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- PESA: 19 Departments Haven’t Issued SOPs Even After Three Months, Leaving The Dream Of Local Self governance Unfulfilled.
रांची21 घंटे पहले
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झारखंड में आदिवासियों को जल-जंगल और जमीन का मालिकाना हक देने के लिए दो जनवरी को पेसा नियमावली लागू कर दी गई। लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण यह फाइलों में फंस कर रह गई है।
पंचायती राज विभाग ने मार्च 2026 में ही 19 प्रमुख विभागों को पत्र लिखकर पेसा के अनुरूप नियमों में संशोधन करने और एक महीने के भीतर एसओपी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। साथ ही पेसा के अनुपालन के लिए जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश देने को कहा गया था। लेकिन अब तक एक भी विभाग ने अपनी एसओपी नहीं दी। इससे नियमावली लागू होने के पांच माह बाद भी आदिवासियों का यह स्वशासन वाला सपना जमीन पर पूरी तरह नहीं उतर सका है।
गौरतलब है कि पांचवीं अनुसूची के तहत 13 जिले पूर्ण रूप से अनुसूचित क्षेत्र घोषित है। वहीं तीन अन्य जिले के कुछ इलाके भी इसके दायरे में आते हैं। -शेष पेज 7 पर
अधिकारियों-कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने की जरूरत
पेसा कानून को समझने के लिए सभी विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने की जरूरत है। ट्रेनिंग के लिए वर्कशॉप चलाया जा रहा है, लेकिन वे समझा नहीं पा रहे हैं। इसके लिए बेहतर मास्टर ट्रेनर चुनना होगा, ताकि सही ढंग से ट्रेनिंग दी जा सके। सहायक सचिव का चुनाव ग्राम सभा के माध्यम से किया जाना था। लेकिन कई मामलों में ऐसा नहीं हुआ है। ग्राम सभा कोष के लिए भी कई स्थानों पर पंचायत स्तर से नाम भेज दिया गया है।
डीसी के स्तर पर भी लापरवाही : अनुसूचित क्षेत्रों में तीन माह में बनानी थी कमेटी, अब तक नहीं बनाई
पेसा नियमावली लागू होने के बाद अनुसूचित क्षेत्र के सभी डीसी को प्रखंड स्तर पर कमेटी बनानी थी। इस कमेटी को हर गांव में जाना था। ग्राम सभा के लिए सहायक सचिव का चुनाव कराना था। ग्राम सभा का सचिवालय तय करना था। जो टोला ग्राम सभा चाहते हैं, उनका सीमांकन करना था। लेकिन अधिकतर जिलों के डीसी ने अब तक कमेटी का गठन नहीं किया है।
निशा उरांवपूर्व पंचायत निदेशक, झारखंड
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