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अब ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी की मूल प्रतियों से होगा मिलान झारखंड लोकसेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) में गड़बड़ी की जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। सीआईडी ने इस परीक्षा में उत्तीर्ण सभी 2204 अभ्यर्थियों से ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी मांगी थी। अब तक 1000 अभ्यर्थियों ने वॉट्सएप और ईमेल पर यह कॉपी सीआईडी को उपलब्ध करा दी है। यह कॉपी पांच अगस्त तक मांगी गई है। अब सीआईडी अभ्यर्थियों द्वारा भेजी गई ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी का मूल प्रतियों से मिलान करेगी। जिस पर गड़बड़ी का संदेह होगा, उसकी गहन पड़ताल और फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी। जो अभ्यर्थी निर्धारित अवधि में कॉपी उपलब्ध नहीं कराएंगे, वे संदेह के घेरे में आएंगे और उन्हें नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया जा सकता है। राज्य सरकार के निर्देश पर दर्ज सीआईडी थाना कांड संख्या 16/2026 में डेटा टेंपरिंग, ओएमआर शीट में हेराफेरी, अयोग्य उम्मीदवारों को पास कराने और इसकी एवज में कथित वित्तीय लेनदेन के गंभीर आरोपों की जांच चल रही है। सीआईडी इस मामले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। एजेंसी के तीन कर्मियों को पूछताछ के बाद भेजा गया जेल सीआईडी ने परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के तीन कर्मियों हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार को 5 दिन की रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की। इसके बाद इन्हें वापस जेल भेज दिया गया। इन तीनों कर्मियों को 28 जुलाई को रिमांड पर लिया गया था। सीआईडी के सूत्रों के अनुसार ओएमआर शीट के फॉरेंसिक मिलान और पूर्व अध्यक्ष व एजेंसी कर्मियों से हुई पूछताछ के बाद इस रैकेट में शामिल कुछ अन्य बड़े नामों और अभ्यर्थियों पर शिकंजा कसना तय है। अब तक जेल जा चुके 11 आरोपी इस पूरे फर्जीवाड़े में सीआईडी ने अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी, तकनीकी प्रोग्रामर मो. उस्मान व मो. एबाद, तीन कर्मचारी हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह व संजय कुमार और जेपीएससी के कर्मचारी सोनू कुमार, उसके सहयोगी अरविंद कुमार और गलत तरीके से चयनित सुमन सौरभ शामिल हैं। सीआईडी जांच के बीच आयोग के प्रशासनिक फैसलों पर भी सवाल जेपीएससी में नया विवाद…जिन अधिकारियों ने किया मनमानी का विरोध, उनकी हो गई छुट्टी भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर जेपीएससी विवादों में है। सीआईडी जांच चल रही है। 11 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। जेपीएससी के चेयरमैन इस्तीफा दे चुके हैं। इस बीच एक नया खुलासा हुआ है, जिसने आयोग के प्रशासनिक फैसलों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक जेपीएससी में लंबे समय से गड़बड़ी चल रही थी। दो परीक्षा नियंत्रक लोकेश मिश्रा और असीम किस्पोट्टा ने परीक्षा एजेंसी की गड़बड़ियों की शिकायत की। मनमाने तरीके से हो रहे काम का विरोध किया। फिर दोनों लंबी छुट्टी पर चले गए। इस शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय आयोग ने दोनों का तबादला कर दिया। यही नहीं, नियमित परीक्षा नियंत्रक की जगह उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता को परीक्षा नियंत्रक का काम सौंप दिया। सूत्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पहले से विवादों में थी, तो नियमित परीक्षा नियंत्रक की अनुपस्थिति में संवेदनशील जिम्मेदारियों किस व्यवस्था के तहत उप नियंत्रक को सौंपी गई। अगर परीक्षा नियंत्रक ने वास्तव में किसी प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थी तो उनकी आपत्तियां क्या थीं। उन आपत्तियों पर क्या फैसला लिया गया। क्या उन आपत्तियों को रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था। चूंकि आयोग पहले ही सीआईडी जांच के दायरे में है और कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, इसलिए अब आयोग के भीतर लिए गए हर प्रशासनिक निर्णय की भी पड़ताल की मांग उठने लगी है। उठ रहे अहम सवाल…
दोनों परीक्षा नियंत्रकों ने किन कार्यों पर आपत्ति जताई थी?
क्या उनकी आपत्तियों का कोई लिखित रिकॉर्ड मौजूद है?
नियमित परीक्षा नियंत्रक नहीं रहने के दौरान डिप्टी परीक्षा नियंत्रक को किस आदेश के तहत पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई?


