झारखंड की नदियों में बालू भरा पड़ा है। लेकिन लोगों को घर बनाने के लिए मनमाना दाम देकर अवैध बालू खरीदना पड़ रहा है। हाईकोर्ट ने भी 75 दिन पहले 13 जनवरी को बालू घाटों के आवंटन पर लगी रोक हटा ली है। इसके बावजूद किसी भी जिले में अब तक बालू का उठाव नहीं हो रहा है। नतीजा यह है कि बालू माफिया 100 सीएफटी बालू के लिए 6000 रुपए तक वसूल रहे हैं। राज्य के आठ जिलों में कैटेगरी बी के घाटों का टेंडर हो गया है। कॉन्ट्रैक्टर के साथ एग्रीमेंट भी हो गया है, लेकिन कागजी प्रक्रिया में बालू का उठाव फंस गया है। कई जिलों में कॉन्ट्रैक्टर ने पर्यावरण स्वीकृति लेने के लिए सिया के पास आवेदन दिया है, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। रांची के 19 घाटों में मात्र 3 घाट सुंडील, श्यामनगर और चोकोसोरेंग की पर्यावरण स्वीकृति मिली है। अब कंसेंट टू एस्टेब्लिश (सीटीई ) और कंसेंट टू ऑपरेट ( सीटीओ) के लिए प्रदूषण नियंत्रण पर्षद से अनुमति लेने की प्रक्रिया चल रही है। अन्य जिलों में पर्यावरण स्वीकृति, सीटीई और सीटीओ नहीं मिला है। ऐसी ही स्थिति रही तो इस साल भी बालू की जबर्दस्त किल्लत होगी। क्योंकि, 72 दिनों के बाद बालू घाटों से बालू उत्खनन फिर बंद हो जाएगा। 10 जून से राज्यभर में बालू घाटों से खनन पर रोक लग जाएगी, जो 15 अक्टूबर तक जारी रहेगी। ऐसी स्थिति में निजी घर सहित अपार्टमेंट बनाना महंगा होगा। क्योंकि, पिछले वर्ष की तरह इस बार भी बालू की कालाबाजारी होना तय है। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है नियमों में उलझा कर 8 सालों में तीन गुणा कीमत बढ़ाया कई नेता-अफसरों ने बालू से अवैध कमाई का खेल किया। क्योंकि, बड़े नेताओं ने अपने फायदें के लिए पिछले 8 सालों तक बालू घाटों का टेंडर ही नहीं होने दिया। कोरोना के पहले तक 2000 से 2200 रुपए में 100 सीएफटी बालू मिलता था। अब 5500 से 6000 रुपए में मिल रहा है। मतलब इतने वर्षों में तीन गुणा कीमत बढ़ गई। वर्ष 2017 के बाद सरकार ने जेएसएमडीसी को बालू बेचने का ठेका दे दिया गया। इसका नतीजा हुआ कि जेएसएमडीसी ने ऑनलाइन पोर्टल से बालू बेचने का दावा किया, लेकिन इसमें भी बालू कारोबारियों का कब्जा रहा। स्थानीय नेता और पुलिस की मिलीभगत से बालू का खेल चलता रहा। चाईबासा में मिल रहा सबसे महंगा बालू… रांची सहित पूरे राज्य में अवैध बालू का धंधा चल रहा है। रांची में 100 सीएफटी बालू के लिए 5000 रुपए तक वसूले जा रहे हैं तो चाईबासा में 6000 रुपए में बालू मिल रहा है। कोडरमा, जामताड़ा, लातेहार, रामगढ़, सिमडेगा, लोहरदगा में 100 सीएफटी बालू 2000 रुपए से 3500 रुपए वसूले जा रहे हैं, लेकिन ट्रैक्टर से बालू बेचा जा रहा है,जो महज 60 से 70 सीएफटी ही रहता है। ऐसे में लोगों को अधिक कीमत देकर बालू लेना पड़ रहा है। 6 माह पहले टेंडर पर कागजी प्रक्रिया अभी भी अधूरी सरकार ने पिछले वर्ष जेएसएमडीसी से बालू बेचने का अधिकार वापस ले लिया। इसके बाद नई नियमावली बनाई गई। बालू घाटों को टेंडर के माध्यम से नीलाम करने का निर्णय लिया गया। कैटेगरी बी के 444 बालू घाटों का टेंडर निकाला गया। लेकिन, अक्टूबर में हाईकोर्ट ने पेसा नियमावली लागू करने तक बालू घाटों के आवंटन पर रोक लगा दी थी। पेसा नियमावली लागू हो गई। 13 जनवरी को बालू घाटों पर लगी रोक भी हट गई,लेकिन अफसरों ने अभी तक कागजी प्रक्रिया पूरी नहीं की। इस वजह से अभी तक घाटों से बालू का उठाव शुरू नहीं हुआ।