औरंगाबाद में उत्तर कोयल मुख्य नहर में रिमॉडलिंग काम चल रहा है। इसका गुरुवार को केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की टीम ने निरीक्षण किया। जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता संजीव कुमार के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम ने पैकेज संख्या 11 से लेकर पैकेज संख्या तीन तक लगभग 77 किलोमीटर क्षेत्र का जायजा लिया। निरीक्षण दल में केंद्रीय जल आयोग, दिल्ली के डायरेक्टर आनंद कुमार, पटना के डायरेक्टर संदीप कुमार, वाप्कोस के वरीय महाप्रबंधक अमित गुप्ता और प्रोजेक्ट मैनेजर आर.के. सिंह सहित अन्य अधिकारी शामिल थे। उत्तर कोयल मुख्य नहर का रिमॉडलिंग काम लंबे समय से क्षेत्र की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है। नहर के जीरो आरडी से अंतिम छोर तक 11 पैकेजों में निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जिनमें दो पैकेज झारखंड और नौ पैकेज बिहार क्षेत्र में हैं। वर्तमान में पुराने टाइल्स हटाने, गाद सफाई, सीएनएस कार्य और लाइनिंग का काम आधुनिक मशीनों की सहायता से किया जा रहा है। हालांकि खरीफ मौसम को देखते हुए फिलहाल सीएनएस कार्य रोक दिया गया है और लाइनिंग के साथ पुल-पुलियों के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने नहर की लाइनिंग, सीआर और एचआर गेट, वेंट, सीडी संरचनाओं और अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच की। अधिकारियों ने निर्माण एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि कार्य की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। साथ ही खरीफ सीजन के मद्देनजर लंबित मेंटेनेंस काम को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया गया। ध्वस्त हुई लाइनिंग पर उठे सवाल, किसानों ने जताई नाराजगी रिमॉडलिंग काम की लगातार निगरानी के बावजूद निर्माण गुणवत्ता को लेकर किसानों में असंतोष देखा जा रहा है। किसानों का आरोप है कि अंबा डिवीजन क्षेत्र में 151 आरडी से 168 आरडी के बीच बनाई गई लाइनिंग निर्माण के महज दो महीने बाद ही कई स्थानों पर ध्वस्त हो गई। लगभग एक किलोमीटर क्षेत्र में लाइनिंग टूट जाने से जल प्रवाह प्रभावित होने की आशंका उत्पन्न हो गई है।स्थानीय किसान जीतू तिवारी, अजीत कुमार, सुदर्शन पांडेय, प्रमोद मौआर और संजय सिंह ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। किसानों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से चल रही परियोजना में यदि गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया, तो भविष्य में इसका लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाएगा।किसानों ने यह भी कहा कि टूट चुकी लाइनिंग की मरम्मत जल्द नहीं की गई, तो नहर संचालन के दौरान पानी के बहाव में बाधा उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप कर दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। कई महत्वपूर्ण कार्य अब भी अधूरे, अगले महीने नहर संचालन की तैयारी स्थानीय किसानों के अनुसार नहर से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य अब तक अधूरे हैं। मुख्य नहर के 152.4 आरडी पर स्थित एक्वाडक्ट ट्रांजिशन वॉल का निर्माण पूरा नहीं हुआ है, जिससे नहर को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है। इसके अलावा 155.76 आरडी और 168.50 आरडी पर स्थित सीआर और एचआर गेटों का अधिष्ठापन भी लंबित है। 159.30 आरडी पर स्थित एसएलआर ब्रिज का एप्रोच रोड नहीं बनने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। वहीं 169.40 आरडी पर इनलेट प्वाइंट का निर्माण अधूरा रहने के कारण आसपास के क्षेत्रों में जलजमाव की समस्या बनी रहने की आशंका है। किसानों ने पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह से भी इस दिशा में पहल करने की मांग की है।जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता संजीव कुमार ने बताया कि उत्तर कोयल मुख्य नहर का रिमॉडलिंग कार्य लगभग 65 प्रतिशत पूरा हो चुका है। अगले महीने से नहर संचालन शुरू करने की योजना है। उन्होंने कहा कि भीम बराज में जल भंडारण की प्रक्रिया जारी है और जलस्तर 2.3 मीटर पहुंचने पर एक जुलाई से परीक्षण के तौर पर नहर में पानी छोड़ा जाएगा, जिससे खरीफ फसल के लिए सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
एक जुलाई से उत्तर कोयल नहर में छोड़ा जाएगा पानी:केंद्रीय जल आयोग की टीम ने नहर का किया निरीक्षण, समय से पहले काम पूरा करने का निर्देश
औरंगाबाद में उत्तर कोयल मुख्य नहर में रिमॉडलिंग काम चल रहा है। इसका गुरुवार को केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की टीम ने निरीक्षण किया। जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता संजीव कुमार के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम ने पैकेज संख्या 11 से लेकर पैकेज संख्या तीन तक लगभग 77 किलोमीटर क्षेत्र का जायजा लिया। निरीक्षण दल में केंद्रीय जल आयोग, दिल्ली के डायरेक्टर आनंद कुमार, पटना के डायरेक्टर संदीप कुमार, वाप्कोस के वरीय महाप्रबंधक अमित गुप्ता और प्रोजेक्ट मैनेजर आर.के. सिंह सहित अन्य अधिकारी शामिल थे। उत्तर कोयल मुख्य नहर का रिमॉडलिंग काम लंबे समय से क्षेत्र की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है। नहर के जीरो आरडी से अंतिम छोर तक 11 पैकेजों में निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जिनमें दो पैकेज झारखंड और नौ पैकेज बिहार क्षेत्र में हैं। वर्तमान में पुराने टाइल्स हटाने, गाद सफाई, सीएनएस कार्य और लाइनिंग का काम आधुनिक मशीनों की सहायता से किया जा रहा है। हालांकि खरीफ मौसम को देखते हुए फिलहाल सीएनएस कार्य रोक दिया गया है और लाइनिंग के साथ पुल-पुलियों के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने नहर की लाइनिंग, सीआर और एचआर गेट, वेंट, सीडी संरचनाओं और अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच की। अधिकारियों ने निर्माण एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि कार्य की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। साथ ही खरीफ सीजन के मद्देनजर लंबित मेंटेनेंस काम को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया गया। ध्वस्त हुई लाइनिंग पर उठे सवाल, किसानों ने जताई नाराजगी रिमॉडलिंग काम की लगातार निगरानी के बावजूद निर्माण गुणवत्ता को लेकर किसानों में असंतोष देखा जा रहा है। किसानों का आरोप है कि अंबा डिवीजन क्षेत्र में 151 आरडी से 168 आरडी के बीच बनाई गई लाइनिंग निर्माण के महज दो महीने बाद ही कई स्थानों पर ध्वस्त हो गई। लगभग एक किलोमीटर क्षेत्र में लाइनिंग टूट जाने से जल प्रवाह प्रभावित होने की आशंका उत्पन्न हो गई है।स्थानीय किसान जीतू तिवारी, अजीत कुमार, सुदर्शन पांडेय, प्रमोद मौआर और संजय सिंह ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। किसानों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से चल रही परियोजना में यदि गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया, तो भविष्य में इसका लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाएगा।किसानों ने यह भी कहा कि टूट चुकी लाइनिंग की मरम्मत जल्द नहीं की गई, तो नहर संचालन के दौरान पानी के बहाव में बाधा उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप कर दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। कई महत्वपूर्ण कार्य अब भी अधूरे, अगले महीने नहर संचालन की तैयारी स्थानीय किसानों के अनुसार नहर से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य अब तक अधूरे हैं। मुख्य नहर के 152.4 आरडी पर स्थित एक्वाडक्ट ट्रांजिशन वॉल का निर्माण पूरा नहीं हुआ है, जिससे नहर को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है। इसके अलावा 155.76 आरडी और 168.50 आरडी पर स्थित सीआर और एचआर गेटों का अधिष्ठापन भी लंबित है। 159.30 आरडी पर स्थित एसएलआर ब्रिज का एप्रोच रोड नहीं बनने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। वहीं 169.40 आरडी पर इनलेट प्वाइंट का निर्माण अधूरा रहने के कारण आसपास के क्षेत्रों में जलजमाव की समस्या बनी रहने की आशंका है। किसानों ने पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह से भी इस दिशा में पहल करने की मांग की है।जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता संजीव कुमार ने बताया कि उत्तर कोयल मुख्य नहर का रिमॉडलिंग कार्य लगभग 65 प्रतिशत पूरा हो चुका है। अगले महीने से नहर संचालन शुरू करने की योजना है। उन्होंने कहा कि भीम बराज में जल भंडारण की प्रक्रिया जारी है और जलस्तर 2.3 मीटर पहुंचने पर एक जुलाई से परीक्षण के तौर पर नहर में पानी छोड़ा जाएगा, जिससे खरीफ फसल के लिए सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।


