किशनगंज में आजादी के 78 साल बाद भी चिल्हनियां पंचायत के वार्ड-9 स्थित मुस्लिम टोला बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर है। गोरिया और रेतुआ नदी से घिरा यह गांव हर बरसात में टापू बन जाता है। गांव तक जाने वाली कच्ची सड़क पूरी तरह जर्जर है। हल्की बारिश में ही सड़क जलमग्न हो जाती है और आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है। चारपाई पर ले जाते-ले जाते चली गई जान सड़क की बदहाली का सबसे दर्दनाक चेहरा पिछले साल बरसात के समय दिखा। ग्रामीण हकमो उद्दीन गंभीर रूप से बीमार पड़े। जलजमाव के कारण गांव तक कोई वाहन नहीं पहुंच सका। मजबूर ग्रामीण उन्हें चारपाई पर लादकर डेढ़ किलोमीटर कीचड़ और पानी पार कर मुख्य सड़क तक ले गए। लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, टेढ़ागाछ पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनकी मौत हो गई। इस घटना ने सिस्टम की पोल खोल दी। शादी-रिश्ते भी आना बंद हो गए पूर्व और दक्षिण में गोरिया नदी, पश्चिम में रेतुआ नदी से घिरे इस गांव में बरसात में निकलना नामुमकिन हो जाता है। बच्चों का स्कूल जाना, मरीजों का इलाज कराना और बुजुर्गों का बाहर निकलना सबसे बड़ी चुनौती है। सड़क-पुल न होने से सामाजिक रिश्ते भी टूट रहे हैं। लोग यहां शादी-ब्याह करने से कतराते हैं। कई परिवारों को बच्चों के रिश्ते तय करने में दिक्कत हो रही है। बादल आलम, इस्लामुद्दीन, नईम अख्तर, राहिल आलम, शिवकुमार मंडल समेत दर्जनों ग्रामीणों का कहना है कि सांसद से लेकर विधायक और डीएम तक कई बार गुहार लगा चुके हैं। हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, काम एक भी नहीं हुआ। ग्रामीणों ने डीएम से तुरंत पक्की सड़क और गोरिया नदी पर आरसीसी पुल बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क-पुल बनने से ही शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के रास्ते खुलेंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे। मुस्लिम टोला के लोग आज भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का इंतजार कर रहे हैं।
78 साल बाद भी मुस्लिम टोला में सड़क नहीं:किशनगंज में ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी,डीएम से पुल बनाने की मांग की
किशनगंज में आजादी के 78 साल बाद भी चिल्हनियां पंचायत के वार्ड-9 स्थित मुस्लिम टोला बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर है। गोरिया और रेतुआ नदी से घिरा यह गांव हर बरसात में टापू बन जाता है। गांव तक जाने वाली कच्ची सड़क पूरी तरह जर्जर है। हल्की बारिश में ही सड़क जलमग्न हो जाती है और आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है। चारपाई पर ले जाते-ले जाते चली गई जान सड़क की बदहाली का सबसे दर्दनाक चेहरा पिछले साल बरसात के समय दिखा। ग्रामीण हकमो उद्दीन गंभीर रूप से बीमार पड़े। जलजमाव के कारण गांव तक कोई वाहन नहीं पहुंच सका। मजबूर ग्रामीण उन्हें चारपाई पर लादकर डेढ़ किलोमीटर कीचड़ और पानी पार कर मुख्य सड़क तक ले गए। लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, टेढ़ागाछ पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनकी मौत हो गई। इस घटना ने सिस्टम की पोल खोल दी। शादी-रिश्ते भी आना बंद हो गए पूर्व और दक्षिण में गोरिया नदी, पश्चिम में रेतुआ नदी से घिरे इस गांव में बरसात में निकलना नामुमकिन हो जाता है। बच्चों का स्कूल जाना, मरीजों का इलाज कराना और बुजुर्गों का बाहर निकलना सबसे बड़ी चुनौती है। सड़क-पुल न होने से सामाजिक रिश्ते भी टूट रहे हैं। लोग यहां शादी-ब्याह करने से कतराते हैं। कई परिवारों को बच्चों के रिश्ते तय करने में दिक्कत हो रही है। बादल आलम, इस्लामुद्दीन, नईम अख्तर, राहिल आलम, शिवकुमार मंडल समेत दर्जनों ग्रामीणों का कहना है कि सांसद से लेकर विधायक और डीएम तक कई बार गुहार लगा चुके हैं। हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, काम एक भी नहीं हुआ। ग्रामीणों ने डीएम से तुरंत पक्की सड़क और गोरिया नदी पर आरसीसी पुल बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क-पुल बनने से ही शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के रास्ते खुलेंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे। मुस्लिम टोला के लोग आज भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का इंतजार कर रहे हैं।


