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बिहारशरीफ नगर निगम की टीम जिस तरह अतिक्रमण हटाने के नाम पर ‘पिक एंड चूज’ की नीति अपनाती है, ठीक वही ‘डबल स्टैंडर्ड’ अब शहर की साफ-सफाई में भी खुलकर सामने आ गया है। 78 करोड़ रुपए की लागत से बने शहर के पहले फ्लाईओवर की हालत नगर निगम की कार्यशैली की पोल खोलने के लिए काफी है। निगम के अधिकारी चंद तस्वीरें खिंचवाकर सफाई का झूठा ढिंढोरा पीट रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत में फ्लाईओवर अब भी कचरे, बालू और कीचड़ का केंद्र बना हुआ है। नगर निगम ने मंगलवार को दावा किया कि फ्लाईओवर की पूरी सफाई करा दी गई है। इसे साबित करने के लिए अधिकारियों ने एकाध ईंटें हटाते हुए फोटो भी शेयर किए, लेकिन मौके का मुआयना करने पर निगम के दावों की हवा निकल गई। फ्लाईओवर पर आज भी दूर-दूर तक बालू की परतें, गिट्टी, रोड़े और बजरी के ढेर लगे हुए हैं। सफाई का स्तर बिल्कुल शून्य है। अधिकारियों ने सिर्फ कैमरे के सामने अपनी पीठ थपथपाने के लिए खानापूर्ति की और फ्लाईओवर को उसी बदहाल स्थिति में छोड़ दिया। चोक हुईं नालियां, बारिश में जलमग्न रहता है फ्लाईओवर फ्लाईओवर पर पसरी इसी बालू और गिट्टी के कारण सबसे बड़ा संकट जल निकासी का खड़ा हो गया है। ड्रेनेज सिस्टम और नालियां पूरी तरह से चोक हो चुकी हैं। इसका सीधा नतीजा यह हो रहा है कि हल्की बारिश होने पर भी करोड़ों की लागत से बना यह स्ट्रक्चर घंटों तक पानी में डूबा रहता है। वर्तमान में भी बारिश खत्म होने के बाद फ्लाईओवर के कई हिस्सों में पानी जमा है। यह जलजमाव न केवल हादसों को न्योता दे रहा है, बल्कि इस नवनिर्मित पुल की मजबूती को भी खोखला कर रहा है। अतिक्रमण अभियान जैसी ही है सफाई की हकीकत फ्लाईओवर की यह बदहाली नगर निगम के उसी ‘दोहरे रवैये’ का सीधा सुबूत है जो अतिक्रमण हटाओ अभियान में दिखता है। जिस तरह अतिक्रमण हटाने के वक्त निगम के अधिकारी केवल आसान जगहें चुनते हैं और शहर के सबसे भीड़भाड़ वाले व्यस्ततम इलाकों (जहां फल-सब्जी और ठेले-खोमचे वाले बीच सड़क पर 12 महीने अवैध कब्जा जमाए रहते हैं) उस पर कार्रवाई करने से बचते हैं, ठीक वैसा ही हाल सफाई व्यवस्था का है। जहां असल में पसीने बहाकर सफाई करने की दरकार है, वहां निगम के हाथ-पांव फूल जाते हैं, और काम के नाम पर सिर्फ कागजी औपचारिकता पूरी कर ली जाती है।

