
जरूरी बातें
मिथिलेश झा
FIFA World Cup 2026 Heat Wave: फीफा वर्ल्ड कप 2026 का नॉकआउट स्टेज में पर्यावरणीय संकट (Climate Crisis) दिखने लगा है. अमेरिका के फोर्थ ऑफ जुलाई (4th of July) वीकेंड से ठीक पहले नॉर्थ अमेरिका के पूर्वी तट (East Coast) पर एक भयानक हीट डोम (Heat Dome) सेटल हो गया. हैरान करने वाली बात यह है कि यह जानलेवा हीटवेव ठीक उन शहरों और स्टेडियमों के ऊपर है, जहां वर्ल्ड कप के महामुकाबले खेले जा रहे हैं और यहां का तापमान सामान्य से काफी अधिक है. इससे खिलाड़ियों और प्रशंसकों की सेहत पर खतरा मंडराने लगा है.
4 जुलाई को सामान्य से 9.6 डिग्री अधिक रहेगा तापमान
जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी 5 गुना बढ़ गयी है. बिना एसी वाले स्टेडियमों में खिलाड़ियों और फैंस की सेहत खतरे में है. 2 और 3 जुलाई को स्टेडियम में उमस भरी गर्मी क्रमश: 7 और 10 गुणा अधिक रही. 4 जुलाई के मैच में भी तापमान सामान्य से 9.6 डिग्री फारेनहाइट अधिक रहने का अनुमान है. फीफा वर्ल्ड कप 2026 के अब तक 25 मैच ऐसे दिनों में हुए, जब वेट-बल्ब टेम्परेचर बहुत अधिक था. मैक्सिको बनाम इक्वाडोर और फ्रांस बनाम इराक मैच को खराब मौसम (तूफान और बिजली) की वजह बीच में रोकना पड़ा था.
खिलाड़ियों और फैंस की सेहत पर छिड़ी बहस
क्लाइमेट सेंट्रल (Climate Central) के विश्लेषण से पता चला है कि यह मौजूदा हीटवेव सामान्य से कई गुणा अधिक खतरनाक है. ग्लोबल वार्मिंग यानी जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण इसके चरम पर पहुंचने की संभावना 5 गुणा अधिक हो गयी है. इसने अब खेल के भविष्य, खिलाड़ियों की सुरक्षा और लाखों फैंस की सेहत को लेकर वैश्विक स्तर पर बहस छेड़ दी है.
इसे भी पढ़ें : पृथ्वी के विनाश का कारण बन रही अमेरिकी सेना, 140 देशों से ज्यादा प्रदूषण फैलाता है पेंटागन : डॉक्युमेंट्री
एसी बनाम नॉन-एसी’: किस्मत के खेल से प्रदर्शन पर असर
नॉकआउट स्टेज में वेन्यू अलॉटमेंट (मैच के मैदान का निर्धारण) अब टीमों की किस्मत तय कर रहा है. दरअसल, अमेरिका और कनाडा के कई बड़े स्टेडियमों में एयर कंडीशनिंग (AC) की व्यवस्था नहीं है. ऐसे में भीषण गर्मी और उमस के कारण खिलाड़ियों पर शारीरिक बोझ असमान रूप से बढ़ गया है, जो अगले दौर के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है.
1. नो-एसी स्टेडियम (हाई रिस्क)
न्यूयॉर्क का मेटलाइफ स्टेडियम (न्यू जर्सी), मियामी, फिलाडेल्फिया और टोरंटो. यहां खेलने वाली टीमों को भयानक परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है.
2. एसी स्टेडियम (सेफ जोन)
ह्यूस्टन, डलास और अटलांटा. इन स्टेडियमों में इनडोर क्लाइमेट कंट्रोल होने के कारण खिलाड़ी सुरक्षित हैं. उन्हें अनुचित शारीरिक लाभ (Advantage) मिल रहा है.
इसे भी पढ़ें : जलवायु परिवर्तन से लड़ने पर खर्च होगा बंगाल बजट का 69 प्रतिशत पैसा, सुंदरवन और सौर ऊर्जा पर बड़ा ऐलान
इस सप्ताह के मैच और मौसम पर एक नजर
- 2 जुलाई को टोरंटो में खेले गये पुर्तगाल बनाम क्रोएशिया मैच के दौरान तापमान 92.8 डिग्री फारेनहाइट (33.8 डिग्री सेंटीग्रेड) रहा, जो सामान्य से 15.6 डिग्री फारेनहाइट अधिक है. क्लाइमेट चेंज के कारण यह उमस भरी गर्मी 7 गुणा अधिक हो गयी.
- 3 जुलाई को मियामी में अर्जेंटीना बनाम केप वर्डे के मैच में तापमान 86.6 डिग्री फारेनहाइट (30.3 डिग्री सेंटीग्रेड) रहा, जहां उमस भरी गर्मी जलवायु परिवर्तन के कारण 10 गुणा अधिक बढ़ गयी.
- 4 जुलाई को फिलाडेल्फिया में पराग्वे बनाम फ्रांस का मैच खेला जायेगा. अनुमान है कि यहां का तापमान 96.3 डिग्री फारेनहाइट यानी 35.7 डिग्री सेंटीग्रेड रहेगा, जो सामान्य से 9.6 डिग्री फारेनहाइट ज्यादा है.
इसे भी पढ़ें : 2030 तक 100% EV पार्ट्स बनाने लगेगा भारत, चुंबक और चिप के लिए चीन-ताइवान का ही सहारा
FIFA World Cup 2026 Heat Wave: इंग्लैंड और मैक्सिको को मिली राहत
इंग्लैंड और मैक्सिको को इस मामले में राहत मिली है, क्योंकि उनके मैच मैक्सिको सिटी की ठंडी शाम में होंगे. स्विट्जरलैंड, अल्जीरिया, कोलंबिया और घाना जैसी टीमों को वैंकूवर के समशीतोष्ण (ठंडे) माहौल का फायदा मिलेगा.
विशेषज्ञ की चेतावनी – सिर्फ तापमान देखना बेवकूफी
यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के ‘हीट एंड हेल्थ रिसर्च सेंटर’ के डायरेक्टर प्रोफेसर ओली जे ने कहा कि लोग सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि वे केवल हवा के तापमान पर ध्यान देते हैं. इसे छांव में मापा जाता है. एलीट फुटबॉलर सीधे धूप की गर्मी में दौड़ रहे होते हैं और अत्यधिक कसरत से उनके शरीर के अंदर भी भारी गर्मी पैदा होती है. ऐसे में ‘हीट इंडेक्स’ जैसे पैमाने भी खिलाड़ियों के वास्तविक तनाव को मापने में फेल हो रहे हैं, क्योंकि वे सीधे धूप में खेल रहे एथलीटों के लिए नहीं बने हैं.
इसे भी पढ़ें : क्लाइमेट चेंज से रोटी पर संकट, रात की गर्मी से खतरे में खाद्य सुरक्षा
स्टेडियम के बाहर फैंस असुरक्षित, ग्रुप स्टेज में बिगड़ी थी सैकड़ों की तबीयत
‘द नेचर कंजर्वेंसी’ के हीट एक्सपर्ट डॉ ल्यूक पार्सन्स के मुताबिक, ह्यूस्टन, डलास और मियामी में ‘वेट बल्ब ग्लोब टेम्परेचर’ (Wet Bulb Globe Temperature) उस खतरनाक स्तर को पार कर रहा है, जहां मानव शरीर का कूलिंग सिस्टम (पसीना सूखना) काम करना बंद कर देता है.
स्टेडियम के अंदर एसी भले ही खिलाड़ियों को बचा ले, लेकिन बाहर कतारों में खड़े, ट्रैवल करने वाले और टेलगेटिंग (पार्किंग में पार्टी) करने वाले फैंस सीधे तौर पर भीषण लू का शिकार हो रहे हैं. ग्रुप स्टेज के दौरान ही अकेले ह्यूस्टन और मियामी में सैकड़ों फैंस को हीट स्ट्रोक और गर्मी से जुड़ी बीमारियों के चलते अस्पताल ले जाना पड़ा था, जिसके कारण टोरंटो, ह्यूस्टन और अटलांटा में ‘फैन फेस्टिवल्स’ को रद्द करना पड़ा.
कलाइमेट चेंज ने खेल के नियमों को बदला : डॉ फ्रेडी ओटो
‘वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन’ की डॉ फ्रेडी ओटो ने साफ शब्दों में कहा- हम बेहद भरोसे के साथ कह सकते हैं कि आज होने वाली हर हीटवेव जलवायु परिवर्तन के कारण अधिक तीव्र और जानलेवा है. क्लाइमेट चेंज ने खेल के नियमों को पूरी तरह बदल दिया है.

