Wednesday, July 8, 2026

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14वीं जेपीएससी पीटी:पहले पेपर में 100 में 48 अंक, दूसरे में केवल 45, फिर भी पास!


14वीं झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा (जेपीएससी) प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) का परिणाम अब केवल अभ्यर्थियों के बीच विवाद का विषय नहीं रह गया है। आयोग के भीतर से शुरू हुआ विरोध अब सड़क तक पहुंच गया है। अभ्यर्थी, छात्र संगठन और विपक्षी दल भी खुलकर विरोध में उतर आए हैं। कटऑफ अंक सार्वजनिक नहीं करने, सोशल मीडिया पर वायरल ओएमआर और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वायरल पोस्ट में एक अभ्यर्थी के चयन को लेकर किए गए दावों ने प्रतियोगी छात्रों के बीच नई बहस छेड़ दी है। दावा किया गया है कि उपलब्ध अंकों के आधार पर उसका प्रारंभिक परीक्षा में सफल होना संभव नहीं था। इसके बाद भी उसे सफल घोषित कर दिया गया। वायरल पोस्ट के मुताबिक, उस अभ्यर्थी को प्रथम प्रश्नपत्र में 100 में से 48 अंक प्राप्त हुए, जबकि सफल होने के लिए दूसरे प्रश्नपत्र में 100 में से 97 अंक प्राप्त करना आवश्यक हो जाता है। पर पेपर-2 में उसे सिर्फ 45 अंक ही मिले। ऐसे में परीक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति असामान्य और संदेहास्पद है। इससे पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं। क्या-क्या है वायरल पोस्ट में 1. वायरल पोस्ट में एक अभ्यर्थी की कथित ओएमआर शीट, रोल नंबर और उत्तरों का विवरण साझा करते हुए दावा किया गया है कि उपलब्ध अंकों के आधार पर उसका प्रारंभिक परीक्षा में सफल होना संभव नहीं था। इसके बाद भी उसे सफल घोषित कर दिया गया।
2. दूसरे पोस्ट में आरोप लगाया गया है कि पेपर-2 में केवल 45 सही उत्तर होने पर भी संबंधित अभ्यर्थी का चयन कर लिया गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसपर जेपीएससी की ओर से कोई स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। संयोग या… लगातार रोल नंबर वाले पास
14वीं जेपीएससी पीटी के परिणाम को लेकर एक और सवाल सामने आया है। अभ्यर्थियों का दावा है कि कुछ परीक्षा केंद्रों पर लगातार क्रमांक वाले कई अभ्यर्थी एक साथ सफल घोषित हुए हैं। अभ्यर्थियों ने आयोग से परीक्षा केंद्रवार चयनित अभ्यर्थियों का विस्तृत डेटा और पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और आयोग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। दो सफल रोल नंबरों के बीच 832 का अंतर
अभ्यर्थियों ने परिणाम सूची में दो सफल रोल नंबरों के बीच 832 क्रमांकों का अंतर होने का दावा करते हुए चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। अभ्यर्थियों के अनुसार, परिणाम सूची में रोल नंबर 2601290656 के बाद अगला सफल रोल नंबर 2601291488 है। यानी इन दोनों के बीच 832 क्रमांक (657 से 1487 तक) का अंतर है। इसी आधार पर अभ्यर्थी आयोग से पूछ रहे हैं कि इतने बड़े अंतर की वजह क्या है। अभ्यर्थी खुद लगा रहे कटऑफ का अनुमान
आयोग ने सफल अभ्यर्थियों की सूची तो जारी कर दी, लेकिन किसी भी श्रेणी का कटऑफ नहीं बताया। इससे अभ्यर्थी अपने स्तर पर संभावित कटऑफ का अनुमान लगा रहे हैं। अभिनव, अरविंद, संजय समेत अन्य अभ्यर्थियों का दावा है कि सामान्य वर्ग का कटऑफ करीब 288 अंक तक पहुंच सकता है। यदि ऐसा होता है तो अब तक का सबसे ऊंचा कटऑफ होगा। पिछली बार सामान्य का कटऑफ 246 था
पिछली बार रिजल्ट के साथ कटऑफ भी जारी किया गया था। उस समय अनारक्षित, पिछड़ा वर्ग-1, पिछड़ा वर्ग-2 और ईडब्ल्यूएस का कटऑफ 246 अंक था, जबकि एससी और एसटी का 236 अंक था। इस बार कटऑफ नहीं आने से पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सदस्यों के हस्ताक्षर के बिना रिजल्ट आया
परिणाम जारी होने के पहले आयोग के तीन सदस्यों ने चयन प्रक्रिया और आपत्तियां जताते हुए रिजल्ट पर हस्ताक्षर करने से साफ मना कर दिया था। इसके बावजूद जेपीएससी ने उनकी नाराजगी को दरकिनार करते हुए गुरुवार आधी रात को रिजल्ट जारी किया कर दिया। यह वही परीक्षा है, जो मॉडल आंसर-की में त्रुटि व अभ्यर्थियों की आपत्तियों को लेकर सुर्खियों में रहा था।

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