समस्तीपुर जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर विद्यापतिनगर से गुजरने वाली बाया नदी का अखाड़ा घाट पर तीन जिलों को जोड़ने के लिए करीब 8 करोड़ रुपए की लागत से आरसीसी पुल का निर्माण शुरू हुआ। एक दशक से अधिक समय गुजरने के बाद यहां पर पांच पाये का ही निर्माण हुआ। वह भी अब जर्जर हो गया है। बाढ़ के समय में लोग नाव की सवारी करते हैं। जबकि समान्य दिनों में पाये के पास खूद चंदा इकट्ठा कर मिट्टी भर कर आते जाते हैं। पुल नहीं बनने से लोग परेशान कई बार इस घाट पर नौका दुघर्टना भी हो चुकी है। नाराज ग्रामीण उदय रजक बताते है कि पुल नहीं बनने से परेशान है। इससे अच्छा मर जाते। सुखे में परेशान हैं। बाढ़ में मौत का डर सताता रहता है। नौका दुघटना में इस घाट पर 20 लोगों से अधिक की मौत हो चुकी है। 2013 में शुरू हुआ पुल का निर्माण साल 2013 में जब पुल का निर्माण काम शुरू हुआ था, तो लोगों को उम्मीद जगी थी कि मऊ धनेशपुर, बालकृष्णपुर मरवा, शेरपुर के लोगों का जीवन आसान हो जाएगा। लोग आसानी से इस इलाके से हरी सब्जी व अन्य आनाज विद्यापतिनर के बाजार में ला सकेंगे। लेकिन, सरकारी व्यवस्था के कारण लोग ठगा महसूस कर रहे हैं। जब पाये बनते हुए पुल का निर्माण बंद हुआ, तो लोगों को जानकारी मिली कि बिना जमीन अधिग्रहण के ही पुल का निर्माण शुरू कर दिया गया था। जब जमीन के स्वामियों ने इसका विरोध किया, तो पुल का निर्माण रूक गया। गलत नीति के कारण फंसा मामला इलाके के जाने-माने समाजसेवी कुणाल कुमार ने बताया कि सरकार व स्थानीय जनप्रतिनिधि की गलत नीति के कारण पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। आखिर बिना जमीन अधिग्रहण किए पुल का निर्माण 2013 में कैसे शुरू किया गया। करोंड़ों रुपए खर्च करने के बाद काम को बंद किया गया। यहां पर सरकारी फंड का बंदर बांट किया गया है। दियारा इलाके के लोग अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। जो पीलर बनाए गए, उसका सरिया अब खराब हो गया है। अब नये सिरे से पुल का निर्माण करना होगा। लंबे समय से इस इलाके के लोग पुल की आस लगाए हुए हैं। उन्होंने अखाड़ा घाट पर पुल बनने से समस्तीपुर के साथ ही बेगूसराय के लोगों को फायदा मिलता। विद्यापतिनगर का इलाका खत्म होने के बाद 4 किलोमीटर बेगूसराय और फिर गंगा नदी है। वहां पर पुल बना दिया जाय, तो लोग सीधा बाढ़ पहुंच जाएंगे। पुल बनने से यहां के किसान अपनी हरी सब्जी के साथ ही दूध, अनाज सीधा पटना के मंडी ले जा सकेंगे। जिससे उन्हें फायदा मिलता। लेकिन चुनाव के समय सिर्फ इंजीनियर को भेज दिया जाता है। ताकी लोगों को लगे की काम शुरू होने वाला है। बाजितपुर होकर आते-जाते हैं लोग विशनपुर गांव निवासी अशोक कुमार बताते हैं कि पुल के नहीं रहने के कारण इस इलाके के लोग दोदो पुल या बाजितपुर होकर आते-जाते हैं। जिससे काफी समय बर्बाद होता है। तीन से चार महीना पाये के पास मिट्टी भर कर लोग आते जाते हैं। नदी में पानी रहने पर लोगों को रोज दस किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी होती है। इस इलाके के 50 हजार से अधिक के आबादी प्रभावित होती है। ग्रामीण उपेंद्र राय बताते हैं कि सिर्फ पाया बनाने से नहीं होगा। जल्द से जल्द पुल बनना चाहिए। बाए के समय में पशु तो तैर कर निकल जाते है। लेकिन लोग फंस जाते हैं। इस घाट में नौका दुर्घटना में कई लोगों की जान भी जा चुकी है। विद्यापतिनगर का मऊ धनेशपुर दक्षिण, बालकृष्णपुर मरवा, शेरपुर के साथ ही बछबारा क्षेत्र के सैकड़ों किसान दियारे में परवल के साथ अन्य प्रकार की सब्जी की खेती करते हैं। लोग सब्जी बेचने के लिए गंगा पार कर बाढ़ जाते हैं। डीएम रोशन कुशवाहा ने कहा कि पुल निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। भू-स्वामी के लिए राशि की उपलब्धता कराई जा रही है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने पर पुल का निर्माण काम शुरू होगा। पुल का डीपीआर बनाने के समय ही गड़बड़ी हुई है।
10 साल बाद भी आरसीसी पुल का काम अधूरा:समस्तीपुर में 8 करोड़ रुपए की लागत से होना था निर्माण, लोग बोले- कई बार नाव हादसा हुआ
समस्तीपुर जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर विद्यापतिनगर से गुजरने वाली बाया नदी का अखाड़ा घाट पर तीन जिलों को जोड़ने के लिए करीब 8 करोड़ रुपए की लागत से आरसीसी पुल का निर्माण शुरू हुआ। एक दशक से अधिक समय गुजरने के बाद यहां पर पांच पाये का ही निर्माण हुआ। वह भी अब जर्जर हो गया है। बाढ़ के समय में लोग नाव की सवारी करते हैं। जबकि समान्य दिनों में पाये के पास खूद चंदा इकट्ठा कर मिट्टी भर कर आते जाते हैं। पुल नहीं बनने से लोग परेशान कई बार इस घाट पर नौका दुघर्टना भी हो चुकी है। नाराज ग्रामीण उदय रजक बताते है कि पुल नहीं बनने से परेशान है। इससे अच्छा मर जाते। सुखे में परेशान हैं। बाढ़ में मौत का डर सताता रहता है। नौका दुघटना में इस घाट पर 20 लोगों से अधिक की मौत हो चुकी है। 2013 में शुरू हुआ पुल का निर्माण साल 2013 में जब पुल का निर्माण काम शुरू हुआ था, तो लोगों को उम्मीद जगी थी कि मऊ धनेशपुर, बालकृष्णपुर मरवा, शेरपुर के लोगों का जीवन आसान हो जाएगा। लोग आसानी से इस इलाके से हरी सब्जी व अन्य आनाज विद्यापतिनर के बाजार में ला सकेंगे। लेकिन, सरकारी व्यवस्था के कारण लोग ठगा महसूस कर रहे हैं। जब पाये बनते हुए पुल का निर्माण बंद हुआ, तो लोगों को जानकारी मिली कि बिना जमीन अधिग्रहण के ही पुल का निर्माण शुरू कर दिया गया था। जब जमीन के स्वामियों ने इसका विरोध किया, तो पुल का निर्माण रूक गया। गलत नीति के कारण फंसा मामला इलाके के जाने-माने समाजसेवी कुणाल कुमार ने बताया कि सरकार व स्थानीय जनप्रतिनिधि की गलत नीति के कारण पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। आखिर बिना जमीन अधिग्रहण किए पुल का निर्माण 2013 में कैसे शुरू किया गया। करोंड़ों रुपए खर्च करने के बाद काम को बंद किया गया। यहां पर सरकारी फंड का बंदर बांट किया गया है। दियारा इलाके के लोग अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। जो पीलर बनाए गए, उसका सरिया अब खराब हो गया है। अब नये सिरे से पुल का निर्माण करना होगा। लंबे समय से इस इलाके के लोग पुल की आस लगाए हुए हैं। उन्होंने अखाड़ा घाट पर पुल बनने से समस्तीपुर के साथ ही बेगूसराय के लोगों को फायदा मिलता। विद्यापतिनगर का इलाका खत्म होने के बाद 4 किलोमीटर बेगूसराय और फिर गंगा नदी है। वहां पर पुल बना दिया जाय, तो लोग सीधा बाढ़ पहुंच जाएंगे। पुल बनने से यहां के किसान अपनी हरी सब्जी के साथ ही दूध, अनाज सीधा पटना के मंडी ले जा सकेंगे। जिससे उन्हें फायदा मिलता। लेकिन चुनाव के समय सिर्फ इंजीनियर को भेज दिया जाता है। ताकी लोगों को लगे की काम शुरू होने वाला है। बाजितपुर होकर आते-जाते हैं लोग विशनपुर गांव निवासी अशोक कुमार बताते हैं कि पुल के नहीं रहने के कारण इस इलाके के लोग दोदो पुल या बाजितपुर होकर आते-जाते हैं। जिससे काफी समय बर्बाद होता है। तीन से चार महीना पाये के पास मिट्टी भर कर लोग आते जाते हैं। नदी में पानी रहने पर लोगों को रोज दस किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी होती है। इस इलाके के 50 हजार से अधिक के आबादी प्रभावित होती है। ग्रामीण उपेंद्र राय बताते हैं कि सिर्फ पाया बनाने से नहीं होगा। जल्द से जल्द पुल बनना चाहिए। बाए के समय में पशु तो तैर कर निकल जाते है। लेकिन लोग फंस जाते हैं। इस घाट में नौका दुर्घटना में कई लोगों की जान भी जा चुकी है। विद्यापतिनगर का मऊ धनेशपुर दक्षिण, बालकृष्णपुर मरवा, शेरपुर के साथ ही बछबारा क्षेत्र के सैकड़ों किसान दियारे में परवल के साथ अन्य प्रकार की सब्जी की खेती करते हैं। लोग सब्जी बेचने के लिए गंगा पार कर बाढ़ जाते हैं। डीएम रोशन कुशवाहा ने कहा कि पुल निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। भू-स्वामी के लिए राशि की उपलब्धता कराई जा रही है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने पर पुल का निर्माण काम शुरू होगा। पुल का डीपीआर बनाने के समय ही गड़बड़ी हुई है।

