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‘डेढ़ साल की बच्ची को मस्कुलर डिस्ट्रॉफी बीमारी है, उसका एकमात्र इलाज 18 करोड़ रुपए का इंजेक्शन है, जो सरकारी डिमांड पर अमेरिका से मंगवाती है। इंजेक्शन लेने के लिए रूही के पास मात्र 8 महीने बचे हैं, अगर 8 महीने के अंदर इंजेक्शन नहीं लेगी तो रूही मर जाएगी।’ बेगूसराय सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कृष्ण कुमार ने दैनिक भास्कर से बातचीत में ये बातें कही है। मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित रूही बेगूसराय के पचंबा गांव के रहने वाले राकेश और अंजली की बेटी है। रूही के पिता राकेश बेंगलुरु में मजदूरी करते हैं, जबकि मां अंजली हाउस वाइफ है। राकेश और अंजली ने बिहार और केंद्र सरकार से गुहार लगाई है कि विदेश में मिलने वाला इंजेक्शन उपलब्ध कराई जाए, ताकि बच्ची की जान बचाई जा सके। मस्कुलर डिस्ट्रॉफी बीमारी क्या है? इसके लक्षण और बचाव के उपाय क्या हैं? बच्ची के माता-पिता और बच्ची का इलाज कर रहे डॉक्टर ने क्या कहा? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले रूही की तीन तस्वीरें देखिए अब रूही की बीमारी के बारे में जानिए राकेश कुमार की शादी 6 साल पहले यानी 2020 में अंजली कुमारी के साथ हुई। तीन साल बाद 2023 में राकेश और अंजली को बेटा पैदा हुआ। घरवाले चाहते थे कि एक बेटी भी घर में आ जाए। 16 महीने पहले अंजली ने एक बेटी को जन्म दिया, जिसका नाम रूही रखा। करीब 10 महीने के बाद रूही के शरीर में कोई एक्टिविटी नहीं दिखी तो राकेश और अंजली को इसको लेकर चिंता सताने लगी। राकेश और अंजली को लगा कि शायद अभी उम्र कम है, इसलिए बच्ची सामान्य बच्चों की तरह हरकत नहीं कर रही है। राकेश बताते हैं कि करीब 6 महीने पहले रूही को अचानक बुखार आया। डॉक्टरों से चेक कराया तो बताया गया कि बच्ची को निमोनिया है। निमोनिया की दवाई कराई, लेकिन बच्ची की सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ। दंपती ने 10 से अधिक हॉस्पिटल में इलाज कराया, लेकिन रूही की हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद बेगूसराय के प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर ने ही बच्ची को पटना रेफर किया। पटना पीएमसीएच में डॉक्टरों ने बच्ची को लाइलाज बीमारी बताई अंजली के मुताबिक, पटना पीएमसीएच में डॉक्टरों ने बच्ची को देखा और बताया कि उसे गंभीर बीमारी है, जिसका कोई इलाज नहीं है। इसलिए आप लोग बच्ची को घर ले जाइए। इसके बाद हम लोग बेटी को लेकर घर आ गए। मैं घर पर बच्ची की देखभाल करने लगी और राकेश काम के सिलसिले में बेंगलुरु चले गए। 20 अप्रैल की रात रूही की तबीयत अचानक खराब हो गई तो मैं उसे लेकर बेगूसराय सदर अस्पताल पहुंची। अस्पताल के पीडियाट्रिक वार्ड में बेटी को एडमिट कराया और डॉक्टर कृष्ण कुमार को सारी बातें बताई। इसके बाद डॉक्टर कृष्ण कुमार ने निमोनिया का इलाज शुरू किया। होस्पिटल में भर्ती होने के दूसरे दिन रूही में कोई सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टर कृष्ण कुमार ने गहनता से जांच शुरू की। टेस्ट करवाया तो पता चला कि रूही को स्पाइनल मस्कुलर डिस्ट्रॉफी नाम की बीमारी है। 10 हजार में एक बच्चे में पाई जाती है मस्कुलर डिस्ट्रॉफी डॉक्टर कृष्ण कुमार बताते हैं कि 10 हजार बच्चों में एक में ये बीमारी होती है। इस बीमारी का एकमात्र इलाज जोन्जेंसमा इंजेक्शन है, जिसकी कीमत 18 करोड़ रुपए है और ये इंजेक्शन अपने देश में उपलब्ध भी नहीं है। भारत सरकार इसे विदेश से 50 प्रतिशत सब्सिडी पर मंगवाती है और बच्चों को दिया जाता है। कृष्ण कुमार ने आगे बताया कि रूही को लेकर उसके परिजन 21 अप्रैल को मेरे पास आए थे। वो काफी कमजोर थी, सांस तेज और घरघराहट थी, निमोनिया का लक्षण दिख रहा था। उसी के आधार पर इलाज शुरू किया। फिजिकल जांच में देखा कि उसके शरीर में कोई जान नहीं है। हाथ-पैर और गर्दन लूज था। बच्ची गर्दन भी सीधा नहीं कर पा रही थी। इन्वेस्टिगेशन में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के बारे में पता चला। डॉक्टर ने बताया कि इंजेक्शन लगाने के लिए अधिकतम उम्र दो साल होती है। 2 साल के उम्र तक ये इंजेक्शन नहीं लगाया गया तो ढाई से 3 साल होते-होते निमोनिया से बच्चे की मौत हो जाएगी। रूही करीब डेढ़ साल की हो चुकी है और इसके पास अब कुछ महीने बचे हैं।
