मुख्य बातें:
भागलपुर से आरफीन जुबैर की रिपोर्ट
PhD Regulation 2026: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) सहित बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में पीएचडी (Ph.D) की पढ़ाई, शोध मूल्यांकन और उपाधि प्रदान करने की पूरी प्रक्रिया अब एक समान होने जा रही है. लोकभवन सचिवालय ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सभी कुलपतियों को ‘यूनिफॉर्म ऑर्डिनेंस एंड रेगुलेशंस गवर्निंग द अवार्ड ऑफ पीएचडी डिग्री’ का नया प्रारूप भेजा था. इसके तहत सभी विश्वविद्यालयों को 30 जून तक इसे अपने वैधानिक निकायों से अनुमोदित कराने का कड़ा निर्देश दिया गया था. इसी आलोक में टीएमबीयू प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नए ‘पीएचडी रेगुलेशन 2026’ को आधिकारिक मंजूरी दे दी है और इसकी रिपोर्ट लोकभवन को भेज दी है.
सिंडिकेट की आपात बैठक में लगी मुहर; जेआरएफ छात्रों को मिलेगी पहली प्राथमिकता
- ऑनलाइन सिंडिकेट में लगी मुहर: टीएमबीयू के प्रभारी कुलपति प्रोफेसर विमलेंदु शेखर झा की अध्यक्षता में रविवार को आयोजित ऑनलाइन सिंडिकेट की विशेष बैठक में इस रेगुलेशन को सर्वसम्मति से पारित किया गया. रजिस्ट्रार प्रोफेसर रामाशीष पूर्वे ने बताया कि लोकभवन की डेडलाइन के भीतर ही विवि ने अपनी रिपोर्ट भेज दी है.
- सीटों का आवंटन: नए नियमों के तहत अब पीएचडी में नामांकन के समय जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) प्राप्त विद्यार्थियों को शीर्ष प्राथमिकता दी जाएगी.
- नेट उत्तीर्ण छात्रों को मौका: जेआरएफ श्रेणी के अभ्यर्थियों के दाखिले के बाद यदि सीटें रिक्त बचती हैं, तभी नेट (NET) या नेट-पीएचडी पास अन्य परीक्षार्थियों को मेरिट के आधार पर मौका दिया जाएगा.
रिटायरमेंट के 3 साल शेष वाले शिक्षक नहीं बनेंगे सुपरवाइजर; डीआरसीसी में होगा बदलाव
‘पीएचडी रेगुलेशन 2026’ में स्पष्ट कर दिया गया है कि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में अब केवल 3 वर्ष या उससे कम का समय शेष है, वे किसी भी नए शोधार्थी के मुख्य सुपरवाइजर या विभागाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी नहीं संभाल सकेंगे. इसके अतिरिक्त, डिपार्टमेंट रिसर्च काउंसिल (DRCC) के ढांचे में भी बदलाव किया गया है; अब इसमें विभाग के हेड, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर के साथ-साथ पीजी (Post Graduate) की पढ़ाई कराने वाले कॉलेजों के योग्य शिक्षकों को भी सदस्य के रूप में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा.
PhD Regulation 2026: शोधार्थियों के लिए प्रतिदिन 4 घंटे की हाजिरी अनिवार्य; प्लेगरिज्म जांच होगी सख्त
- डेली अटेंडेंस: सभी नामांकित शोधार्थियों को अपने आवंटित विभाग में सुपरवाइजर की प्रत्यक्ष देखरेख में प्रतिदिन न्यूनतम चार घंटे (4 Hours) अनिवार्य रूप से शोध कार्य करना होगा, जिसकी दैनिक उपस्थिति (हाजिरी) दर्ज की जाएगी.
- प्रोग्रेस रिपोर्ट व सेमिनार: शोधार्थियों को निर्धारित शैक्षणिक मानकों के अनुसार समय-समय पर अपनी नियमित प्रगति रिपोर्ट जमा करनी होगी और विवि के समक्ष सेमिनार प्रस्तुत करना होगा.
- प्लेगरिज्म टेस्ट: किसी भी शोध प्रबंध (Thesis) को अंतिम रूप से जमा करने से पहले यूजीसी (UGC) के मानकों के अनुरूप ‘प्लेगरिज्म’ (साहित्यिक चोरी) की अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर से कड़ाई से जांच की जाएगी. हालांकि, शोधार्थियों को पूरे शैक्षणिक वर्ष में एक माह के वैधानिक अवकाश की सुविधा भी दी जाएगी.
लोकभवन का मानना है कि इस यूनिफॉर्म ऑर्डिनेंस के लागू होने से सूबे के उच्च शिक्षा ढांचे में बड़ा गुणात्मक सुधार आएगा और बिहार की पीएचडी डिग्रियों की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वसनीयता और अधिक सुदृढ़ होगी.


