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मांडर में 115 करोड़ रुपए की सरकारी जमीन का बिना रजिस्ट्री ही म्यूटेशन


मांडर अंचल के राजस्वकर्मी ने रिटायरमेंट से महज चार माह पहले किया यह कारनामा रांची में जमीन घोटाला थम नहीं रहा है। जमीन के सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर और छेड़छाड़ कर सैकड़ों एकड़ सरकारी, आदिवासी जमीन की बंदरबांट की जा रही है। इसी बीच मांडर अंचल में नया घोटाला सामने आ गया है। मांडर अंचल के राजस्व कर्मचारी पुना उरांव ने रिटायरमेंट से महज 4 माह पहले गैर मजरुआ खाता की 14.34 एकड़ जमीन का बिना रजिस्ट्री के ही अवैध तरीके से म्यूटेशन कर दिया। यह वही जमीन है, जिसके घोटाले की जांच सीआईडी की एसआईटी कर रही है। इस खुलासे के बाद मांडर सीओ चंचला कुमारी ने मांडर थाने में पुना उरांव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर रही है। रांची-लोहरदगा एनएच पर मांडर टोल प्लाजा के पास स्थित इस बेशकीमती जमीन का म्यूटेशन सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ करके की गई। राजस्व कर्मी ने पंजी टू में छेड़छाड़ करके मौजा हेसमी के खाता संख्या- 152, प्लॉट संख्या -1163 के रकबा 14.34 एकड़ जमीन नारायण मिस्त्री, पिता नंदलाल मिस्त्री के नाम से कर दिया। ऑफलाइन पंजी टू में छेड़छाड़ के साथ ऑनलाइन पंजी टू में भी छेड़छाड़ करके गैर मजरुआ जमीन को रैयती बना दिया गया। इसके लिए न तो सीआई और न सीओ से अनुमति ली गई। जिस जमीन का अवैध म्यूटेशन किया गया है उसका बाजार वैल्यू करीब 8 लाख रुपए प्रति डिसमिल है। ऐसे में 14.34 डिसमील जमीन की कीमत करीब 115 करोड़ रुपए आंकी गई है। एसआईटी को एक साल पहले भेजी रिपोर्ट में सब सही, 8 माह में हुआ खेल मांडर सीओ ने सीआईडी के डीएसपी तारामणि बाखला को 21 अगस्त 2025 को इस जमीन की जांच रिपोर्ट भेजी थी। इसमें कहा गया था कि मौजा हेसमी के खाता संख्या 152, प्लॉट संख्या 1163 गैर मजरुआ जमीन है। इस का किस्म परती कदीम दर्ज है। मूल पंजी -2 के अनुसार लुकस उरांव के नाम से जमाबंदी था, जिसे पेन से घेर कर राजेश जेराल्ड एक्का का नाम दर्ज किया गया है। इस जमीन पर राजेश की प|ी सरोज लकड़ा द्वारा कंटीले तार से घेराबंदी कराने का जिक्र है। लेकिन अब पंजी टू में नारायण मिस्त्री, बलदेव प्रसाद शर्मा, रामेश्वर राम दुबे के नाम से दर्ज है। इससे साफ है कि मात्र 8 माह के दौरान अवैध तरीके से जमाबंदी की गई है। डीसीएलआर को 4 साल पहले अवैध जमाबंदी रद्द करने का भेजा था पत्र मांडर के तत्कालीन सीओ ने 31 मार्च 2022 को पत्रांक 414 के द्वारा रांची के डीसीएलआर को एक पत्र लिखा था। इसके माध्यम से उक्त खाता-प्लॉट के रैयत जेराल्ड एक्का, पिता जेम्स एरिक एक्का के नाम से चल रही जमाबंदी को बिहार भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धारा 4 (एच) के तहत कार्रवाई के लिए भेजा गया था। कहा गया था कि इस एक्ट के तहत जमीन का फर्जी या दुर्भावनापूर्ण हस्तांतरण को रद्द किया जाता है। लेकिन, इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद उक्त जमीन पर कंटीले तार से घेराबंदी भी हो गई। लेकिन अंचल के अधिकारी भी चुप्पी साधे रहे। राजस्व कर्मचारी ने किया इनकार, सीओ ने दर्ज कराई प्राथमिकी मांडर सीओ के पास जब उक्त जमीन के अवैध म्यूटेशन की शिकायत मिली तो उन्होंने राजस्व उप निरीक्षक से मौखिक पूछताछ की और लिखित स्पष्टीकरण मांगा। राजस्व उप निरीक्षक पुना उरांव ने अपने जवाब में कहा कि मूल पंजी में जमाबंदी दर्ज करने में उनकी कोई भूमिका नहीं है। लेकिन, सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार 22 दिसंबर 2025 को राजस्व उप निरीक्षक सदानंद ने उक्त हलका का प्रभार पुना उरांव को सौंपा था। इससे साफ है कि पुन्न उरांव ने ही पंजी टू में छेड़छाड़ की है। इसके बाद सीओ ने मांडर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है।

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