Thursday, August 27, 2026

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सुप्रीम सुनवाई:दुमका के दोहरे हत्याकांड में 45 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने दी एकमात्र जीवित दोषी साइमन को रिहाई, कहा-यह न्यायिक तंत्र की विफलता

22 साल तक ट्रायल का सामना किया, अपील पर फैसला आने में भी दो दशक लग गए

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दुमका के भुरुंडिया गांव में 45 साल पहले हुए दोहरे हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मामले के एकमात्र जीवित आरोपी 70 वर्षीय साइमन सोरेन की सजा निलंबित करते हुए उन्हें निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया है। शर्त रखी कि वह कोई नया अपराध नहीं करेगा।

सुनवाई के दौरान जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने न्यायिक प्रक्रिया में हुई 45 साल की देरी पर बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए इसे ‘न्यायिक तंत्र की विफलता’ करार दिया। बचाव पक्ष की वकील फौजिया शकील ने साइमन सोरेन की उम्र और गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों का हवाला देकर रिहाई की मांग की थी।

वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है आरोप तय होने से पहले 2 और सजा सुनाने के बाद 3 दोषियों की मौत…दुमका के दोहरे हत्याकांड में पुलिस ने छह लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया था। इस कांड की कानूनी प्रक्रिया इतनी लंबी चली कि आरोप तय होने से पहले ही दो आरोपियों की मौत हो गई। निचली अदालत ने इस केस की सुनवाई करते हुए 1991 में आरोप तय किया था। इसके बाद ट्रायल चला, जिसमें करीब 12 साल लग गए। आरोप तय किए जाने के बाद 11 साल के अंदर यह केस पांच अलग-अलग कोर्ट में स्थानांतरित हुआ। आखिरकार वर्ष 2002 में ट्रायल कोर्ट न साइमन सोरेन सहित सभी आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सजा के बाद तीन दोषियों की मौत हो गई।

अपील पर फैसला आने में लगे 22 साल… ट्रायल कोर्ट से उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के खिलाफ दोषियों ने हाईकोर्ट में अपील याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट में करीब 22 साल तक मामले की सुनवाई चली। वर्ष 2024 में हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखी। इसके बाद साइमन सोरेन ने सरेंडर कर दिया। इतनी लंबी कानूनी प्रक्रिया में साइमन सोरेन करीब 2 साल 4 माह और 12 दिन जेल में रहे। इसी आधार पर उन्हें रिहाई मिली।

आगे क्या: पेंडिंग अपील पर केंद्र को बनाया पक्षकार सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक अपीलों के पेंडिंग मामले को देखते हुए केंद्र सरकार को भी पक्षकार बनाया है। अदालत ने निचली अदालत और हाईकोर्ट से केस का मूल रिकॉर्ड फिजिकल और डिजिटल दोनों में रूप में मांगा है। चार सप्ताह के अंदर सारे रिकॉर्ड अदालत में जमा करने का निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट में अब मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।

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