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13 साल बाद परिवार को शुभेंदु से न्याय की आस

13 साल बाद परिवार को शुभेंदु से न्याय की आस

Suvendu Adhikari Janata Darbar: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में वर्ष 2013 के बहुचर्चित और वीभत्स कामदुनी सामूहिक दुष्कर्म एवं हत्या मामले (Kamduni Rape and Murder Case) की पीड़िता के परिजनों में 13 साल बाद न्याय की उम्मीद जगी है. परिवार के सदस्य बुधवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के ‘जनता दरबार’ में पहुंचे और न्याय की गुहार लगायी. मुख्यमंत्री ने परिजनों की बात सुनने के बाद अधिकारियों को इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई करने के निर्देश दिये.

टुम्पा और मौसमी कोयल भी थीं परिवार के साथ

इस दौरान पीड़िता के माता-पिता और परिजनों के साथ कामदुनी आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहीं टुम्पा कोयल और मौसमी कोयल भी थीं. दोनों महिलाओं ने घटना के बाद न्याय के लिए राज्यव्यापी नागरिक विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया था.

शिकायतों पर उचित कानूनी कार्रवाई होगी : अधिकारी

राज्य सरकार के एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री के जनता दरबार में आम नागरिकों और पीड़ितों से जो भी आवेदन व शिकायतें मिली हैं, उन पर उचित कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत त्वरित कार्रवाई की जायेगी.

ये भी पढ़ें: कामदुनी कांड के पीड़ित परिवार की मदद करेगी शुभेंदु अधिकारी सरकार, सुप्रीम कोर्ट में नहीं करेगी विरोध

क्या था 2013 का कामदुनी कांड?

वर्ष 2013 में उत्तर 24 परगना जिले के कामदुनी में दिल-दहला देने वाली घटना हुई थी. कॉलेज से परीक्षा देकर घर लौट रही एक युवा छात्रा को कुछ अपराधियों ने एक खेत में घसीटकर सामूहिक दुष्कर्म किया. बाद में उसकी हत्या कर दी. पीड़िता का क्षत-विक्षत शव अगली सुबह बरामद हुआ, जिसके बाद पूरे पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था को लेकर जन-आक्रोश भड़क उठा.

सत्र अदालत से हाईकोर्ट तक का कानूनी सफर

इस जघन्य अपराध के 3 वर्ष बाद, एक विशेष सत्र अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 3 मुख्य आरोपियों को मौत की सजा (Death Penalty) और 3 अन्य को उम्रकैद की सजा सुनायी थी. बाद में मामला कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) पहुंचा, तो खंडपीठ ने मृत्युदंड पाने वाले तीन दोषियों में से 2 की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया. साक्ष्यों के अभाव में तीसरे दोषी को बरी कर दिया. अदालत ने उम्रकैद की सजा पाने वाले 3 अन्य दोषियों की सजा भी कम कर दी थी. हाईकोर्ट के इस फैसले से पीड़िता का परिवार स्तब्ध था.

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ममता बनर्जी सरकार पर सहयोग न करने का आरोप

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विपक्ष में रहते हुए आरोप लगाया था कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पूर्ववर्ती सरकार उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में न्याय की अंतिम लड़ाई लड़ रहे पीड़िता के परिवार का परोक्ष रूप से ‘विरोध’ कर रही थी. शुभेंदु ने दोहराया कि उनकी सरकार पीड़ित परिवार को हरसंभव कानूनी सहायता मुहैया कराकर न्याय सुनिश्चित करेगी.

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा परिवार

पीड़िता के परिवार ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. परिवार का आरोप है कि उन्हें निचली अदालतों से पूर्ण न्याय नहीं मिला, क्योंकि तत्कालीन राज्य सरकार और पुलिस जांच एजेंसियां अदालतों में महत्वपूर्ण फॉरेंसिक व परिस्थितिजन्य तथ्य रखने में विफल रहीं. पुलिस ने जान-बूझकर मामले की उचित व निष्पक्ष जांच नहीं की.

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स्थानीय लोगों के विरोध पर भड़क गयीं थीं ममता बनर्जी

कामदुनी की घटना के बाद जब तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्थिति का जायजा लेने के लिए इलाके का दौरा किया था, तब उन्हें स्थानीय महिलाओं और ग्रामीणों के विरोध व नारेबाजी का सामना करना पड़ा था. तब ममता बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगा दिया था कि उनके खिलाफ प्रदर्शन करने वाले आम ग्रामीण नहीं, बल्कि माओवादी (Maoists) हैं. तत्कालीन मुख्यमंत्री के इस विवादित बयान की राज्य भर के बुद्धिजीवियों और नागरिक समाज ने कड़ी आलोचना की थी.

18 मई से जनता दरबार लगा रहे हैं शुभेंदु अधिकारी

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी विभिन्न सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दों पर आम जनता की शिकायतें सीधे सुनने और अधिकारियों को उनके शीघ्र समाधान का निर्देश देने के लिए इस ‘जनता दरबार’ का आयोजन कर रहे हैं. इस प्रकार का पहला साप्ताहिक कार्यक्रम 18 मई को हुआ था. मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की थी कि नागरिक हर सप्ताह उनसे सीधे मिलकर अपनी प्रशासनिक समस्याएं साझा कर सकेंगे.

शमिक ने कहा था- कामदुनी की फाइल खोलेगी सरकार

कुछ ही दिन पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम बंगाल प्रदेश इकाई के अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने संकेत दिये थे कि सरकार इस संवेदनशील मामले की फाइलों को दोबारा खोलने पर विचार कर रही है.

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