भास्कर न्यूज| चाईबासा प. सिंहभूम जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में मंडल कारा, चाईबासा में संचालित “प्रोजेक्ट परिवर्तन: हुनर से पहचान” के तहत आयोजित 10 दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण शिविर का सफलतापूर्वक समापन हो गया। आरसेटी चाईबासा द्वारा आयोजित इस शिविर में 30 बंदी प्रशिक्षुओं ने भाग लिया। समापन समारोह में उपायुक्त मनीष कुमार, सिविल सर्जन डॉ. जूझार माझी, सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार और जेल अधीक्षक सुनील कुमार सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे। इस मौके पर उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि कारागार केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सकारात्मक बदलाव का अवसर है। “प्रोजेक्ट परिवर्तन” का उद्देश्य बंदियों को आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। मशरूम उत्पादन कम लागत में बेहतर स्वरोजगार का जरिया है।सिविल सर्जन डॉ. जूझार माझी ने बंदियों को आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ नशामुक्त और अनुशासित जीवन अपनाने की प्रेरणा दी। प्रशिक्षण पाने वाले 30 बंदियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जेल से बाहर आने के बाद वे इस कौशल का उपयोग कर खुद का रोजगार शुरू करेंगे और समाज में एक नई पहचान बनाएंगे।
मंडल कारा के बंदी अब मशरूम उत्पादन से बदलेंगे अपनी तकदीर
भास्कर न्यूज| चाईबासा प. सिंहभूम जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में मंडल कारा, चाईबासा में संचालित “प्रोजेक्ट परिवर्तन: हुनर से पहचान” के तहत आयोजित 10 दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण शिविर का सफलतापूर्वक समापन हो गया। आरसेटी चाईबासा द्वारा आयोजित इस शिविर में 30 बंदी प्रशिक्षुओं ने भाग लिया। समापन समारोह में उपायुक्त मनीष कुमार, सिविल सर्जन डॉ. जूझार माझी, सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार और जेल अधीक्षक सुनील कुमार सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे। इस मौके पर उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि कारागार केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सकारात्मक बदलाव का अवसर है। “प्रोजेक्ट परिवर्तन” का उद्देश्य बंदियों को आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। मशरूम उत्पादन कम लागत में बेहतर स्वरोजगार का जरिया है।सिविल सर्जन डॉ. जूझार माझी ने बंदियों को आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ नशामुक्त और अनुशासित जीवन अपनाने की प्रेरणा दी। प्रशिक्षण पाने वाले 30 बंदियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जेल से बाहर आने के बाद वे इस कौशल का उपयोग कर खुद का रोजगार शुरू करेंगे और समाज में एक नई पहचान बनाएंगे।

