गढ़वा| शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली दानरो नदी आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रही है। कभी कलकल बहते स्वच्छ जल से लोगों की प्यास बुझाने वाली यह नदी अब पूरी तरह सूख चुकी है। नदी के तल में पानी की जगह झाड़ियां उग आई हैं और दूर-दूर तक सूखी धरती दिखाई देती है। स्थानीय लोगों के अनुसार दो दशक पहले दानरो नदी सालभर पानी से भरी रहती थी। सुबह-शाम नदी किनारे लोगों की चहल-पहल रहती थी। महिलाएं घरेलू कार्यों के लिए पानी भरती थीं, बच्चे नदी में खेलते थे और पशुओं की प्यास भी यहीं बुझती थी। लेकिन समय के साथ अतिक्रमण, बालू दोहन और घटते जलस्तर ने नदी की पहचान ही बदल दी।
नदी सूखी… भीषण गर्मी के बीच शहर की जीवन रेखा दानरो नदी में उगी झाड़ियां
गढ़वा| शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली दानरो नदी आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रही है। कभी कलकल बहते स्वच्छ जल से लोगों की प्यास बुझाने वाली यह नदी अब पूरी तरह सूख चुकी है। नदी के तल में पानी की जगह झाड़ियां उग आई हैं और दूर-दूर तक सूखी धरती दिखाई देती है। स्थानीय लोगों के अनुसार दो दशक पहले दानरो नदी सालभर पानी से भरी रहती थी। सुबह-शाम नदी किनारे लोगों की चहल-पहल रहती थी। महिलाएं घरेलू कार्यों के लिए पानी भरती थीं, बच्चे नदी में खेलते थे और पशुओं की प्यास भी यहीं बुझती थी। लेकिन समय के साथ अतिक्रमण, बालू दोहन और घटते जलस्तर ने नदी की पहचान ही बदल दी।

