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झारखंड में फॉरेंसिक उपकरणों की खरीद में कीमतों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिन उपकरणों को अन्य राज्यों ने 6 करोड़ 47 लाख 37 हजार 256 रुपए में खरीदा, वही उपकरण राज्य सरकार 8 करोड़ 95 लाख 86 हजार 316 रुपए में खरीद रही है। इसके लिए अलग-अलग कंपनियों को वर्क ऑर्डर दिए गए हैं भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि वित्त वर्ष 2025-26 में जेम पोर्टल के जरिए राज्य सरकार ने डिजिटल फॉरेंसिक प्लेटफॉर्म सॉफ्टवेयर-ऑक्सीजन फॉरेंसिक डिटेक्टिव, मोबाइल फोन और अन्य फॉरेंसिक सॉफ्टवेयर समेत कुल नौ उपकरणों की खरीद के ऑर्डर दिए हैं। इन्हीं उपकरणों को अन्य राज्यों ने उन्हीं कंपनियों से कई मामलों में चार गुना तक कम कीमत पर खरीदा है। वित्त वर्ष 2025-26 में इन नौ उपकरणों की खरीद के लिए कुल 10 करोड़ 3 लाख 69 हजार 66 रुपए के वर्क ऑर्डर जारी किए गए हैं। सबसे बड़ा अंतर डिजिटल फॉरेंसिक प्लेटफॉर्म सॉफ्टवेयर-ऑक्सीजन फॉरेंसिक डिटेक्टिव की खरीद में देखने को मिला। झारखंड एफएसएल इसे 74 लाख 89 हजार रुपए में खरीद रहा है। जबकि नई दिल्ली एफएसएल ने यही या समान श्रेणी का उपकरण 19 लाख 9 हजार 424 रुपए में खरीदा। यानी झारखंड में यह उपकरण लगभग 229% अधिक कीमत पर खरीदा जा रहा है। –
अनियमितता की शिकायत; तीन सदस्यीय समिति की जांच शुरू, बिना योग्यता के बना दिया साइबर सेक्शन का रिपोर्टिंग इंचार्ज
एफएसएल में उपकरण खरीद में गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद गृह विभाग ने जांच शुरू कर दी है। इसके लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। समिति में अपर सचिव अनिल कुमार तिर्की को अध्यक्ष बनाया गया है। संयुक्त सचिव मनीषा जोसेफ तिग्गा और ओम प्रकाश तिवारी को सदस्य नियुक्त किया गया है। समिति जांच में जुटी है। हालांकि, जांच समिति के गठन के साथ ही प्रक्रिया को लेकर भी उठने लगे हैं। एक्सप्लोसिव विभाग में सहायक निदेशक विवेक कुमार सिंह को साइबर सेक्शन का रिपोर्टिंग ऑफिसर नियुक्त कर दिया गया है। आरोप है कि उनके पास साइबर फॉरेंसिक, साइबर इन्वेस्टिगेशन या डिजिटल एविडेंस एनालिसिस से संबंधित न तो आवश्यक शैक्षणिक योग्यता है और न ही अनुभव। पहले उन्हें साइबर सेक्शन का इंचार्ज बनाया गया और उसी दिन विभागीय आदेश संख्या-733 जारी कर उन्हें साइबर संबंधित उपकरणों की खरीद समिति में भी शामिल कर लिया गया। इस आरोप पर विवेक कुमार सिंह ने कहा कि पद रिक्त होने के कारण तत्काल कोई उपयुक्त विकल्प उपलब्ध नहीं था, इसलिए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। खामी पाई गई तो समीक्षा होगी
टेंडर समिति की अनुशंसा से खरीद होती है। जिन उपकरणों के मूल्य ज्यादा हैं, उसको लेकर आपूर्तिकर्ता से तर्कसंगत जवाब मांगा जाता है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही खरीद की जाती है। अगर खामी पाई गई तो समीक्षा होगी। -विवेक कुमार सिंह, असिस्टेंट डायरेक्टर, एफएसएल, रांची कोई शिकायत नहीं मिली है
खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर मेरे संज्ञान में मामला आएगा तो जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। – हिमांशु मोहन, प्रभारी निदेशक, एफएसएल, झारखंड
6.5 करोड़ के फॉरेंसिक उपकरण 9 करोड़ रुपए में खरीदे:दिल्ली ने जिस फॉरेंसिक डिटेक्टिव उपकरण को 19 लाख में खरीदा, झारखंड 74.89 लाख में खरीद रहा
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