजी, कभी आरक्षण तो कभी मेरिट सूची को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रश्नपत्र निर्माण, मॉडरेशन, उत्तर कुंजी सत्यापन और परिणाम प्रकाशन की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी तथा त्रुटिरहित बनाया जाए तो न्यायालयी विवादों की संख्या कम हो सकती है। इससे भर्ती प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करने में भी मदद मिलेगी। 14वीं सिविल सेवा परीक्षा का शेड्यूल बिगड़ा: जेपीएससी की सबसे प्रतिष्ठित भर्ती प्रक्रिया मानी जाने वाली 14वीं झारखंड सिविल सेवा संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा भी कैलेंडर से भटक चुकी है। 103 पदों के लिए आयोजित इस परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा हो चुकी है। पांच दिन पहले इसकी अंतिम उत्तर कुंजी जारी की गई है। आयोग के परीक्षा कैलेंडर के अनुसार 2, 3 और 4 मई 2026 को मुख्य परीक्षा आयोजित होनी थी, लेकिन परीक्षा नहीं हो सकी। इतना ही नहीं, आयोग के कैलेंडर में 16 से 19 जून 2026 तक साक्षात्कार की तिथि भी निर्धारित है। लेकिन मुख्य परीक्षा ही आयोजित नहीं हुई है, इसलिए जून में इंटरव्यू होना संभव नहीं दिख रहा। अब मुख्य परीक्षा, परिणाम और साक्षात्कार तीनों चरणों की नई तिथि तय करनी होगी, जिससे पूरी भर्ती प्रक्रिया कई महीने पीछे खिसक सकती है। झारखंड पात्रता परीक्षा भी तय समय से पीछे: झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट) भी आयोग के परीक्षा कैलेंडर के अनुसार तय समय पर नहीं चल रही है। कैलेंडर के अनुसार यह परीक्षा 29 मार्च को आयोजित होनी थी। बाद में परीक्षा तिथि बढ़ाकर 26 अप्रैल कर दी गई। परीक्षा के दौरान दो विषयों की परीक्षा रद्द कर दी गई, जिसकी पुनर्परीक्षा 10 जून को होनी है। पात्रता परीक्षा से जुड़े अभ्यर्थियों का कहना है कि लगातार बदलती तिथियों और रद्द परीक्षाओं से उनकी तैयारी की रणनीति प्रभावित हुई है तथा अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाली यह परीक्षा राज्य में 18 साल बाद दूसरी बार आयोजित हुई है। इस परीक्षा में करीब 1.70 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए हैं। सिविल जज भर्ती का परिणाम लंबित: 138 सिविल जज (जूनियर डिवीजन) पदों पर भर्ती के लिए वर्ष 2023 में विज्ञापन जारी किया गया था। इस परीक्षा की उत्तर कुंजी में दो बार संशोधन किया गया। इसके बाद वर्ष 2024 में परिणाम जारी किया गया, लेकिन मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। अभ्यर्थियों ने तीन प्रश्नों की शुद्धता और श्रेणीवार परिणाम प्रकाशित नहीं करने को लेकर याचिका दायर की थी। झारखंड हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने दो प्रश्न हटाने और एक प्रश्न का उत्तर संशोधित करने का निर्देश देते हुए नया रिजल्ट जारी करने को कहा था। आयोग ने आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया। समिति रिपोर्ट सौंप चुकी है, इसके बाद भी परिणाम जारी नहीं हुआ।
सिविल जज से लेकर जेट तक नियुक्तियां अटकीं, अभ्यर्थियों को परिणाम का इंतजार
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की प्रमुख भर्ती परीक्षाएं तय कैलेंडर से पीछे चल रही हैं। न तो परीक्षाएं आयोजित हो रही हैं और न ही परिणाम घोषित किए जा रहे हैं। 138 पदों वाली सिविल जज (जूनियर डिवीजन) भर्ती का परिणाम लंबित है, 14वीं झारखंड सिविल सेवा परीक्षा की मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार निर्धारित समय पर नहीं हो सके हैं, जबकि झारखंड पात्रता परीक्षा (जेईटी) में भी परीक्षा तिथि बदलने और कुछ विषयों की परीक्षा रद्द होने से प्रक्रिया अधूरी है। आयोग की आधा दर्जन से अधिक भर्तियों में कहीं परिणाम अटका है तो कहीं अगला चरण शुरू नहीं हो सका है। इसका असर 1.25 लाख से अधिक अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है, जो महीनों से परिणाम, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार का इंतजार कर रहे हैं। विवाद -मुकदमों से है पुराना नाता: जेपीएससी का इतिहास बताता है कि आयोग की कई भर्ती परीक्षाएं परिणाम प्रकाशन के बाद न्यायालय पहुंचती रही हैं। कभी प्रश्नों की शुद्धता, कभी उत्तर कुंजी, कभी आरक्षण तो कभी मेरिट सूची को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रश्नपत्र निर्माण, मॉडरेशन, उत्तर कुंजी सत्यापन और परिणाम प्रकाशन की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी तथा त्रुटिरहित बनाया जाए तो न्यायालयी विवादों की संख्या कम हो सकती है। इससे भर्ती प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करने में भी मदद मिलेगी। 14वीं सिविल सेवा परीक्षा का शेड्यूल बिगड़ा: जेपीएससी की सबसे प्रतिष्ठित भर्ती प्रक्रिया मानी जाने वाली 14वीं झारखंड सिविल सेवा संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा भी कैलेंडर से भटक चुकी है। 103 पदों के लिए आयोजित इस परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा हो चुकी है। पांच दिन पहले इसकी अंतिम उत्तर कुंजी जारी की गई है। आयोग के परीक्षा कैलेंडर के अनुसार 2, 3 और 4 मई 2026 को मुख्य परीक्षा आयोजित होनी थी, लेकिन परीक्षा नहीं हो सकी। इतना ही नहीं, आयोग के कैलेंडर में 16 से 19 जून 2026 तक साक्षात्कार की तिथि भी निर्धारित है। लेकिन मुख्य परीक्षा ही आयोजित नहीं हुई है, इसलिए जून में इंटरव्यू होना संभव नहीं दिख रहा। अब मुख्य परीक्षा, परिणाम और साक्षात्कार तीनों चरणों की नई तिथि तय करनी होगी, जिससे पूरी भर्ती प्रक्रिया कई महीने पीछे खिसक सकती है। झारखंड पात्रता परीक्षा भी तय समय से पीछे: झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट) भी आयोग के परीक्षा कैलेंडर के अनुसार तय समय पर नहीं चल रही है। कैलेंडर के अनुसार यह परीक्षा 29 मार्च को आयोजित होनी थी। बाद में परीक्षा तिथि बढ़ाकर 26 अप्रैल कर दी गई। परीक्षा के दौरान दो विषयों की परीक्षा रद्द कर दी गई, जिसकी पुनर्परीक्षा 10 जून को होनी है। पात्रता परीक्षा से जुड़े अभ्यर्थियों का कहना है कि लगातार बदलती तिथियों और रद्द परीक्षाओं से उनकी तैयारी की रणनीति प्रभावित हुई है तथा अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाली यह परीक्षा राज्य में 18 साल बाद दूसरी बार आयोजित हुई है। इस परीक्षा में करीब 1.70 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए हैं। सिविल जज भर्ती का परिणाम लंबित: 138 सिविल जज (जूनियर डिवीजन) पदों पर भर्ती के लिए वर्ष 2023 में विज्ञापन जारी किया गया था। इस परीक्षा की उत्तर कुंजी में दो बार संशोधन किया गया। इसके बाद वर्ष 2024 में परिणाम जारी किया गया, लेकिन मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। अभ्यर्थियों ने तीन प्रश्नों की शुद्धता और श्रेणीवार परिणाम प्रकाशित नहीं करने को लेकर याचिका दायर की थी। झारखंड हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने दो प्रश्न हटाने और एक प्रश्न का उत्तर संशोधित करने का निर्देश देते हुए नया रिजल्ट जारी करने को कहा था। आयोग ने आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया। समिति रिपोर्ट सौंप चुकी है, इसके बाद भी परिणाम जारी नहीं हुआ।
