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सुपौल में निजी स्कूलों पर जिला प्रशासन सख्त:री-एडमिशन शुल्क और किताबों में मनमानी पर होगी कार्रवाई, 2 सप्ताह में APAAR ID का होगा निर्माण


सुपौल में निजी विद्यालयों की मनमानी पर लगाम कसने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी सावन कुमार ने री-एडमिशन शुल्क और किताबों की मनमानी पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। गुरुवार को जिलाधिकारी सावन कुमार की अध्यक्षता में समाहरणालय में निजी विद्यालयों के संचालक और प्राचार्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में उप विकास आयुक्त सारा अशरफ सहित शिक्षा विभाग के कई पदाधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम 2019 और बिहार राज्य बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा नियमावली 2011 के अनुपालन को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। कक्षा-वार शुल्क की जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश जिलाधिकारी ने सभी निजी विद्यालयों को अपनी वेबसाइट और सूचना पट्ट पर कक्षा-वार शुल्क की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को सही जानकारी मिल सके, इसके लिए पारदर्शिता सुनिश्चित करना अनिवार्य है। कई विद्यालयों द्वारा ‘री-एडमिशन’ के नाम पर वसूले जा रहे शुल्क पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने इस तरह की वसूली को पूरी तरह अनुचित बताया और चेतावनी दी कि अवैध वसूली करने वाले विद्यालयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 2 दिनों में जानकारी अपडेट करने का निर्देश समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि जिले के 34 निजी विद्यालयों ने कक्षा-1 में संभावित नामांकन क्षमता (इंटेक कैपेसिटी) को ‘ज्ञानदीप पोर्टल’ पर सार्वजनिक नहीं किया है। इस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित विद्यालयों को दो दिनों के भीतर जानकारी अपडेट करने का निर्देश दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित समय सीमा के भीतर पोर्टल अपडेट नहीं करने वाले विद्यालयों को सूचना छुपाने और विभागीय निर्देशों की अवहेलना का दोषी मानते हुए उनका संचालन बंद किया जा सकता है, साथ ही अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। मनमानी तरीके से राशि वसूलने पर हुई चर्चा बैठक में निजी विद्यालयों द्वारा किताबों की खरीद में मनमानी तरीके से राशि वसूलने का मुद्दा भी उठाया गया। कई संचालकों ने भी इस प्रथा को गलत माना। इस पर उप विकास आयुक्त ने निर्देश दिया कि शुल्क वृद्धि या अन्य किसी भी आर्थिक निर्णय के लिए निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम 2019 का सख्ती से पालन किया जाए। यदि कोई विद्यालय इस नियम का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ अधिनियम की धारा-7 के तहत कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने दैनिक निरीक्षण के दौरान निजी विद्यालयों की नियमित जांच करें। 2 सप्ताह में करना है APAAR ID का निर्माण साथ ही छात्रों और अभिभावकों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को समझें और उसका समाधान सुनिश्चित करें। बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्देश के तहत सभी निजी विद्यालयों को ‘अपार कार्ड’ (APAAR ID) का निर्माण अगले दो सप्ताह के भीतर पूरा करने को कहा गया। इसके अलावा, उप विकास आयुक्त ने सभी विद्यालय संचालकों से जनगणना कार्य में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संचालक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी और अपने परिवार की जानकारी अपडेट करें तथा आवश्यकता पड़ने पर निकटतम सरकारी विद्यालय के प्रशिक्षित शिक्षकों से सहयोग लें।

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