कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड के किसान सुमन मेहता ने आधुनिक ‘त्रि-स्तरीय खेती’ (थ्री लेयर फार्मिंग) तकनीक अपनाकर सफलता हासिल की है। वे सीमित जमीन से हर साल 8 लाख रुपए सालाना कमा रहे हैं। अब वो क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। सुमन मेहता ने बताया कि पिछले साल सितंबर में वे कृषि विभाग द्वारा आयोजित एक प्रशिक्षण के लिए मध्य प्रदेश स्थित भोपाल गए थे। वहां उन्होंने दो से पांच लेयर तक की खेती देखी। कोडरमा लौटते ही शुरू की खेती
इस तकनीक को देखकर वे काफी प्रभावित हुए और उन्होंने इसे अपने खेतों में अपनाने का फैसला किया। कोडरमा लौटने के बाद उन्होंने अपनी जमीन पर इस खेती की तैयारी शुरू कर दी। सुमन मेहता ने अपनी 1 एकड़ जमीन पर ‘त्रि-स्तरीय खेती’ शुरू की है। इस विधि में, वे खेत की सबसे निचली सतह पर कंद वाली फसलें जैसे अदरक और हल्दी लगाते हैं। जमीन की ऊपरी सतह पर धनिया और पालक जैसी पत्तेदार फसलें उगाई जाती हैं। इसके साथ ही, बीच-बीच में करेला और कुंदरू जैसी बेल वाली सब्जियां लगाई जाती हैं। इसके ऊपर एक मचान बना दिया जाता है। ताकि बेल वाली सब्जियां मचान पर फैले। 3 लाख की लागत, ढाई गुना से अधिक मुनाफा
सुमन मेहता ने बताया कि इस खेती के लिए उन्हें एक भूमि में करीब 3 लाख रुपए की लागत लगी। इसमें खेत की जुताई, मचान बनाने सहित डीप इरीगेशन के साथ साथ बीज बुवाई शामिल है। उन्होंने बताया कि जब फसल तैयार हो जाती हैं तो वे इसे स्थानीय बाजारों में बेचकर लागत से ढाई गुना (करीब 8 लाख रुपए) तक अधिक मुनाफा कमाते हैं।
भीषण गर्मी में पौधों को मिल रहा प्राकृतिक संरक्षण
इस खेती की खासियत यह है कि खेत में बनाए गए मचान नीचे उगाई गई फसलों के लिए प्राकृतिक तापमान नियंत्रक का काम करते हैं। मचान की छाया के कारण मिट्टी की नमी बनी रहती है और तेज धूप का सीधा असर फसलों पर नहीं पड़ता है। इससे पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और झुलसने का खतरा भी कम हो जाता है। सुमन की मां शांति देवी ने बताया कि यह प्रयोग काफी कारगर साबित हो रहा है, इससे उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों को अच्छा मुनाफा मिलने की भी उम्मीद है किसानों को दिखाएंगे सुमन मेहता की थ्री लेयर खेती: कृषि पदाधिकारी कृषि पदाधिकारी सुरेश स्वसी ने कहा कि वे पहले खुद जाकर सुमन मेहता के इस नई तकनीक वाली खेती का जायजा लेंगे। इसके बाद कृषि विभाग द्वारा जिन चीजों की उन्हें जरूरत होगी, उसे सुमन को मुहैया कराया जाएगा। वहीं, उन्होंने कहा कि सुमन द्वारा की जा रही इस खेती को अन्य किसानों को वहां ले जाकर दिखाएंगे ताकि बाकी किसान भी इस प्रकार की खेती कर सकें।
क्या है थ्री-लेयर खेती?
थ्री-लेयर खेती वैज्ञानिक तरीके से कम जगह और कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने की एक बेहतरीन बहु-स्तरीय प्रणाली है। इसमें एक ही समय पर एक ही खेत में तीन अलग-अलग ऊंचाइयों और प्रकृतियों की फसलें उगाई जाती हैं। सुमन मेहता ने अपनी सूझबूझ से इसे अपने खेतों में इस प्रकार लागू किया है: जमीन के नीचे (पहला स्तर): सबसे निचले स्तर पर ऐसी फसलें उगाई जाती हैं जो जमीन के अंदर तैयार होती हैं, जैसे- अदरक, हल्दी या कंदमूल। इन्हें बढ़ने के लिए सीधी धूप की बहुत कम आवश्यकता होती है।
जमीन के ऊपर (दूसरा स्तर): मध्यम ऊंचाई वाली फसलें जैसे पत्तेदार सब्जियां, टमाटर, मिर्च, बैंगन या गोभी, जो जमीन की सतह से कुछ फीट ऊपर तक बढ़ती हैं।
मचान पर (तीसरा स्तर): सबसे ऊपरी स्तर पर बांस और तारों का एक मजबूत मचान (मंडप) तैयार किया जाता है। इस मचान पर लतर (बेल) वाली सब्जियां जैसे- करेला, लौकी, नेनुआ (तोरई), और खीरा उगाई जाती हैं। सुमन मेहता की सफलता का सफर और कमाई का गणित पारंपरिक खेती में जहां किसान साल में सिर्फ एक या दो फसलें ही ले पाते थे और मौसम की मार या बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण अक्सर घाटे में रहते थे। वहीं सुमन मेहता ने लीक से हटकर सोचने का फैसला किया। उन्होंने कृषि विशेषज्ञों की सलाह और अपनी मेहनत के बल पर इस मॉडल को जमीन पर उतारा। लाखों की कमाई का राज
थ्री-लेयर खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसान को साल के बारह महीने किसी न किसी फसल से आमदनी होती रहती है। जब तक ऊपर मचान पर करेला या लौकी फल रही होती है, तब तक नीचे की जमीन से मिर्च या धनिया पत्ती की तुड़ाई हो जाती है, और जमीन के भीतर हल्दी या अदरक पककर तैयार हो रहा होता है। सुमन मेहता की इस त्रिकोणीय व्यवस्था से संसाधनों (पानी, खाद और लेबर) की भारी बचत होती है। एक ही बार दिए गए पानी और जैविक खाद का लाभ तीनों स्तर की फसलों को मिलता है। यही कारण है कि उनकी लागत लगभग आधी हो गई है और मुनाफा कई गुना बढ़कर लाखों में पहुंच गया है।

