Thursday, May 7, 2026

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हत्याकांड में इस्तेमाल बाइक का रजिस्ट्रेशन नंबर आसनसोल और पता है बर्नपुर का

हत्याकांड में इस्तेमाल बाइक का रजिस्ट्रेशन नंबर आसनसोल और पता है बर्नपुर का

आसनसोल.

भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में इस्तेमाल बाइक का रजिस्ट्रेशन नंबर आसनसोल का निकला है. बाइक का रजिस्ट्रेशन विभाष कुमार भट्टाचार्य के नाम पर है और ठिकाना हीरापुर थाना क्षेत्र के बर्नपुर गुरुद्वारा रोड में सेल आइएसपी के आवासीय क्षेत्र में क्वार्टर नंबर एबी 7/12 दिया गया है.

जांच के क्रम में पाया गया कि इस पते पर विभाष कुमार भट्टाचार्य नाम का कोई व्यक्ति नहीं रहता है, यहां पिछले 12 सालों से सेल आइएसपी बर्नपुर के कर्मी धरमवीर कुमार रहते हैं. श्री कुमार ने बताया कि उन्हें किसी विभाष कुमार भट्टाचार्य नामक व्यक्ति की जानकारी है. सेल आइएसपी के नगर विभाग से पता करने का प्रयास किया गया कि 14 साल पहले यह क्वाटर क्या किसी विभाष कुमार भट्टाचार्य के नाम पर आवंटित किया गया था? इसकी जानकारी नहीं मिल पायी है. पुलिस भी इसकी जांच कर रही है. क्योंकि इस बाइक का रजिस्ट्रेशन 14 साल पहले 2012 में हुआ था. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में नंबर प्लेट फर्जी लग रहा है. पूरी तरह जांच के बाद स्थिति साफ होगी.गौरतलब है कि भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ को बुधवार रात को गोली मारकर हत्या कर दी गयी. हत्या में बाइक का उपयोग हुआ था. वारदात को अंजाम देने के बाद हत्यारा घटनास्थल से कुछ दूर बाइक छोड़ कर भाग गया था. पुलिस को जो बाइक मिली है, उसका रजिस्ट्रेशन नंबर आसनसोल का निकला है, जिसके आधार पर इस बाइक से जुड़े सारे पहलुओं की गहन पड़ताल शुरू कर दी गयी है.

ऐसे होता है बाइक का रजिस्ट्रेशन है बाकायदा सरकारी प्रावधान

हीरो मोटर्स शोरूम के एक मालिक ने बताया कि कोई भी ग्राहक यदि बाइक खरीदता है, तो शोरूम में ही उसे टैक्स पेमेंट करना होता है. इसके लिए एड्रेस प्रूफ (पते का प्रमाण) देना अनिवार्य है. शोरूम से टैक्स का पैसा स्थानीय परिवहन विभाग में जाता है, वहां से रजिस्ट्रेशन होकर नम्बर प्लेट आता है. जिसका उपयोग गाड़ी में किया जाता है. वर्तमान समय में एड्रेस प्रूफ जांचने का अनेकों साधन है. पहले यह नहीं होता था. गाड़ी खरीदने के बाद पैसा आरटीओ ऑफिस में जमा करना होता था और वहीं से रजिस्ट्रेशन होकर नम्बर मिलता था. इसमें भी एड्रेस प्रूफ की जरूरत होती थी.

वर्ष 2012 में बाइक के रजिस्ट्रेशन के लिए आरटीओ कार्यालय आकर एड्रेस प्रूफ की एक प्रति के साथ टैक्स का भुगतान करना होता था और रजिस्ट्रेशन के बाद नंबर मिल जाता था. वर्ष 2017 के बाद से शोरूम में ही टैक्स का पैसा जमा हो जाता है और वहीं से सारे कागजात ऑनलाइन अपलोड कर दिये जाते हैं. रजिस्ट्रेशन के लिए एड्रेस प्रूफ अनिवार्य है. पहले एड्रेस प्रूफ जांचने का कोई तरीका नहीं था. जो कागजात दिये गये, उनके आधार पर रजिस्ट्रेशन हो जाता था. आज के समय में एड्रेस प्रूफ वेरीफिकेशन का साधन मौजूद है, वेरिफिकेशन के बाद ही रजिस्ट्रेशन होता है.

मृण्मय मजूमदार,

आरटीओ- पश्चिम बर्दवान

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