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गोड्डा से बीजेपी सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने राज्य में एम्बुलेंस व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने देवघर, दुमका और गोड्डा जिलों में पिछले 20 वर्षों में खरीदी गई एम्बुलेंसों का पूरा ब्योरा मांगा है। सांसद ने यह भी जानना चाहा है कि इन एम्बुलेंसों की वर्तमान स्थिति क्या है। वे अभी उपयोग में हैं या जर्जर होकर बेकार पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि जनता के पैसे से खरीदी गई सुविधाओं की वास्तविक स्थिति सामने आए। उन्होंने पत्र की कॉपी हेल्थ मिनिस्टर इरफान अंसारी को भी दी है। तीन बिंदुओं पर खरीदारी को लेकर सवाल पत्र में सांसद ने विशेष रूप से तीन बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। पहले बिंदु में उन्होंने पूछा है कि सांसद और विधायक निधि से पिछले 20 वर्षों में कितनी एम्बुलेंस खरीदी गईं। किन जनप्रतिनिधियों के फंड से खरीदी गईं। उनकी वर्तमान स्थिति क्या है। दूसरे बिंदु में उन्होंने राज्य सरकार द्वारा खरीदी गई एम्बुलेंसों का ब्योरा मांगा है। जिसमें यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि ये एम्बुलेंस किन अस्पतालों को दी गईं, कब दी गईं और उनकी वर्तमान कार्य स्थिति क्या है। सांसद ने यह भी सवाल उठाया कि अगर एम्बुलेंस जर्जर हालत में हैं, तो वे कब से ऐसी स्थिति में हैं। इसके लिए जिम्मेदार कौन है। उन्होंने इसे सार्वजनिक धन के दुरुपयोग से जोड़ते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है। CSR फंड से खरीदी एम्बुलेंस की भी मांगी जानकारी तीसरे बिंदु में सांसद ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के तहत खरीदी गई एम्बुलेंसों का भी पूरा विवरण मांगा है। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों में इन तीन जिलों में CSR के माध्यम से कितनी एम्बुलेंस दी गईं। उन्हें किन अस्पतालों या संस्थाओं को सौंपा गया और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है। सांसद निशिकांत ने यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने स्वयं ONGC, NTPC, पावरग्रिड समेत अन्य कॉर्पोरेट संस्थाओं के सहयोग से 15 एम्बुलेंस उपलब्ध कराई हैं। इसके अलावा कितनी नई एम्बुलेंस इस योजना के तहत आईं, इसकी जानकारी भी मांगी गई है। सांसद ने सभी मामलों की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। कहा कि जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए।

