Tuesday, May 12, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

75 साल की तपस्या : श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों से शुभेंदु अधिकारी के राजतिलक तक, जानें कैसे संघ ने खामोशी से बदल दी बंगाल की सत्ता

75 साल की तपस्या : श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों से शुभेंदु अधिकारी के राजतिलक तक, जानें कैसे संघ ने खामोशी से बदल दी बंगाल की सत्ता

RSS impact on West Bengal Election 2026: रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर जब शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, तो यह केवल एक चुनावी जीत नहीं थी. यह उस लंबी यात्रा का शिखर था, जिसकी नींव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने दशकों पहले बंगाल की मिट्टी में रखी थी.

4 फीसदी से 45.8 फीसदी वोट शेयर और सत्ता का शिखर

वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजे बंगाल की राजनीति में एक बड़ा मोड़ हैं. एक समय भाजपा महज 4 फीसदी वोटों पर सिमटी थी. उसी भाजपा ने 45.8 प्रतिशत वोट शेयर के साथ सत्ता के शिखर को छुआ है. यह बदलाव रातोंरात नहीं आया. इसके पीछे संघ के जमीनी नेटवर्क और ‘साइलेंट’ काम करने की एक लंबी दास्तान है.

विभाजन के जख्मों से शुरू हुआ सफर

बंगाल में संघ की मौजूदगी चुनावी राजनीति से बहुत पुरानी है. भारत विभाजन के बाद जब पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से हिंदू शरणार्थी सीमावर्ती जिलों में आये, तब संघ ने राहत कार्यों के जरिये उनके बीच पैठ बनायी. पहचान, विस्थापन और सामुदायिक जुड़ाव के उन्हीं पुराने संपर्कों ने बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा के लिए मजबूत वोट बैंक का काम किया.

इसे भी पढ़ें : 40 साल का संघर्ष और आंखों में खुशी के आंसू, भाजपा की जीत पर क्या बोलीं माखनलाल सरकार की पत्नी

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विरासत

1951 में भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी को संघ ने एक बंगाली और राष्ट्रीय नायक दोनों के रूप में पेश किया. इससे भाजपा को ‘बाहरी पार्टी’ के ठप्पे से मुक्ति मिली और उसे स्थानीय स्वीकार्यता हासिल हुई.

बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

वामपंथी दुर्ग में ऐसे बनायी जगह

1977 से 2011 तक बंगाल की राजनीति वर्ग-संघर्ष (Class Struggle) के इर्द-गिर्द घूमती थी, जहां पहचान की राजनीति के लिए जगह कम थी. वर्ष 2011 में भाजपा का वोट शेयर मात्र 4.06 प्रतिशत और 2016 में 10.16 प्रतिशत था. लेकिन वामपंथ के पतन के बाद जो खाली जगह बनी, उसे संघ ने खामोशी से भरना शुरू किया.

इसे भी पढ़ें : कौन हैं नंदीग्राम के ‘जायंट किलर’ शुभेंदु अधिकारी, जिन्होंने ममता बनर्जी को 2 बार हराया और ढाह दिया टीएमसी का अभेद्य किला

गांव-गांव में बूथ स्तर पर शुरू किया काम

उत्तर बंगाल से लेकर पश्चिमी औद्योगिक बेल्ट तक, संघ के प्रचारकों ने बूथ स्तर पर काम किया. असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को साथ जोड़ा और स्थानीय प्रभावशाली लोगों के जरिये अपनी विचारधारा को घर-घर पहुंचाया. संघ ने अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए बंगाली भाषा, सांस्कृतिक प्रतीकों और क्षेत्रीय संदर्भों का सहारा लिया, जिससे भाजपा को लेकर आम बंगाली की धारणा बदली.

इसे भी पढ़ें : कौन हैं बंगाल में ‘कमल’ खिलाने वाले रणनीतिकार भूपेंद्र यादव, नबान्न की नींव हिलाने का तैयार किया गुप्त ब्लूप्रिंट

RSS impact on West Bengal Election 2026: ‘दीदी’ के गढ़ में कर दिया बड़ा उलटफेर

बंगाल चुनाव 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की रैलियों ने संघ की जमीन को और उपजाऊ बनाया.

  • मतुआ और महिला कार्ड : नागरिकता (CAA), सीमा सुरक्षा और भ्रष्टाचार के मुद्दों के साथ-साथ भाजपा ने मतुआ समुदाय, महिलाओं की सुरक्षा और बेरोजगारी को प्रमुख हथियार बनाया.
  • टीएमसी के वोट घटे, भाजपा के बढ़े : टीएमसी का वोट शेयर गिरकर 40.8 प्रतिशत पर आ गया, जबकि भाजपा का बढ़कर 45.8 प्रतिशत तक पहुंच गया. यह इस बात का सबूत है कि संघ समर्थित इकोसिस्टम अब बंगाल में पूरी तरह परिपक्व हो चुका है.

इसे भी पढ़ें : सुनील बंसल, जिसने ओडिशा से बंगाल तक बनवा दी बीजेपी सरकार, पढ़ें मोदी-शाह के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार की पूरी कहानी

हजारों स्वयंसेवकों ने बिना शोर-शराबे के बंगाल में किया काम

आज जब शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हैं, तो यह उन हजारों स्वयंसेवकों की जीत है, जिन्होंने दशकों तक बिना किसी शोर-शराबे के बंगाल के गांवों में शाखाएं लगायीं और ‘सोनार बांग्ला’ के विचार को जीवित रखा.

इसे भी पढ़ें

कोलकाता में 207 कमल फूल से हुआ शुभेंदु अधिकारी का महा-स्वागत, सीएम बोले- मोदी मंत्र पर चलेगी बंगाल सरकार

सत्ता के शिखर पर तो पहुंच गये शुभेंदु अधिकारी, क्या बन पायेंगे ज्योति बसु और ममता बनर्जी जैसे जननायक?

बंगाल में घुसपैठ के डर ने सीमावर्ती गांवों में भाजपा के पक्ष में हुई राजनीतिक ‘घेराबंदी’, जानें इनसाइड स्टोरी

बंगाल के इतिहास में पहली बार कोई मुस्लिम मंत्री नहीं, ममता बनर्जी सरकार में थे 7

The post 75 साल की तपस्या : श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों से शुभेंदु अधिकारी के राजतिलक तक, जानें कैसे संघ ने खामोशी से बदल दी बंगाल की सत्ता appeared first on Prabhat Khabar.

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles