अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की बेतिया इकाई ने शनिवार को आपातकाल के 51 साल पूरे होने पर मशाल जुलूस निकाला। यह जुलूस शहर के शहीद पार्क से शुरू होकर सोआ बाबू चौक पर समाप्त हुआ। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लिया और आपातकाल थोपने वाली शक्तियों के खिलाफ नारे लगाए। परिषद के सदस्यों ने हाथों में मशाल लेकर “लोकतंत्र विरोधी ताकतें मुर्दाबाद”, “भारत माता की जय” और “आपातकाल थोपने वाली शक्तियां हो बर्बाद” जैसे नारे लगाए। इस प्रदर्शन का उद्देश्य भारतीय लोकतंत्र के उस ‘काले अध्याय’ के प्रति विरोध जताना था। नागरिकों के मौलिक अधिकारों का किया था हनन एबीवीपी पश्चिम चंपारण के विभाग संयोजक अभिजीत राय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि साल 1975 में लागू किया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था। उन्होंने बताया कि तत्कालीन सरकार के एक निरंकुश निर्णय ने लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन किया था। राय ने यह भी कहा कि आपातकाल के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया, राजनीतिक विरोधियों को जेल में डाला गया और लोकतांत्रिक मूल्यों को गंभीर क्षति पहुंची। जिला संयोजक सितांशु दिव्याल और प्रांत कार्यकारिणी सदस्य शैलेश कुशवाहा ने इस मशाल जुलूस को आपातकाल थोपने वाली शक्तियों के विरुद्ध लोकतांत्रिक प्रतिकार का प्रतीक बताया। नागरिक अधिकारों के महत्व के प्रति जागरूक करना उद्देश्य उन्होंने कहा कि इस आयोजन का लक्ष्य युवाओं को लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों के महत्व के प्रति जागरूक करना है। दोनों नेताओं ने जोर दिया कि जब भी देश में लोकतांत्रिक मूल्यों पर आघात करने का प्रयास होगा, समाज का जागरूक वर्ग उसके विरोध में आवाज उठाएगा। कार्यक्रम में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र की रक्षा, संविधान के सम्मान और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए सदैव संघर्षरत रहने का संकल्प लिया। यह मशाल जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और युवा शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान राष्ट्रभक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन में नारे गूंजते रहे।
बेतिया में ABVP ने निकला मशाल-जुलूस:लोकतंत्र की रक्षा का लिया संकल्प, आपातकाल के पूरे हुए 51 साल
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की बेतिया इकाई ने शनिवार को आपातकाल के 51 साल पूरे होने पर मशाल जुलूस निकाला। यह जुलूस शहर के शहीद पार्क से शुरू होकर सोआ बाबू चौक पर समाप्त हुआ। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लिया और आपातकाल थोपने वाली शक्तियों के खिलाफ नारे लगाए। परिषद के सदस्यों ने हाथों में मशाल लेकर “लोकतंत्र विरोधी ताकतें मुर्दाबाद”, “भारत माता की जय” और “आपातकाल थोपने वाली शक्तियां हो बर्बाद” जैसे नारे लगाए। इस प्रदर्शन का उद्देश्य भारतीय लोकतंत्र के उस ‘काले अध्याय’ के प्रति विरोध जताना था। नागरिकों के मौलिक अधिकारों का किया था हनन एबीवीपी पश्चिम चंपारण के विभाग संयोजक अभिजीत राय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि साल 1975 में लागू किया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था। उन्होंने बताया कि तत्कालीन सरकार के एक निरंकुश निर्णय ने लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन किया था। राय ने यह भी कहा कि आपातकाल के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया, राजनीतिक विरोधियों को जेल में डाला गया और लोकतांत्रिक मूल्यों को गंभीर क्षति पहुंची। जिला संयोजक सितांशु दिव्याल और प्रांत कार्यकारिणी सदस्य शैलेश कुशवाहा ने इस मशाल जुलूस को आपातकाल थोपने वाली शक्तियों के विरुद्ध लोकतांत्रिक प्रतिकार का प्रतीक बताया। नागरिक अधिकारों के महत्व के प्रति जागरूक करना उद्देश्य उन्होंने कहा कि इस आयोजन का लक्ष्य युवाओं को लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों के महत्व के प्रति जागरूक करना है। दोनों नेताओं ने जोर दिया कि जब भी देश में लोकतांत्रिक मूल्यों पर आघात करने का प्रयास होगा, समाज का जागरूक वर्ग उसके विरोध में आवाज उठाएगा। कार्यक्रम में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र की रक्षा, संविधान के सम्मान और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए सदैव संघर्षरत रहने का संकल्प लिया। यह मशाल जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और युवा शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान राष्ट्रभक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन में नारे गूंजते रहे।


