बिहार के नगर निकाय कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 30 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। कर्मचारी संघ, नगर परिषद बोधगया (एआईटीयूसी) ने इस राज्यव्यापी आंदोलन का समर्थन करते हुए मंगलवार को नगर परिषद प्रशासन को इसकी आधिकारिक सूचना सौंप दी है। कर्मचारियों ने कार्यपालक पदाधिकारी से अपनी सालों से लंबित मांगों को तुरंत पूरा करने की मांग की है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और संबंधित विभाग 29 जुलाई तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लेते हैं, तो पूरे बिहार के नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के कर्मचारी हड़ताल में शामिल हो जाएंगे। कर्मचारी संघ के अध्यक्ष संजीत सिंह ने बताया कि बोधगया नगर परिषद में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी, संविदा और अन्य अस्थायी कर्मचारी लंबे समय से सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण और अन्य सुविधाओं से वंचित हैं। इन कर्मचारियों की मांगें कई बार प्रशासन और सरकार के समक्ष उठाई गई हैं, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई है। इस उपेक्षा के कारण कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। कर्मचारियों की सेवा स्थायी करने की मांग संघ ने अपने आठ सूत्री मांग पत्र में प्रमुख रूप से नियमित काम करने वाले कर्मचारियों की सेवा स्थायी करने, पूर्व में हुए समझौतों और विभागीय पत्रों का अनुपालन सुनिश्चित करने, केंद्र सरकार की ओर से घोषित 783 रुपये रोजाना की दैनिक मजदूरी लागू करने, पूर्व समझौते के अनुसार ठंडा और गर्म वर्दी की राशि का भुगतान करने, पीएफ में की गई कटौती का पूरा हिसाब देने, सभी कर्मचारियों को ईएसआई का लाभ उपलब्ध कराने, स्थायी कर्मचारियों की तरह आकस्मिक और उपार्जित अवकाश की सुविधा देने व एनजीओ कर्मियों को नगर परिषद कर्मी का दर्जा प्रदान करने की मांग की है। इस बीच, बिहार लोकल बॉडीज इम्प्लाइज फेडरेशन और बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ (एक्टू) के संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने भी राज्य सरकार को पत्र भेजकर तीन प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन की घोषणा की है। 30 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होगा आंदोलन की रूपरेखा के अनुसार हड़ताल से पहले विभिन्न चरणों में प्रदर्शन, आमसभा, मशाल जुलूस और जनसंपर्क अभियान चलाए जाएंगे। इसके बाद 30 जुलाई से पूरे राज्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होगी। हड़ताल के दौरान कर्मचारी अपने-अपने निकाय मुख्यालयों, जिला एवं प्रमंडलीय स्तर पर धरना-प्रदर्शन और जनजागरण कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे सरकार के साथ सकारात्मक वार्ता के पक्षधर हैं, लेकिन यदि निर्धारित समय सीमा तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हड़ताल की स्थिति में नगर निकायों की सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, जल निकासी, राजस्व वसूली सहित कई आवश्यक नागरिक सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार और संबंधित विभाग की होगी।
